ब्यूरो रिपोर्ट
चाईबासा, झारखंड। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की चाईबासा शाखा का शाखा सम्मेलन डीपीएस पब्लिक स्कूल के भव्य सभागार में उत्साहपूर्ण और रचनात्मक माहौल में आयोजित किया गया। सम्मेलन में रंगकर्म को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने, संगठन को अधिक मजबूत बनाने तथा समाज में कला और संस्कृति की भूमिका को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे इप्टा के प्रतिनिधियों, रंगकर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन का शुभारंभ इप्टा चाईबासा शाखा के संस्थापक तरुण मुहम्मद द्वारा झंडोत्तोलन के साथ हुआ। इसके बाद परवेज आलम और उनके साथियों ने जनगीत ‘शांति के लिए उठे कदम’ प्रस्तुत किया। जनगीत की प्रभावशाली प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद लोगों के बीच ऊर्जा और उत्साह का संचार कर दिया। गीत के माध्यम से सामाजिक बदलाव, शांति और जन सरोकारों से जुड़े रंग आंदोलन को आगे बढ़ाने का संदेश भी उभरा।
इप्टा को मजबूत बनाने पर हुआ मंथन
शाखा सम्मेलन में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और इप्टा की गतिविधियों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से डाल्टनगंज तथा जमशेदपुर से भी प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से भाग लिया। डाल्टनगंज से प्रेम प्रकाश और रवि शर्मा तथा जमशेदपुर से अहमद बद्र सम्मेलन में शामिल हुए।
कार्यक्रम का संचालन शीतल सुगन्धिनी बागे ने प्रभावी ढंग से किया। अतिथियों का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मान किया गया। इस दौरान इप्टा की अब तक की गतिविधियों, संगठन के विस्तार और भविष्य की योजनाओं को लेकर भी चर्चा हुई।
शाखा सचिव संजय कुमार चौधरी ने सचिव का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए चाईबासा इप्टा की विभिन्न गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इप्टा लगातार सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास कर रही है।
इप्टा केवल रंगकर्मियों का संगठन नहीं : अहमद बद्र
सम्मेलन में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल डाल्टनगंज के प्रेम प्रकाश ने संगठन की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने शाखा की गतिविधियों में निरंतरता बनाए रखने और संगठनात्मक स्तर पर आपसी समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जमशेदपुर से पहुंचे अहमद बद्र ने इप्टा की भूमिका को व्यापक सामाजिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि इप्टा केवल रंगकर्मियों का संगठन नहीं है, बल्कि यह एक परिवार की तरह है। उन्होंने कहा कि इस परिवार को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और इसका विस्तार करने की आवश्यकता है, ताकि रंगकर्म के साथ सामाजिक चेतना का संदेश भी व्यापक समाज तक पहुंच सके।
डाल्टनगंज इप्टा के साथी रवि शर्मा ने कहा कि संगठन को आगे बढ़ाने के लिए अन्य समाजसेवी संस्थाओं को भी साथ लेकर चलना जरूरी है। उनके मुताबिक विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ सहयोग से जनहित के मुद्दों पर अधिक प्रभावी ढंग से काम किया जा सकता है।
संस्थापक तरुण मुहम्मद ने साझा की इप्टा की पुरानी पहल
इप्टा चाईबासा के संस्थापक तरुण मुहम्मद ने अपने संबोधन में संगठन के पुराने सामाजिक अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इप्टा ने समय-समय पर दूसरी समाजसेवी संस्थाओं को भी अपने साथ जोड़कर सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
