दोस्ती से दुश्मनी और फिर गैंगवार का खूनी खेल : कैसे बना सुंदर भाटी पश्चिम यूपी का सबसे खौफनाक गैंगस्टर?
चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अपराध दुनिया में कई ऐसे नाम रहे हैं, जिनका खौफ वर्षों तक लोगों के दिलों में बना रहा। इनमें सुंदर सिंह भाटी का नाम सबसे चर्चित और विवादित नामों में गिना जाता है। कभी ट्रांसपोर्ट और ठेकेदारी का काम करने वाला यह युवक बाद में अपराध की दुनिया का ऐसा चेहरा बन गया, जिसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, अपहरण और अवैध कारोबार समेत 60 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज हुए।
सुंदर भाटी की कहानी केवल एक गैंगस्टर की कहानी नहीं है। यह दोस्ती, महत्वाकांक्षा, सत्ता, वर्चस्व और खूनी दुश्मनी की ऐसी दास्तान है, जिसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वर्षों तक गैंगवार की आग को जलाए रखा। कभी जिस दोस्त के साथ उसके संबंधों की मिसाल दी जाती थी, उसी दोस्त की हत्या ने पूरे क्षेत्र को हिंसा और बदले की राजनीति में झोंक दिया।
कौन है सुंदर सिंह भाटी?
सुंदर सिंह भाटी गौतम बुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के घंघौला गांव का रहने वाला है। शुरुआती दौर में वह ट्रांसपोर्ट और ठेकेदारी के कारोबार से जुड़ा हुआ था। उस समय तक वह अपराध जगत का बड़ा नाम नहीं था। स्थानीय स्तर पर व्यवसाय और प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के दौरान उसकी पहचान कई प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक व्यक्तियों से हुई।
बताया जाता है कि यही संपर्क आगे चलकर उसके लिए अपराध की दुनिया का रास्ता बन गए। धीरे-धीरे उसने स्थानीय स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू किया और फिर अपराध जगत में सक्रिय हो गया। समय के साथ उसका नाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा तक फैल गया।
अपराध की दुनिया में बढ़ता प्रभाव
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सुंदर भाटी पर वर्षों के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, अपहरण, अवैध वसूली और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े अनेक मुकदमे दर्ज हुए। अपराध जगत में उसका प्रभाव लगातार बढ़ता गया और उसने अपना अलग नेटवर्क तैयार कर लिया।
उस दौर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गैंगवार की घटनाएं आम थीं। कई गिरोह वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे थे। ऐसे माहौल में सुंदर भाटी ने भी अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने की कोशिश की और देखते ही देखते वह क्षेत्र के सबसे चर्चित अपराधियों में शामिल हो गया।
जब दोस्ती की मिसाल हुआ करती थी
सुंदर भाटी और नरेश भाटी की दोस्ती कभी पूरे इलाके में चर्चा का विषय हुआ करती थी। दोनों के संबंध इतने मजबूत बताए जाते थे कि लोग उनकी दोस्ती की मिसाल देते थे। कहा जाता है कि दोनों एक-दूसरे पर बेहद भरोसा करते थे और हर मुश्किल समय में साथ खड़े रहते थे।
जानकारों के अनुसार दोनों की नजदीकियां उस समय बढ़ीं, जब वे सतबीर गुर्जर के गिरोह से जुड़े हुए थे। अपराध जगत में साथ काम करते हुए दोनों के बीच गहरा विश्वास पैदा हुआ। उस समय किसी ने शायद ही सोचा होगा कि यही दोस्ती एक दिन खूनी दुश्मनी में बदल जाएगी।
महत्वाकांक्षा बनी रिश्तों की दुश्मन
समय के साथ दोनों की महत्वाकांक्षाएं बढ़ने लगीं। क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने की होड़ शुरू हो गई। बताया जाता है कि सिकंदराबाद क्षेत्र की ट्रक यूनियन पर नियंत्रण हासिल करने की इच्छा दोनों पक्षों में थी।
इसी दौरान राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी सामने आने लगीं। नरेश भाटी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहता था। दूसरी ओर सुंदर भाटी भी राजनीतिक पहचान और प्रभाव बढ़ाने के लिए चुनावी मैदान में उतरने की इच्छा रखता था।
