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बंधुआ मजदूरी का खौफनाक चेहरा : पीट-पीटकर मौत, फिर बैग में भरकर गायब कर दी लाश!

रोटी की तलाश में पहुंचे मजदूर, मिले जंजीर जैसे हालात और मौत का साया

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जिले के तितावी थाना क्षेत्र स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण इकाई में बंधुआ मजदूरों को कैद करके रखने और उनके साथ अमानवीय व्यवहार करने के आरोपों की जांच के दौरान एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि फैक्ट्री में बंधक बनाकर रखे गए एक मजदूर की कथित तौर पर यातनाएं दिए जाने के कारण मौत हो गई थी। आरोप है कि मौत के बाद उसके शव को एक बैग में भरकर ठिकाने लगा दिया गया।

पुलिस प्रशासन इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए जांच को आगे बढ़ा रहा है। मामले में नए सिरे से मुकदमा दर्ज किया गया है और आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।

एसएसपी ने किया चौंकाने वाला खुलासा

मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय कुमार ने बताया कि हाल ही में मांडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री पर प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी के बाद 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया था। इसके बाद जब मामले की गहन जांच शुरू हुई तो कई गंभीर तथ्य सामने आए।

जांच के दौरान यह जानकारी मिली कि फैक्ट्री में काम कर रहे एक मजदूर की पिछले वर्ष कथित रूप से यातनाओं के चलते मौत हो गई थी। पुलिस अब इस मामले को हत्या और साक्ष्य मिटाने के दृष्टिकोण से भी जांच रही है।

मृतक की पहचान अर्जुन के रूप में हुई

पुलिस के अनुसार मृतक मजदूर की पहचान अर्जुन नामक युवक के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नवंबर 2025 के दौरान उसे फैक्ट्री परिसर में बेहद क्रूर परिस्थितियों में रखा गया था। आरोप है कि लगातार मारपीट और यातनाएं झेलने के कारण उसकी मौत हो गई।

इतना ही नहीं, आरोपियों ने घटना को छिपाने के लिए शव को एक बैग में भरकर कहीं फेंक दिया। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले में नई धाराएं जोड़ते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

फैक्ट्री मालिक समेत आरोपियों पर नया मुकदमा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान और उसके सहयोगी शिवा त्यागी के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी अंकित बालियान अभी भी फरार बताया जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दो विशेष टीमें गठित की गई हैं। संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने का दावा किया जा रहा है।

एसआईटी करेगी पूरे मामले की जांच

मामले की संवेदनशीलता और गंभीर आरोपों को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह टीम पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच करेगी तथा सभी साक्ष्यों को एकत्र कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

एसएसपी ने बताया कि मुक्त कराए गए सभी मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है। कई मजदूरों के शरीर पर चोट, मारपीट और उत्पीड़न के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। पीड़ितों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत कर उनके बयान भी दर्ज कराए गए हैं।

पुनर्वास के लिए प्रशासन सक्रिय

बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए श्रमिकों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन और श्रम विभाग संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार पीड़ित मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, बैंक खाते खुलवाने तथा उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा मजदूरों को उनके परिवारों से मिलाने का प्रयास भी किया जा रहा है ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

चार मजदूरों के परिवारों से संपर्क

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि अब तक चार मजदूरों के परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा चुका है। शेष श्रमिकों के परिवारों की तलाश जारी है। विभिन्न राज्यों के प्रशासन से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि पीड़ितों के परिजनों तक जल्द पहुंचा जा सके।

22 जून को हुई थी छापेमारी

गौरतलब है कि 22 जून को प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मांडी गांव स्थित इस पेपर प्लेट फैक्ट्री पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान नाबालिगों समेत कुल 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया था।

जांच में पता चला कि इन मजदूरों को अलग-अलग राज्यों से रोजगार का झांसा देकर यहां लाया गया था। उन्हें प्रति माह 12 हजार रुपये वेतन देने का वादा किया गया था, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग निकली।

वेतन नहीं मिला, बाहर निकलने की भी नहीं थी अनुमति

मुक्त कराए गए मजदूरों ने पुलिस को बताया कि उन्हें न तो तय मजदूरी दी जाती थी और न ही फैक्ट्री परिसर से बाहर जाने की अनुमति थी। वे पूरी तरह से मालिकों के नियंत्रण में रहते थे और किसी भी प्रकार की स्वतंत्रता से वंचित थे।

पीड़ितों के अनुसार उन्हें एक वर्ष से अधिक समय तक फैक्ट्री परिसर में ही कैद रखकर काम कराया गया। विरोध करने या भागने की कोशिश करने वालों के साथ बर्बरता की जाती थी।

मजदूरों ने सुनाई अत्याचार की दर्दनाक कहानी

बचाए गए श्रमिकों ने जांच अधिकारियों को जो जानकारी दी है, वह बेहद भयावह है। मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री छोड़ने का प्रयास करने पर उन्हें बेरहमी से पीटा जाता था। कुछ पीड़ितों ने बताया कि उनके ऊपर भाले से हमला किया गया, कोड़े मारे गए और कुत्तों से कटवाया गया।

इतना ही नहीं, मजदूरों को अपमानित करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए कथित तौर पर जानवरों का चारा खाने तक के लिए मजबूर किया जाता था। इन आरोपों ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।

पहले भी दर्ज हो चुका है मुकदमा

इस मामले में पुलिस पहले ही फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान, प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम तथा बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर चुकी है।

प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी अंकित बालियान अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

मुजफ्फरनगर का यह मामला केवल बंधुआ मजदूरी का नहीं बल्कि मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का उदाहरण बनकर सामने आया है। मजदूरों के साथ कथित रूप से किए गए अत्याचार और एक श्रमिक की मौत के आरोपों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। अब सभी की निगाहें एसआईटी जांच और पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी और पीड़ितों को न्याय प्राप्त होगा।

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