पत्रकार की मौत, वायरल वीडियो और राहत कोष की रिपोर्ट… अब प्रशासनिक जांच में क्या निकलेगा?

गोंडा में पत्रकार मोहम्मद सुलेमान की मौत के बाद वायरल वीडियो और मुख्यमंत्री राहत कोष की रिपोर्ट की जांच

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रिपोर्ट : दुर्गा प्रसाद शुक्ला

गोंडा। मनकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत गढ़ी निवासी पत्रकार मोहम्मद सुलेमान की अचानक मौत के बाद सामने आए एक वीडियो ने पूरे मामले को गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया है। मौत से कुछ घंटे पहले बनाए गए बताए जा रहे इस वीडियो में सुलेमान ने अपनी बीमारी, इलाज में आने वाले भारी खर्च और मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता नहीं मिलने को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने राहत कोष के लिए हुई जांच में लेखपाल की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए थे।

पत्रकार की मौत के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने से मामला चर्चा में आ गया। पत्रकार संगठनों ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन से जांच की मांग की। इसके बाद जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को मामले की जांच के निर्देश दिए। बुधवार को राजस्व विभाग की टीम मृतक पत्रकार के घर पहुंची और परिजनों से मामले से संबंधित जानकारी जुटाने का प्रयास किया। प्रशासनिक जांच के साथ अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी प्रकरण की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।

पत्रकार की अचानक मौत के बाद सामने आया वीडियो

ग्राम पंचायत गढ़ी निवासी पत्रकार मोहम्मद सुलेमान का मंगलवार सुबह अचानक निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही स्थानीय पत्रकारों, परिचितों और क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो सामने आया, जिसे उनकी मौत से कुछ घंटे पहले का बताया जा रहा है।

वीडियो में सुलेमान अपना परिचय देते हुए अपनी बीमारी और इलाज के बारे में जानकारी देते दिखाई देते हैं। वह बताते हैं कि उनका उपचार लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चल रहा था। वीडियो में उन्होंने हृदय संबंधी बीमारी से परेशान होने और अपनी हालत गंभीर होने की बात कही थी।

वीडियो सामने आने के बाद उनके इलाज और आर्थिक सहायता से जुड़े मामले को लेकर कई सवाल उठने लगे। हालांकि वीडियो में कही गई बातों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही वजह है कि पूरे प्रकरण में प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता के लिए किया गया था प्रयास

मोहम्मद सुलेमान ने वायरल वीडियो में बताया था कि उनकी बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता थी। उनके अनुसार, मनकापुर क्षेत्र के विधायक रमापति शास्त्री की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष से उपचार के लिए सहायता दिलाने का प्रयास किया गया था।

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बताया गया कि इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया था। इसके बाद जिलाधिकारी स्तर से मनकापुर के उपजिलाधिकारी को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए थे। राहत कोष से सहायता मिलने के लिए पात्रता और संबंधित तथ्यों की जांच की प्रक्रिया के दौरान राजस्व विभाग की रिपोर्ट तैयार की गई थी।

सुलेमान ने इसी रिपोर्ट को लेकर वीडियो में अपनी आपत्ति जताई थी। अब जांच का एक प्रमुख बिंदु यही है कि आवेदन की जांच किस आधार पर की गई और पात्रता निर्धारित करते समय किन दस्तावेजों एवं तथ्यों को ध्यान में रखा गया।

आयुष्मान कार्ड को लेकर रिपोर्ट पर उठाए थे सवाल

वायरल वीडियो में मोहम्मद सुलेमान ने दावा किया था कि जांच के दौरान उन्हें आयुष्मान कार्ड धारक बताते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता के लिए अपात्र कर दिया गया। उन्होंने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अपनी बीमारी और प्रस्तावित उपचार की स्थिति का उल्लेख किया था।

सुलेमान के अनुसार, चिकित्सकों ने इलाज के दौरान आईसीडी पेसमेकर लगाए जाने की सलाह दी थी। उन्होंने वीडियो में इसके लिए लगभग चार से छह लाख रुपये तक का खर्च बताए जाने की बात कही थी। उनका कहना था कि जिस उपचार की आवश्यकता उन्हें बताई गई थी, वह आयुष्मान योजना के पैकेज में शामिल नहीं था।

उन्होंने वीडियो में 10 सितंबर 2026 को रिपोर्ट लगाए जाने का भी उल्लेख किया था। साथ ही उन्होंने अपनी स्थिति को गंभीर बताते हुए यह अपील की थी कि यदि उनकी मृत्यु हो जाती है तो मामले में जिम्मेदारी तय की जाए।

