17 अक्टूबर 2026 9:59 अपराह्न

25 वर्षों का अनुभव, शिक्षा का संकल्प : G.M. Academy Barhaj में अभिभावकों का भरोसा

G.M. Academy Barhaj में Parents-Teachers Meeting के दौरान अभिभावक, शिक्षक और विद्यार्थियों की सहभागिता

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इरफान अली लारी की प्रस्तुति
आलेख : जनगणदूत संपादकीय टीम

बरहज, देवरिया | किसी विद्यालय की असली उपलब्धि उसके भवन की ऊंचाई या परीक्षा परिणामों के आंकड़ों में नहीं, बल्कि इस बात में छिपी होती है कि वहां पढ़ने वाला विद्यार्थी कितना बेहतर इंसान बन रहा है। जब अभिभावक अपने बच्चों के व्यवहार, अनुशासन और शिक्षा को लेकर संतोष व्यक्त करने लगें, तो वह किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए सबसे बड़ा प्रमाणपत्र होता है।

G.M. Academy, Barhaj में शनिवार को आयोजित Parents-Teachers Meeting ने इसी भरोसे की तस्वीर पेश की। बड़ी संख्या में अभिभावक विद्यालय पहुंचे और उन्होंने अपने बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, अनुशासन, व्यवहार तथा सर्वांगीण विकास को लेकर शिक्षकों से संवाद किया। बैठक के दौरान अभिभावकों की प्रतिक्रियाओं में विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रति संतोष और विश्वास स्पष्ट दिखाई दिया।

लेकिन इस आयोजन को केवल एक नियमित अभिभावक-शिक्षक बैठक मान लेना शायद इसकी पूरी तस्वीर को समझना नहीं होगा। इसके पीछे एक ऐसी शैक्षिक सोच भी दिखाई देती है, जो वर्षों के अनुभव, अनुशासन और निरंतर सीखने की प्रक्रिया से तैयार हुई है।

सलेमपुर से गोरखपुर और अब बरहज तक—एक विरासत का निरंतर विस्तार

G.M. Academy का स्थापना काल से अब तक का सफर शिक्षा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय यात्रा के रूप में देखा जा सकता है। जिस उद्देश्य और दृष्टि के साथ स्वर्गीय संस्थापक ने इस शैक्षिक संस्था की नींव रखी, उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वर्तमान चेयरमैन और निदेशिका ने अनुशासन, ईमानदारी और निरंतर प्रगति की सोच के साथ निभाई।

एक संस्था की विरासत को संभालना केवल उसके संचालन तक सीमित नहीं होता। असली चुनौती यह होती है कि बदलते समय, बदलती शैक्षिक जरूरतों और अभिभावकों की बढ़ती अपेक्षाओं के बीच मूल संस्कारों और उद्देश्य को कायम रखा जाए। G.M. Academy की यात्रा में यही निरंतरता दिखाई देती है।

सलेमपुर और गोरखपुर से शुरू हुआ यह शैक्षिक विस्तार आज बरहज में भी अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाता दिखाई दे रहा है। यहां शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण पर जोर देने की कोशिश संस्था की मूल भावना से जुड़ी हुई नजर आती है।

बरहज शाखा में 25 वर्षों के अनुभव की छाप

बरहज शाखा के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश कुमार मिश्रा के लिए शिक्षा कोई नया क्षेत्र नहीं है। उन्होंने जनगणदूत से अपनी बातचीत में बताया कि पिछले 25 वर्षों से वे शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहे हैं और उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, संस्कारों तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को समर्पित रहा है।

उन्होंने बताया कि उनकी शैक्षिक यात्रा की शुरुआत जनपद मऊ में एक प्राइवेट शिक्षक के रूप में हुई थी। उस समय से लेकर आज तक सीखने, सिखाने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास निरंतर जारी है।

आज G.M. Academy, Barhaj में प्रधानाचार्य के रूप में अपनी सेवाएं देने को वे महज एक पद या कार्यस्थल के रूप में नहीं देखते। उनके लिए यह शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े उद्देश्य के साथ सार्थक योगदान देने का अवसर है।

उनकी यह सोच शनिवार को आयोजित Parents-Teachers Meeting के दौरान भी दिखाई दी, जहां अभिभावकों और शिक्षकों के बीच केवल विद्यार्थियों के अंकों की चर्चा नहीं हुई, बल्कि उनके व्यवहार, अनुशासन और सर्वांगीण विकास को लेकर भी संवाद हुआ।

प्रधानाचार्य बोले—विद्यालय व्यक्तित्व निर्माण की कार्यशाला है

डॉ. राजेश कुमार मिश्रा ने जनगणदूत से बातचीत में कहा कि उनके विचार में विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान देने का स्थान नहीं है। उनके अनुसार विद्यालय ऐसी “व्यक्तित्व निर्माण की कार्यशाला” होना चाहिए, जहां विद्यार्थी ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को भी अपने जीवन में उतारें।

उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ उनका प्रयास है कि G.M. Academy, Barhaj में ऐसा शैक्षिक वातावरण विकसित हो, जहां हर विद्यार्थी अपनी क्षमता को पहचान सके और हर शिक्षक अपने दायित्व को केवल नौकरी के रूप में नहीं, बल्कि एक उद्देश्य के साथ निभाए।

