सामाजिक न्याय मंत्रालय और दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के बीच दो वर्षीय समझौता, युवाओं को नशे से दूर रखने पर रहेगा विशेष फोकस
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
भारत में तेजी से बढ़ती नशे की समस्या के बीच नशा मुक्ति और जन-जागरूकता के प्रयासों को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) के ‘बोध–नशा उन्मूलन कार्यक्रम’ के बीच दो वर्ष के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य देशभर में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना, रोकथाम के उपायों को मजबूत करना तथा नशा मुक्ति कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी और जनसहभागी बनाना है।
यह समझौता नशा मुक्त भारत अभियान के तहत किया गया है, जिसे केंद्र सरकार देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में व्यापक स्तर पर संचालित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से नशे जैसी गंभीर सामाजिक चुनौती का अधिक प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।
नशा मुक्त भारत अभियान को मिलेगा सामाजिक सहयोग का विस्तार
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान लंबे समय से समाज में नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम संचालित करता रहा है। संस्थान का ‘बोध–नशा उन्मूलन कार्यक्रम’ विशेष रूप से युवाओं और समाज के अन्य वर्गों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यरत है।
डीजेजेएस गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के संयोजक स्वामी अर्जुनानंद जी ने बताया कि यह समझौता केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत और दूरगामी पहल है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी बस्तियों और विभिन्न सामाजिक समूहों तक पहुंचकर नशे के विरुद्ध व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
उनके अनुसार युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए केवल चेतावनी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सकारात्मक जीवन मूल्यों, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बोध कार्यक्रम समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करने का प्रयास करेगा।
समझौता समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारियों की रही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण अवसर पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बोध–नशा उन्मूलन कार्यक्रम की ग्लोबल कोऑर्डिनेटर साध्वी शिताभा भारती ने प्रतिनिधित्व किया। उनके साथ गौरव गुप्ता और गौरव सगर भी उपस्थित रहे।
वहीं भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से सचिव सुधांश पंत, आईएएस, निदेशक आस्तिक कुमार पांडेय, आईएएस तथा ड्रग प्रिवेंशन एंड प्लानिंग डिवीजन के संयुक्त सचिव डॉ. संदीप आर. राठौड़ की गरिमामयी उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
समारोह के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों से भी जुड़ी हुई है। इसलिए इसके समाधान के लिए बहुआयामी रणनीति और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
युवाओं को नशे से बचाने पर रहेगा विशेष जोर
देश के कई हिस्सों में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नशा व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक क्षमता को प्रभावित करने के साथ-साथ उसके भविष्य को भी संकट में डाल देता है।
समझौते के तहत चलाए जाने वाले कार्यक्रमों में युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराने, उन्हें जीवन कौशल विकसित करने तथा सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, संवाद सत्रों और सामुदायिक अभियानों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक संदेश पहुंचाया जाएगा।
नशा केवल व्यक्ति नहीं, पूरे परिवार को प्रभावित करता है
इस अवसर पर पूज्य श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य तथा अखंड भारत मिशन से जुड़े अश्वनी शर्मा ने कहा कि नशा एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती। इसका प्रभाव उसके परिवार, रिश्तों, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि नशे की लत के कारण परिवारों में तनाव, घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट और सामाजिक असुरक्षा जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसलिए नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से ही सफल हो सकती है।
अश्वनी शर्मा ने कहा कि सरकार, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही व्यापक जन-जागरूकता पैदा की जा सकती है। विशेष रूप से युवाओं को सही दिशा देने और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
जन-जागरूकता और पुनर्वास को मिलेगी नई दिशा
नशा मुक्ति के क्षेत्र में केवल रोकथाम ही नहीं, बल्कि पुनर्वास भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। कई लोग नशे की लत छोड़ना चाहते हैं, लेकिन उचित मार्गदर्शन और सहयोग के अभाव में सफल नहीं हो पाते। ऐसे में सामाजिक संगठनों और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय नशा छोड़ने वाले लोगों के लिए नई उम्मीद बन सकता है।
इस समझौते के माध्यम से जागरूकता अभियानों के साथ-साथ परामर्श, मार्गदर्शन और पुनर्वास से जुड़े प्रयासों को भी गति मिलने की उम्मीद है। इससे समाज में नशा मुक्ति के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी और अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकेंगे।
स्वस्थ और सशक्त भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि नशा मुक्त भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें सक्रिय भूमिका निभाए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के बीच हुआ यह समझौता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
सरकारी तंत्र और सामाजिक संगठनों की संयुक्त भागीदारी से न केवल नशे के खिलाफ जन-जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रक्रिया भी मजबूत होगी। आने वाले दो वर्षों में इस साझेदारी से लाखों लोगों तक नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाने और एक स्वस्थ, जागरूक तथा सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

























