ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
औरैया| एक अज्ञात शव की गलत पहचान के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिए जाने और कुछ दिनों बाद कथित मृतक के जीवित घर लौट आने का हैरतअंगेज मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। पूरे घटनाक्रम ने न केवल पुलिस की शिनाख्त प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उस अज्ञात व्यक्ति की वास्तविक पहचान को लेकर भी नई चुनौती पैदा कर दी है, जिसका अंतिम संस्कार किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर कर दिया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद तीन नामजद लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है। साथ ही उस अज्ञात शव की असली पहचान स्थापित करने के लिए कई जनपदों की गुमशुदगी रिपोर्टों का मिलान किया जा रहा है।
अज्ञात शव मिलने के बाद शुरू हुई पहचान की प्रक्रिया
पुलिस के अनुसार 18 जुलाई को कानपुर-इटावा हाईवे पर भीखेपुर गांव के निकट पूर्व विधायक मदन सिंह गौतम के जर्जर होटल के पास एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। शव कई दिन पुराना होने तथा चेहरा क्षतिग्रस्त होने के कारण उसकी पहचान संभव नहीं हो पा रही थी। अज्ञात शव बरामद हुआ था। शव काफी सड़-गल चुका था और उसका चेहरा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण पहचान करना संभव नहीं हो पा रहा था। नियमानुसार पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और उसकी शिनाख्त कराने की प्रक्रिया शुरू की।
इसी दौरान तीन लोग थाने पहुंचे और लिखित प्रार्थना पत्र देकर दावा किया कि बरामद शव कमल सिंह उर्फ छुन्ना पुत्र सोनेलाल का है। परिजनों की ओर से पहचान की पुष्टि किए जाने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव पोस्टमार्टम के बाद उन्हें सौंप दिया। इसके बाद पूरे धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
तीसरे दिन जीवित लौट आया कथित मृतक
घटना ने उस समय अप्रत्याशित मोड़ ले लिया, जब अंतिम संस्कार के तीसरे दिन वही व्यक्ति जीवित अपने घर पहुंच गया, जिसे मृत मानकर अंतिम संस्कार किया जा चुका था। उसे सामने देखकर परिजन, ग्रामीण और पुलिसकर्मी सभी स्तब्ध रह गए।
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किस व्यक्ति का था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल दोबारा जांच शुरू की और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुट गई।
डेढ़ वर्ष पहले घर छोड़कर चला गया था व्यक्ति
जांच के दौरान कथित मृतक की पत्नी सुनीता ने पुलिस को बताया कि पारिवारिक विवाद के कारण उसका पति लगभग डेढ़ वर्ष पहले घर छोड़कर चला गया था। इसके बाद वह पानीपत, ग्वालियर सहित विभिन्न शहरों में मजदूरी करता रहा। लंबे समय तक दोनों के बीच कोई संपर्क नहीं रहा।
बाद में परिवार की ओर से जानकारी मिलने पर वह सीधे अपने गांव लौट आया। उसके घर पहुंचते ही यह स्पष्ट हो गया कि जिस व्यक्ति को मृत मानकर अंतिम संस्कार किया गया था, वह वास्तव में जीवित है।
भ्रामक पहचान कराने के आरोप में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस की विवेचना में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया कि अज्ञात शव की पहचान गलत और भ्रामक तरीके से कराई गई थी। पुलिस का आरोप है कि गलत पहचान प्रस्तुत किए जाने से न केवल पूरी विधिक प्रक्रिया प्रभावित हुई, बल्कि उस अज्ञात मृतक के वास्तविक परिजनों तक पहुंचने की संभावना भी बाधित हुई।
इसी आधार पर उपनिरीक्षक अभय प्रताप की तहरीर पर सोनेलाल, वृजभान सिंह और राजेश कुमार के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि गलत पहचान जानबूझकर कराई गई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
असली मृतक की पहचान तलाशने में जुटी पुलिस
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अब उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान स्थापित करना है, जिसका अंतिम संस्कार किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर कर दिया गया। इसके लिए पुलिस आसपास के जिलों के अलावा इटावा, जालौन, कानपुर देहात सहित अन्य जनपदों की पुलिस से संपर्क बनाए हुए है। विभिन्न थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों का भी मिलान किया जा रहा है, ताकि मृतक की पहचान कर उसके वास्तविक परिजनों तक पहुंचा जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध सभी साक्ष्यों और अभिलेखों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य तकनीकी और फोरेंसिक माध्यमों का भी सहारा लिया जाएगा।
जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
पुलिस क्षेत्राधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में गलत पहचान कराए जाने की बात सामने आई है, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन विवेचना जारी है। जांच के दौरान जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित है। एक ओर गलत पहचान कराने वालों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उस अज्ञात मृतक की वास्तविक पहचान स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
चर्चा का विषय बना पूरा घटनाक्रम
मृत घोषित किए जाने के बाद किसी व्यक्ति का कुछ दिनों बाद जीवित घर लौट आना अत्यंत दुर्लभ घटनाओं में गिना जाता है। यही कारण है कि यह मामला क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं, क्योंकि विवेचना पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गलत पहचान किन परिस्थितियों में हुई और जिस अज्ञात व्यक्ति का अंतिम संस्कार कर दिया गया, उसकी वास्तविक पहचान क्या थी।

























