सूरज सिंह राणा की ग्राउंड रिपोर्ट
चित्रकूट/मानिकपुर, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद चित्रकूट और आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा गंभीर हो गया है। रामघाट से लेकर कर्वी और ग्रामीण क्षेत्रों तक पानी का असर दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हैं, घाटों और दुकानों में पानी घुस चुका है तथा निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
इसी बीच मानिकपुर क्षेत्र के टिकरिया-डोडा माफी इलाके में स्थित बांध को लेकर ग्रामीणों में भारी दहशत है। ग्रामीणों का दावा है कि बांध के दो गेटों में से एक गेट जाम है और दूसरा ही काम कर रहा है। पानी बांध की पार के ऊपर से बहने तथा गेट के आसपास रिसाव और कटान की स्थिति बनने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं हुई तो बांध पर दबाव और बढ़ सकता है।
हालांकि बांध के संभावित टूटने और मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर किए जा रहे विभिन्न दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इस रिपोर्ट में ग्रामीणों और स्थानीय स्तर से सामने आई सूचनाओं को उनके दावों के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
मंदाकिनी ने 23 साल पुराना जलस्तर रिकॉर्ड पार किया
चित्रकूट में इस समय सबसे बड़ी चिंता मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नदी का जलस्तर वर्ष 2003 में दर्ज किए गए करीब 134 सेंटीमीटर के पुराने रिकॉर्ड के आसपास पहुंच गया था। इस बार जलस्तर 134.02 सेंटीमीटर तक पहुंचने की सूचना है, जिसे पिछले 23 वर्षों के रिकॉर्ड से जोड़कर देखा जा रहा है।
नदी में लगातार बढ़ते पानी ने रामघाट और आसपास के निचले इलाकों की तस्वीर बदल दी है। सामान्य दिनों में जहां श्रद्धालु, दुकानदार और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं, वहीं अब कई हिस्सों में पानी ही पानी नजर आ रहा है। घाट की कई दुकानें पानी में डूब गई हैं। कुछ मठों और मंदिर परिसरों में भी पानी पहुंचने की खबर है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लोगों से नदी और घाटों के आसपास जाने से बचने की अपील की जा रही है। तेज बहाव के कारण ऐसे स्थानों पर खतरा और बढ़ गया है जहां सामान्य परिस्थितियों में लोगों की आवाजाही रहती है।
रामघाट में बाढ़ जैसे हालात, छतों पर पहुंचे लोग
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने के बाद रामघाट में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बताए जा रहे हैं। पानी बढ़ने से सैकड़ों दुकानों के प्रभावित होने की सूचना है। कई परिवारों ने पानी से बचने के लिए घरों की छतों का सहारा लिया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक पानी की रफ्तार इतनी तेज है कि निचले हिस्सों में रहना जोखिम भरा हो गया है। प्रशासन और बचाव दल प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
चित्रकूट से सतना की ओर जाने वाले मार्ग के कई हिस्सों में भी जलभराव की स्थिति बताई जा रही है। कुछ इलाकों में सड़कें इतनी पानी में डूब गई हैं कि सामान्य वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर नावों के जरिए लोगों तक पहुंचने और उन्हें निकालने की कोशिश की जा रही है।
हनुमानधारा मार्ग का पुल भी तेज बहाव की चपेट में
बाढ़ के बढ़ते असर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हनुमानधारा जाने वाले रास्ते पर बना पुल भी तेज पानी के बहाव की चपेट में आने की सूचना है। इससे आवागमन प्रभावित हुआ है।
ऐसे समय में सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों तक राहत पहुंचाना है जहां पानी तेजी से बढ़ रहा है। सड़क संपर्क टूटने या बाधित होने की स्थिति में प्रशासन को नावों और अन्य बचाव संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
डोडा माफी बांध पर बढ़ा दबाव, ग्रामीणों में भय
मानिकपुर क्षेत्र के डोडा माफी गांव में बांध को लेकर स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात करीब दो बजे से लगातार बारिश होने के कारण बांध में पानी तेजी से बढ़ने का दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक बांध के दो गेटों में से एक लंबे समय से खराब या जाम है। उनका आरोप है कि हाल में केवल एक गेट की मरम्मत कराई गई, जबकि दूसरे गेट की समस्या दूर नहीं की गई। ऐसे में भारी बारिश के बाद बांध पर पानी का दबाव बढ़ गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी बांध की पार के ऊपर से बह रहा है और कुछ हिस्सों में कटान दिखाई दे रहा है। इसके अलावा गेट के बगल में बने एक छेद से पानी के रिसाव की बात भी ग्रामीणों ने कही है।
यदि ये परिस्थितियां मौके पर वास्तव में मौजूद हैं तो लगातार बढ़ता जलस्तर बांध की संरचना के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। ऐसी स्थिति में जल निकासी, बांध की तकनीकी जांच और मौके पर विशेषज्ञों की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
पांच गांवों में खाली कराए गए घर, सामान और पशु लेकर निकले लोग
डोडा माफी बांध से जुड़े खतरे की आशंका के बीच आसपास के पांच गांवों में लोगों के घर छोड़ने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर बताया गया है कि मुझलोलवा, अहिरान, चौकी पुरवा, खास गांव डोडा माफी और लल्लू का पुरवा से बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं।
कई परिवारों के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर जान बचाने का सवाल है तो दूसरी ओर घर में रखा अनाज, घरेलू सामान और पशुधन छोड़ना भी आसान नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक लोग ट्रैक्टरों और अन्य साधनों से जरूरी सामान निकाल रहे हैं।
महिलाएं और बच्चे बारिश के बीच सुरक्षित जगहों की तलाश में हैं। लगातार खराब मौसम के कारण खुले स्थानों पर रहना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि राहत शिविरों या सुरक्षित ठिकानों पर पर्याप्त व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने पहले चेतावनी देने का किया दावा
