बन्थरा में कथित फर्जी कीटनाशक बिक्री का मामला : एक्सपायरी दवा से पान की फसल नष्ट होने का आरोप
किसान ने न्याय की लगाई गुहार
रिपोर्ट: कमलेश कुमार चौधरी
बन्थरा, लखनऊ. लखनऊ के बन्थरा थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने किसानों के बीच कीटनाशक दवाओं की बिक्री व्यवस्था और उसकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक किसान ने आरोप लगाया है कि बिना वैध पंजीकरण के कीटनाशक दवाओं का कारोबार किया जा रहा है और इसी के चलते उसे एक्सपायरी डेट की दवा बेच दी गई। किसान का दावा है कि दवा के छिड़काव के कुछ ही दिनों बाद उसकी लगभग एक बीघा में तैयार पान की पूरी फसल बर्बाद हो गई, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
पीड़ित किसान ने इस मामले में थाना बन्थरा पुलिस को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि किसान का आरोप है कि शिकायत दिए जाने के कई दिन बाद भी आरोपी के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
एक्सपायरी दवा देने का आरोप, पूरी फसल हुई नष्ट
जानकारी के अनुसार, बन्थरा थाना क्षेत्र के किशनपुर कौड़ियां निवासी राजेश चौरसिया ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया है कि उनकी नीवा कुटिया बाजार स्थित लगभग एक बीघा जमीन पर पान की खेती है। परिवार की आजीविका मुख्य रूप से इसी खेती पर निर्भर है।
किसान का आरोप है कि वह अपनी पान की फसल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से स्थानीय विक्रेता जय प्रकाश चौरसिया की दुकान से कीटनाशक दवा खरीदने गया था। लेकिन उसे कथित रूप से कीटनाशक की जगह एक्सपायरी डेट की खरपतवार नाशक दवा दे दी गई। राजेश चौरसिया का कहना है कि वह अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए दवा की पहचान नहीं कर सके और विक्रेता द्वारा दी गई दवा को ही पान की फसल पर छिड़क दिया।
उनका दावा है कि दवा के छिड़काव के लगभग तीन दिन बाद पूरी पान की भीट सूखने लगी और देखते ही देखते पूरी फसल नष्ट हो गई।
बेटे ने देखी दवा की शीशी, तब खुला मामला
पीड़ित किसान के अनुसार, जब फसल खराब होने लगी तो उन्होंने दवा की बची हुई शीशी अपने बेटे को दिखाई। शीशी पर अंकित विवरण देखने के बाद पता चला कि दवा की एक्सपायरी अवधि समाप्त हो चुकी थी और वह पान की फसल के लिए उपयुक्त कीटनाशक भी नहीं थी।
इसके बाद किसान को संदेह हुआ कि उसे गलत और एक्सपायरी दवा बेच दी गई, जिसके कारण उसकी मेहनत से तैयार पूरी फसल बर्बाद हो गई।
दो वर्षों की आजीविका पर पड़ा असर
राजेश चौरसिया का कहना है कि पान की खेती से ही उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। एक बार तैयार की गई पान की भीट से लंबे समय तक उत्पादन मिलता है और परिवार की आर्थिक व्यवस्था इसी पर आधारित रहती है।
फसल पूरी तरह नष्ट हो जाने के कारण अब उनके सामने परिवार का खर्च चलाने का संकट उत्पन्न हो गया है। उनका कहना है कि इस नुकसान की भरपाई करना उनके लिए आसान नहीं है और आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
बिना पंजीकरण कीटनाशक बेचने का आरोप
शिकायत में किसान ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित विक्रेता के पास खाद एवं बीज का लाइसेंस तो है, लेकिन वह लंबे समय से बिना आवश्यक पंजीकरण के कीटनाशक दवाओं का भी कारोबार कर रहा है।
किसान का कहना है कि यदि संबंधित विभाग समय-समय पर जांच करता और नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाता तो इस प्रकार की घटना से बचा जा सकता था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित विभाग से भी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
पीड़ित किसान के अनुसार, उन्होंने 26 जून 2026 को थाना बन्थरा पुलिस को लिखित तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
किसान का आरोप है कि पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर संबंधित दवा विक्रेता प्रारंभ में थाने नहीं पहुंचा। बाद में पुलिस के दबाव पर वह थाने आया, लेकिन कुछ ही देर बाद वहां से चला गया। इसके बावजूद उसकी शिकायत पर अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
दुकान बंद मिलने का दावा
मामले की जानकारी मिलने के बाद जब मीडिया प्रतिनिधियों ने संबंधित दवा विक्रेता की दुकान पर पहुंचकर स्थिति जानने का प्रयास किया तो दुकान बंद मिली।
बताया गया कि फोन पर संपर्क करने की कोशिश करने पर विक्रेता के बेटे ने कॉल रिसीव की, लेकिन अपने पिता के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। किसान का आरोप है कि शिकायत सामने आने के बाद से संबंधित व्यक्ति उपलब्ध नहीं हो रहा है।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
किसानों ने की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय किसानों का कहना है कि कृषि कार्य में प्रयोग होने वाली दवाओं की गुणवत्ता सीधे फसल उत्पादन से जुड़ी होती है। यदि बाजार में बिना अनुमति या एक्सपायरी दवाओं की बिक्री हो रही है तो यह न केवल किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है बल्कि कृषि व्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित दवा के नमूनों की जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से न्याय की उम्मीद
फसल नष्ट होने से परेशान किसान राजेश चौरसिया ने पुलिस प्रशासन और कृषि विभाग से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उनकी वर्षों की मेहनत कुछ ही दिनों में बर्बाद हो गई है। ऐसे में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होने के साथ-साथ उन्हें हुए आर्थिक नुकसान का भी उचित आकलन कर राहत प्रदान की जानी चाहिए।
अब यह मामला स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की जांच पर निर्भर करेगा कि किसान द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो अवैध रूप से कीटनाशक दवाओं की बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो जांच रिपोर्ट से वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।