यहीं से दोनों के बीच मतभेद शुरू हुए। पहले जो असहमति थी, वह धीरे-धीरे अविश्वास में बदली और फिर दुश्मनी का रूप लेती चली गई। हालात ऐसे हो गए कि कभी एक-दूसरे के सबसे करीबी दोस्त रहे दोनों लोग आमने-सामने खड़े हो गए।
जिला पंचायत चुनाव के बाद बढ़ी तनातनी
नरेश भाटी ने जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। चुनावी सफलता ने उसके राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत कर दिया। दूसरी ओर सुंदर भाटी अपने बढ़ते प्रभाव के बावजूद राजनीतिक रूप से वह स्थान हासिल नहीं कर पाया, जिसकी उसे उम्मीद थी।
राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई ने दोनों के बीच की दूरी और बढ़ा दी। दोनों पक्षों के समर्थक भी अलग-अलग खेमों में बंट गए। इसके बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल लगातार गहराता गया।
2004 की वह घटना जिसने बदल दिया सब कुछ
वर्ष 2004 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अपराध दुनिया ने एक ऐसी घटना देखी, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। आरोपों के अनुसार घंघौला पुलिया के पास नरेश भाटी की गाड़ी को घेरकर उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं।
इस हमले में नरेश भाटी की मौत हो गई। कभी दोस्त रहे दो लोगों के बीच की दुश्मनी अब खून की कहानी बन चुकी थी। इस घटना ने अपराध जगत में एक नए और लंबे गैंगवार की नींव रख दी।
नरेश भाटी की हत्या के बाद क्षेत्र में तनाव और हिंसा का दौर शुरू हो गया। दोनों पक्षों के बीच बदले की भावना ने कई नई घटनाओं को जन्म दिया।
शुरू हुआ खूनी गैंगवार
नरेश भाटी की मौत के बाद उसके भाई रणपाल ने मोर्चा संभाला। उसने अपने भाई की हत्या का बदला लेने का संकल्प लिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच संघर्ष और तेज हो गया।
बताया जाता है कि बदले की कार्रवाई में सुंदर भाटी के भाई समेत कई लोगों की हत्या कर दी गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उस समय गैंगवार की घटनाएं लगातार सुर्खियां बनने लगीं। हर नई घटना के साथ दुश्मनी और गहरी होती चली गई।
हालांकि बाद में रणपाल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तनाव समाप्त नहीं हुआ।
कई बार हुई हत्या की कोशिश
सुंदर भाटी पर वर्षों के दौरान कई बार जानलेवा हमले किए गए। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उसे खत्म करने की कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन वह हर बार बच निकलने में सफल रहा।
इन घटनाओं ने उसकी छवि एक ऐसे गैंगस्टर की बना दी, जो लगातार हमलों और पुलिस कार्रवाई के बावजूद अपने प्रभाव को बनाए रखने में सफल रहा। यही वजह रही कि उसका नाम लंबे समय तक अपराध जगत की चर्चाओं में बना रहा।
अपराध, राजनीति और प्रभाव का जटिल समीकरण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अपराध दुनिया में अक्सर अपराध और राजनीति के रिश्तों को लेकर चर्चा होती रही है। सुंदर भाटी का नाम भी कई बार इसी संदर्भ में लिया जाता रहा। क्षेत्रीय राजनीति, आर्थिक हितों और गैंगवार के बीच उसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपराध जगत की कई कहानियां केवल गैंगवार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उनमें राजनीतिक और आर्थिक हित भी जुड़े रहे। सुंदर भाटी की कहानी भी इसी जटिल समीकरण का एक प्रमुख उदाहरण मानी जाती है।
एक दोस्ती जिसने अपराध इतिहास बदल दिया
सुंदर भाटी और नरेश भाटी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सत्ता, वर्चस्व और महत्वाकांक्षा किस तरह सबसे मजबूत रिश्तों को भी तोड़ सकती है। जो लोग कभी एक-दूसरे के सबसे भरोसेमंद साथी थे, वही बाद में एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन गए।
उनकी दुश्मनी ने केवल दो व्यक्तियों की जिंदगी नहीं बदली, बल्कि पूरे क्षेत्र में वर्षों तक चलने वाले गैंगवार को जन्म दिया। यही कारण है कि सुंदर भाटी का नाम आज भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराध इतिहास में एक महत्वपूर्ण और चर्चित अध्याय के रूप में दर्ज है।