डोडा माफी क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने करीब 15 दिन पहले ही बांध के दोनों गेट खराब होने की जानकारी संबंधित विभाग तक पहुंचाई थी। ग्रामीणों का कहना है कि एक गेट की मरम्मत तो कराई गई, लेकिन दूसरे गेट की समस्या बनी रही।
ग्रामीणों के मुताबिक यदि दोनों गेट समय रहते दुरुस्त कर दिए जाते तो भारी बारिश के दौरान पानी की निकासी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती थी।
एक ग्रामीण ने कहा कि उन्होंने पहले ही अधिकारियों को संभावित खतरे की जानकारी दी थी, लेकिन समय रहते अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि यदि बांध पर दबाव बढ़ने की आशंका पहले से थी तो उसकी तकनीकी जांच और निगरानी को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
इन आरोपों पर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बांध की मरम्मत कब हुई, दोनों गेटों की वास्तविक स्थिति क्या है और विभाग की ओर से अब तक कौन-कौन से सुरक्षा कदम उठाए गए हैं।
प्रशासन और बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती
चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। तरौंहा, गोबरिया, बहादुर सहित कई गांवों में पानी पहुंचने की सूचना है। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों के फंसे होने के बाद प्रशासन और बचाव दलों द्वारा उन्हें सुरक्षित निकालने की कार्रवाई की गई है।
स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश प्रशासन दोनों स्तर पर निगरानी बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही नियंत्रित की जा रही है। घाटों और तेज बहाव वाले स्थानों पर लोगों को जाने से रोकने के लिए लगातार अपील की जा रही है।
प्रशासन की प्राथमिकता इस समय लोगों की जान बचाना है। जिन क्षेत्रों में पानी तेजी से बढ़ रहा है, वहां पहले से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
NDRF-SDRF और PAC की टीमें मैदान में
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूत किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चार NDRF, चार SDRF और दो PAC टीमों को तैनात किया गया है। इसके अलावा अतिरिक्त टीमों को भी बुलाए जाने की सूचना है, ताकि आवश्यकता के अनुसार उन्हें अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में लगाया जा सके।
जहां सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं है, वहां नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के प्रभावित हिस्सों में कुछ स्थानों पर हेलीकॉप्टर के जरिए भी लोगों को निकालने की सूचना है।
बाढ़ जैसी आपदा में केवल रेस्क्यू ही पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षित निकाले गए परिवारों के लिए भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, अस्थायी आवास और पशुओं के लिए व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होती है। प्रशासन के सामने आने वाले अगले कुछ घंटे इस लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
मंदाकिनी पुल पर पानी, NH-35 पर यातायात प्रभावित
कर्वी शहर में मंदाकिनी नदी पर बने पुल के ऊपर से पानी बहने की सूचना के बाद झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग-35 पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगने से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई।
ऐसे समय में यातायात रोकना जरूरी सुरक्षा उपाय हो सकता है, क्योंकि तेज बहाव के बीच पुल पार करना जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को वैकल्पिक मार्गों और सुरक्षित स्थानों के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा।
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार प्रशासन ने रात से ही लोगों को बाढ़ को लेकर अलर्ट करना शुरू कर दिया था। जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सवाल सिर्फ बाढ़ का नहीं, तैयारी का भी है
चित्रकूट की मौजूदा स्थिति ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या इतनी तेज बारिश और अचानक बढ़ते जलस्तर के लिए स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारी पर्याप्त थी?
बांध जैसे संवेदनशील जलस्रोतों में गेटों की नियमित जांच, जल निकासी व्यवस्था, कमजोर हिस्सों की पहचान और समय रहते मरम्मत किसी भी बड़ी आपदा को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। यदि ग्रामीणों द्वारा पहले से गेट खराब होने की सूचना देने का दावा सही पाया जाता है तो इसकी जांच जरूरी है।
इसी तरह नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ की चेतावनी और निकासी योजना भी पहले से स्पष्ट होनी चाहिए। कौन सा गांव किस ऊंचे स्थान पर जाएगा, किस रास्ते से लोगों को निकाला जाएगा, नाव और बचाव दल कहां तैनात होंगे और पशुओं को कैसे सुरक्षित किया जाएगा—इन सभी सवालों के जवाब आपदा से पहले तैयार रहने चाहिए।
अगले कुछ घंटे बेहद अहम
चित्रकूट में बारिश का दौर जारी रहने की स्थिति में मंदाकिनी नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में नदी किनारे तथा बांध के निचले हिस्सों में बसे गांवों के लिए खतरा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
डोडा माफी बांध को लेकर ग्रामीणों की चिंता को देखते हुए मौके पर तकनीकी विशेषज्ञों और सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी महत्वपूर्ण है। बांध की संरचनात्मक स्थिति, गेटों की कार्यक्षमता, पानी के दबाव और कटान की वास्तविक स्थिति का तत्काल तकनीकी आकलन ही यह स्पष्ट कर सकता है कि खतरा कितना गंभीर है।
फिलहाल चित्रकूट में सबसे जरूरी संदेश यही है कि लोग अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें। नदी, पुल, बांध और तेज बहाव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखें। परिवार के बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं।
चित्रकूट में प्रकृति ने इस समय बड़ी परीक्षा खड़ी कर दी है। मंदाकिनी का बढ़ता जलस्तर, जलमग्न होते गांव, बाधित सड़कें और डोडा माफी बांध को लेकर ग्रामीणों की चिंता—ये सभी संकेत बताते हैं कि राहत और बचाव व्यवस्था को अगले कुछ घंटों तक पूरी तरह सक्रिय रखना होगा।
ग्राउंड रिपोर्ट: सूरज सिंह राणा

