उनका मानना है कि विद्यालय की भूमिका केवल अच्छे अंक दिलाने तक समाप्त नहीं हो जाती। शिक्षा का अंतिम उद्देश्य ऐसे नागरिक तैयार करना है, जो ज्ञानवान होने के साथ संस्कारित, जिम्मेदार और समाज के प्रति संवेदनशील भी हों।

“बड़ी सोच आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बेहतर बनाने का संकल्प है”

अपनी शैक्षिक सोच को व्यक्त करते हुए डॉ. राजेश कुमार मिश्रा ने जनगणदूत से कहा—

“बड़ी सोच केवल बड़े सपने देखने तक सीमित नहीं होती; बड़ी सोच वह है जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बेहतर बनाने का संकल्प ले।”

प्रधानाचार्य की यह बात उनकी 25 वर्षों की शैक्षिक यात्रा के अनुभव और वर्तमान जिम्मेदारी के बीच एक स्पष्ट कड़ी स्थापित करती है।

एक शिक्षक के रूप में शुरू हुई यात्रा और आज प्रधानाचार्य के दायित्व तक पहुंचा अनुभव अब विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उपयोग हो रहा है। यही कारण है कि विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था में अभिभावकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Academic Director ने भी रखा शिक्षा का व्यापक उद्देश्य

कार्यक्रम में विद्यालय के Academic Director श्री हरि प्रकाश मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करवाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार, अनुशासित, आत्मविश्वासी और संस्कारवान नागरिक बनाना है।

उन्होंने अभिभावकों से विद्यालय के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने की अपील की, ताकि बच्चों की शिक्षा और व्यक्तित्व विकास में विद्यालय तथा परिवार दोनों की भूमिका प्रभावी ढंग से सुनिश्चित हो सके।

अभिभावक-शिक्षक संवाद बना बैठक की सबसे बड़ी ताकत

बैठक के दौरान अभिभावकों ने अपने बच्चों की प्रगति को लेकर शिक्षकों से विस्तार से बातचीत की। शिक्षकों ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ उन क्षेत्रों की भी जानकारी दी, जहां और अधिक प्रयास की आवश्यकता है।

अभिभावकों ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। शिक्षकों ने उनकी जिज्ञासाओं और सुझावों का समाधान भी किया।

दरअसल, यही संवाद किसी विद्यालय की कार्यशैली को मजबूत बनाता है। शिक्षक बच्चे की कक्षा में मौजूद क्षमता को पहचानता है और अभिभावक घर के वातावरण में उसके व्यवहार और रुचियों को देखते हैं। दोनों अनुभव जब एक साथ आते हैं, तो विद्यार्थी के विकास की तस्वीर अधिक स्पष्ट होती है।

विरासत, अनुभव और वर्तमान नेतृत्व—तीनों का संगम

G.M. Academy की कहानी को यदि एक वाक्य में समझना हो तो इसे विरासत से मिले संस्कार, वर्तमान नेतृत्व की दृढ़ता और अनुभवी शिक्षकों की प्रतिबद्धता का संगम कहा जा सकता है।

स्वर्गीय संस्थापक की सोच से शुरू हुई यात्रा को वर्तमान चेयरमैन और निदेशिका ने जिस अनुशासन और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाया, उसी क्रम में अलग-अलग शाखाएं अपनी भूमिका निभा रही हैं।

बरहज शाखा में डॉ. राजेश कुमार मिश्रा का 25 वर्षों का शैक्षिक अनुभव इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता दिखाई दे रहा है।

पैरेंट्स मीटिंग से निकला बड़ा संदेश

शनिवार की Parents-Teachers Meeting का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि शिक्षा तब प्रभावी होती है, जब विद्यालय और परिवार एक-दूसरे के सहयोगी बनें।

G.M. Academy Barhaj में अभिभावकों की उपस्थिति, शिक्षकों के साथ उनका संवाद और विद्यालय की व्यवस्था के प्रति उनकी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं इस साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत हैं।

एक तरफ संस्था की वर्षों पुरानी शैक्षिक विरासत है, दूसरी तरफ उसे आगे ले जाने का वर्तमान नेतृत्व और तीसरी तरफ 25 वर्षों का अनुभव लेकर विद्यार्थियों के बीच काम कर रहा प्रधानाचार्य। इन तीनों का मेल बरहज शाखा को एक ऐसी दिशा देने की कोशिश करता दिखाई देता है, जहां शिक्षा का लक्ष्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार होना है।

शनिवार की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही कि यहां विद्यालय ने अपने काम का मूल्यांकन स्वयं नहीं किया—अभिभावकों की बातचीत और आत्मोक्ति ने उसकी तस्वीर सामने रख दी।

और शायद किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए इससे बड़ा माइलस्टोन यही है कि उसके प्रयासों की गवाही उसके विद्यार्थी और उनके अभिभावक स्वयं देने लगें।

G.M. Academy Barhaj की यह यात्रा अभी जारी है—लेकिन 25 वर्षों के अनुभव, संस्थापक की विरासत और वर्तमान नेतृत्व की प्रतिबद्धता के साथ यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देने की दिशा में एक सार्थक कदम जरूर बनती दिखाई दे रही है।

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