इन आरोपों की सत्यता और रिपोर्ट की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

लेखपाल की रिपोर्ट बनी जांच का अहम हिस्सा

इस पूरे मामले में राजस्व विभाग की रिपोर्ट अब जांच के केंद्र में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत गढ़ी के लेखपाल प्रवीण शुक्ला के अवकाश पर रहने के दौरान आरके मिश्रा ने चार्ज संभाला था। वायरल वीडियो और उपलब्ध विवरण में इस रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

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प्रशासन अब यह देख रहा है कि मुख्यमंत्री राहत कोष के आवेदन की जांच किस स्तर पर हुई, आवेदक की पात्रता किस आधार पर निर्धारित की गई और रिपोर्ट तैयार करते समय बीमारी तथा प्रस्तावित उपचार से संबंधित दस्तावेजों को किस प्रकार देखा गया।

महत्वपूर्ण यह भी है कि अभी तक जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए रिपोर्ट में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।

पत्रकार संगठन ने डीएम से की जांच की मांग

मोहम्मद सुलेमान की मौत और वायरल वीडियो सामने आने के बाद पत्रकारों में भी मामले को लेकर चिंता देखी गई। श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष कैलाश नाथ वर्मा के नेतृत्व में पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन से मिला।

प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के सामने पूरे प्रकरण को रखा और मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की। पत्रकारों का कहना था कि वायरल वीडियो में मृतक पत्रकार ने स्वयं अपनी बीमारी, इलाज और आर्थिक सहायता से जुड़े विषयों को उठाया था, इसलिए इसकी वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।

पत्रकारों की शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी, गोंडा को मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।

मृतक के घर पहुंची राजस्व विभाग की टीम

जिलाधिकारी के निर्देश के बाद तहसीलदार मनकापुर के आदेश पर राजस्व विभाग की टीम बुधवार को मोहम्मद सुलेमान के घर पहुंची। टीम में राजस्व निरीक्षक सुखराम वर्मा और क्षेत्रीय लेखपाल प्रवीण शुक्ला शामिल बताए गए हैं।

मौके पर टीम को मृतक पत्रकार के भाई मोहम्मद उस्मान और अन्य परिजन मिले। टीम ने मामले से संबंधित जानकारी लेने का प्रयास किया। बताया गया कि मोहम्मद सुलेमान की पत्नी सायरा बानो उस समय अपने इलाज के सिलसिले में लखनऊ गई हुई थीं। इस कारण टीम की उनसे मौके पर मुलाकात नहीं हो सकी।

अब माना जा रहा है कि जांच के दौरान मृतक की पत्नी और अन्य संबंधित परिजनों के बयान भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री राहत कोष के आवेदन, इलाज और आर्थिक स्थिति से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी उनके पास हो सकती है।

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स्वास्थ्य विभाग भी जुटाएगा इलाज से जुड़े तथ्य

मामले में केवल राजस्व रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि मोहम्मद सुलेमान की बीमारी और इलाज से जुड़े तथ्यों की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रकरण की पड़ताल करेगी।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह देखा जा सकता है कि पत्रकार किस बीमारी से पीड़ित थे, उनका उपचार कहां चल रहा था, डॉक्टरों ने किस प्रकार के उपचार की सलाह दी थी और इलाज पर अनुमानित खर्च कितना था। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जिस उपचार को लेकर राहत की आवश्यकता बताई गई थी, वह संबंधित स्वास्थ्य योजना के दायरे में आता था या नहीं।

मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता के लिए किए गए आवेदन और उससे संबंधित कागजात भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।

जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल मोहम्मद सुलेमान की मौत के बाद सामने आए वीडियो ने कई सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन इन सवालों का अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा। वायरल वीडियो में पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

प्रशासनिक जांच में आवेदन की प्रक्रिया, राजस्व रिपोर्ट, पात्रता निर्धारण और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। वहीं स्वास्थ्य विभाग इलाज और बीमारी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगा। दोनों स्तरों की जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता के मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।

मोहम्मद सुलेमान की मौत ने उनके परिवार और स्थानीय पत्रकार समुदाय को गहरा आघात पहुंचाया है। अब उनके द्वारा मृत्यु से पहले रिकॉर्ड किए गए वीडियो के बाद परिजनों और पत्रकारों की निगाह जांच के निष्कर्ष पर टिकी है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि राहत कोष के लिए की गई कार्रवाई में वास्तविक स्थिति क्या थी और पत्रकार को सहायता न मिल पाने के पीछे प्रशासनिक प्रक्रिया की क्या भूमिका रही।

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