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राम मंदिर दान चोरी मामला : बैंक खातों और ऑनलाइन चढ़ावे को लेकर सामने आए नए तथ्य

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

अयोध्या। राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले के हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। अब तक की जांच में बरामद धनराशि, बैंक खातों की जानकारी, ऑनलाइन चढ़ावे की व्यवस्था और आरोपितों के वित्तीय लेनदेन की जांच प्रमुख बिंदु बनकर उभरे हैं।

सूत्रों के अनुसार, अब तक हुई कार्रवाई में सबसे बड़ी धनराशि की बरामदगी मुख्य आरोपित अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर हुई है। इसके साथ ही पुलिस ने विभिन्न बैंक खातों की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित बैंकों से भी विस्तृत विवरण मांगा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दान की राशि में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध लेनदेन तो नहीं हुआ।

अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर हुई बड़ी बरामदगी

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब तक करीब 89 लाख रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। इस बरामद धनराशि का अधिकांश हिस्सा अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर मिला है। बताया जा रहा है कि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही मंदिर ट्रस्ट ने अपने स्तर पर कुछ धनराशि बरामद कर ली थी, जिसे बाद में जांच का हिस्सा बनाया गया।

पुलिस अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह धनराशि किन परिस्थितियों में गायब हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। इसके लिए सभी संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ के साथ-साथ बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

ऑनलाइन चढ़ावे की व्यवस्था अलग, नकद जमा की प्रक्रिया अलग

जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि मंदिर ट्रस्ट के अलग-अलग बैंकों में अलग उद्देश्य के लिए खाते संचालित किए जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में ट्रस्ट का एक ऐसा खाता संचालित है, जिसमें केवल ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त होने वाला चढ़ावा जमा किया जाता है।

इस खाते में भक्तों द्वारा यूपीआई, क्यूआर कोड, इंटरनेट बैंकिंग और अन्य डिजिटल माध्यमों से भेजी गई राशि ही जमा होती है। इस खाते में नकद धनराशि जमा नहीं की जाती और न ही बैंक कर्मचारियों की नकद चढ़ावे की गिनती या प्रबंधन में कोई भूमिका होती है।

एसबीआई है ट्रस्ट का मुख्य बैंक

जानकारी के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट का मुख्य बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) है। नकद चढ़ावे का अधिकांश हिस्सा एसबीआई के माध्यम से जमा किया जाता है। इसके लिए एसबीआई की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था भी की गई है, जो निर्धारित प्रक्रिया के तहत नकद राशि का प्रबंधन करते हैं।

बताया जा रहा है कि कुल चढ़ावे का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा नकद के रूप में एसबीआई प्रणाली के जरिए जमा होता है, जबकि 10 से 15 प्रतिशत राशि ऑनलाइन माध्यम से बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के खातों में पहुंचती है।

हर महीने करोड़ों रुपये का ऑनलाइन चढ़ावा

सूत्रों के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट की स्थापना के बाद से नियमित दिनों में बैंक ऑफ बड़ौदा के ऑनलाइन खाते में हर महीने लगभग एक करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये तक की राशि जमा होती रही है।

विशेष अवसरों, त्योहारों, अवकाश और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान ऑनलाइन चढ़ावे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होती है। विशेष रूप से महाकुंभ जैसे आयोजनों के दौरान यह राशि बढ़कर चार से पांच करोड़ रुपये प्रतिमाह तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि ट्रस्ट इस खाते से वर्ष में केवल एक-दो बार ही धनराशि निकालता है और वह भी पूरी बैंकिंग प्रक्रिया का पालन करते हुए चेक के माध्यम से। यदि निकासी की राशि अधिक होती है तो वरिष्ठ अधिकारियों के सत्यापन और अनुमोदन के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

बैंक ऑफ बड़ौदा में किन लोगों के खाते हैं?

जांच के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में कुछ प्रमुख व्यक्तियों के खातों को लेकर भी जानकारी सामने आई है।

सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय का एक बैंक खाता इस शाखा में मौजूद है, जो वर्षों पहले दिल्ली से स्थानांतरित होकर यहां आया था। हालांकि बताया जा रहा है कि यह खाता वर्तमान में सक्रिय नहीं है और इसमें बहुत कम धनराशि उपलब्ध है।

इसके अलावा ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का भी इसी शाखा में बैंक खाता है। जानकारी के अनुसार, कुछ महीने पहले उन्होंने इसी बैंक से लगभग 20 लाख रुपये का वाहन ऋण लेकर एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदा था।

इसी बैंक में ट्रस्ट का एक अधिकृत ऑनलाइन चढ़ावा खाता भी संचालित है, जिसका विवरण ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध बताया जाता है।

पुलिस ने मांगी आरोपितों के खातों की जानकारी

दान चोरी मामले की जांच के तहत पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा को नोटिस जारी कर कुछ व्यक्तियों के बैंक खातों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।

सूत्रों के अनुसार पुलिस ने अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और सुप्रिया मिश्रा के खातों का विवरण मांगा था। सुप्रिया मिश्रा, आरोपी लवकुश मिश्रा की पत्नी बताई जा रही हैं।

बैंक की ओर से पुलिस को लिखित रूप में जानकारी दी गई कि संबंधित शाखा में केवल मनीष यादव का बैंक खाता संचालित है। अविनाश शुक्ला और सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला।

बताया जा रहा है कि मनीष यादव के खाते में फिलहाल लगभग 1,400 रुपये की राशि मौजूद है और पिछले कई महीनों से इस खाते में कोई उल्लेखनीय लेनदेन नहीं हुआ है। पुलिस अब अन्य बैंकों से भी खातों का विवरण जुटाकर वित्तीय गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है।

संपत्ति और बैंक लेनदेन की भी हो रही जांच

जांच एजेंसियां केवल बैंक खातों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि आरोपितों की संपत्तियों, जमीन खरीद, मकान निर्माण और अन्य वित्तीय स्रोतों की भी जांच कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, लवकुश मिश्रा द्वारा खरीदी गई कुछ संपत्तियों और उनके वित्तीय स्रोतों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संपत्तियों की खरीद में उपयोग की गई धनराशि का स्रोत क्या था और क्या उसका इस मामले से कोई संबंध है।

हर पहलू की गहन जांच में जुटी पुलिस

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले में बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, नकद चढ़ावे, संपत्ति के दस्तावेज, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राम मंदिर दान चोरी प्रकरण धार्मिक आस्था से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला माना जा रहा है। ऐसे में जांच एजेंसियां हर पहलू की निष्पक्ष और गहन जांच कर रही हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके। आने वाले दिनों में बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों के आधार पर इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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