उन्होंने वर्ष 1999 में ओडिशा में आई बाढ़ का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय चाईबासा शहर की करीब 30 समाजसेवी संस्थाओं को एकजुट कर बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए अभियान चलाया गया था। इस अभियान के माध्यम से बड़ी मात्रा में धनराशि, कपड़े और अन्य आवश्यक सामग्री एकत्र कर पीड़ित लोगों तक मदद पहुंचाने का प्रयास किया गया।
तरुण मुहम्मद ने कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने आसपास होने वाले अन्याय और जुल्म को देखकर भी चुप रहता है, उसे कलाकार नहीं कहा जा सकता। उनके इस विचार ने सम्मेलन में मौजूद रंगकर्मियों और कला प्रेमियों को सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति गंभीरता से सोचने का संदेश दिया।
इप्टा की गतिविधियों से जुड़ना गौरव की बात : संजीव मलिक
सम्मेलन में इप्टा के संरक्षक संजीव मलिक ने कहा कि इप्टा की गतिविधियों में शामिल होकर उन्हें गौरव की अनुभूति होती है। उन्होंने संगठन की सांस्कृतिक और सामाजिक भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए इसके साथ निरंतर जुड़े रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
वहीं संरक्षक राजीव नयनम ने चाईबासा में इप्टा की स्थापना के शुरुआती दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि जब तरुण मुहम्मद ने चाईबासा में इप्टा शाखा की स्थापना की थी, तब वे नियमित रूप से इसकी गतिविधियों में हिस्सा लेते रहे हैं। उन्होंने संगठन के साथ अपने लंबे जुड़ाव को भी साझा किया।
इप्टा चाईबासा शाखा के अध्यक्ष कैसर परवेज ने सभी सहयोगियों का आभार जताते हुए कहा कि सामूहिक सहयोग और सहभागिता की बदौलत संगठन आज इस मुकाम तक पहुंचा है। उन्होंने भविष्य में भी सभी साथियों के सहयोग से इप्टा की गतिविधियों को और विस्तार देने की बात कही।
नई कार्यकारिणी और संरक्षक मंडल का गठन
शाखा सम्मेलन के दौरान नई कार्यकारिणी और संरक्षक मंडल का गठन किया गया। मंच पर नवनिर्वाचित संरक्षकों, शाखा पदाधिकारियों और कार्यकारिणी मंडल के सदस्यों का माला पहनाकर स्वागत किया गया।
नवनिर्वाचित संरक्षक मंडल में अजय मित्रा, नितिन प्रकाश, राजीव नयनम, संजीव मलिक, ताराचंद शर्मा, राज किशोर साहू और परवेज आलम को शामिल किया गया।
नई कार्यकारिणी मंडल में कैसर परवेज को अध्यक्ष, शीतल बागे और श्यामल दास को उपाध्यक्ष, संजय कुमार चौधरी को सचिव, चमरू कारवा और खुशबू राम को सह सचिव, शिव शंकर राम को कोषाध्यक्ष तथा राजू प्रजापति को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया।
कार्यकारिणी सदस्य के रूप में आनंद शर्मा, पल्लव कुमार डे, गिरीश दोदराजका, पप्पू मछुआ, नरेश राम, सुशीला पूर्ति और नवीन सिंह को जिम्मेदारी दी गई।
‘दिल की आवाज’ ने दर्शकों को किया भावुक
सम्मेलन के अंतिम चरण में इप्टा के रंगकर्मी और प्रसिद्ध स्टोरी टेलर दिनकर शर्मा ने ‘दिल की आवाज’ शीर्षक से एकल अभिनय प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद दर्शकों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया।
एकल अभिनय के माध्यम से सामाजिक संवेदनाओं और मानवीय भावनाओं को जिस प्रभावशाली तरीके से सामने रखा गया, उससे दर्शक काफी प्रभावित हुए। प्रस्तुति के दौरान सभागार में मौजूद लोगों की एकाग्रता और प्रतिक्रिया ने कार्यक्रम की सफलता को स्पष्ट किया।
इप्टा चाईबासा शाखा का यह सम्मेलन संगठनात्मक पुनर्गठन के साथ-साथ रंगकर्म की सामाजिक भूमिका को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन साबित हुआ। सम्मेलन में व्यक्त विचारों से यह संकेत मिला कि इप्टा आने वाले समय में कला, संस्कृति, सामाजिक चेतना और जन सरोकारों को साथ लेकर अपनी गतिविधियों को और व्यापक बनाने की दिशा में काम करेगी।

























