पेपर लीक पर धनंजय सिंह का बड़ा बयान : प्रधान के इस्तीफे से नहीं रुकेगा मामला, स्थायी व्यवस्था और सख्त कानून ही समाधान
रिपोर्ट: दुर्गा प्रसाद शुक्ला
GONDA | देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों के बीच पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों की भावनाओं का सम्मान अवश्य है, लेकिन इससे पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार को मजबूत परीक्षा व्यवस्था, सख्त कानून और जवाबदेह तंत्र विकसित करना होगा, ताकि भविष्य में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
शनिवार देर शाम गोंडा पहुंचे धनंजय सिंह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में समय-समय पर पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों छात्रों को उठाना पड़ता है, जो वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवा सीमित संसाधनों के बावजूद अपने भविष्य को संवारने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक की घटनाएं उनकी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर देती हैं।
छात्रों की मांग का सम्मान, लेकिन समाधान अभी बाकी
धनंजय सिंह ने कहा कि छात्रों ने लंबे समय तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई। जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर हुए आंदोलनों के माध्यम से युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। सरकार ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए केंद्रीय शिक्षामंत्री का इस्तीफा स्वीकार किया, जो एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था में मूलभूत सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी और हर बार केवल जिम्मेदारी तय करने से समस्या का स्थायी हल नहीं निकलेगा।
सिर्फ इस्तीफा नहीं, व्यवस्था में सुधार की जरूरत
पूर्व सांसद ने कहा कि पेपर लीक की समस्या किसी एक व्यक्ति या एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी परीक्षा प्रणाली से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार को ऐसी मजबूत और तकनीकी रूप से सुरक्षित व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें प्रश्नपत्र की गोपनीयता हर स्तर पर सुनिश्चित हो और किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश न रहे।
उन्होंने कहा कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अलग-अलग एजेंसियों के बजाय हो एक विश्वसनीय प्रणाली
धनंजय सिंह ने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग संस्थाओं और एजेंसियों के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित कराई जाती हैं, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता में एकरूपता नहीं रह पाती। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन के लिए एक विश्वसनीय और सक्षम एजेंसी तय करे, जिसकी जवाबदेही पूरी तरह सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि जब एक ही एजेंसी निर्धारित मानकों के तहत परीक्षाएं आयोजित करेगी तो अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्रियों और शिक्षा विशेषज्ञों के साथ बने राष्ट्रीय नीति
पूर्व सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, शिक्षा विशेषज्ञों और परीक्षा संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर व्यापक नीति तैयार करे। उनका कहना था कि पेपर लीक केवल किसी एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है।
उन्होंने मांग की कि इस दिशा में सख्त कानून बनाया जाए, ताकि पेपर लीक कराने वाले गिरोह, उनके सहयोगियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ त्वरित एवं कठोर कार्रवाई हो सके। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
NDA और CDS परीक्षाओं का दिया उदाहरण
धनंजय सिंह ने अपने तर्क को मजबूत करते हुए कहा कि पिछले लगभग 35 वर्षों में उन्होंने कभी यह नहीं सुना कि एनडीए (NDA) या सीडीएस (CDS) जैसी महत्वपूर्ण सैन्य परीक्षाओं का प्रश्नपत्र लीक हुआ हो। उनके अनुसार इन परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था बेहद मजबूत और विश्वसनीय है।
उन्होंने कहा कि यदि सैन्य परीक्षाओं में इतनी प्रभावी गोपनीयता बनाए रखी जा सकती है तो अन्य राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उसी प्रकार की प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
लोकतंत्र में जनभावनाओं का सम्मान जरूरी
धनंजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में जनता और विशेष रूप से युवाओं को अपनी बात शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से रखने का पूरा अधिकार है। वहीं सरकार का दायित्व है कि वह जनभावनाओं का सम्मान करते हुए समय पर ठोस और प्रभावी निर्णय ले।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार स्थायी परीक्षा व्यवस्था, स्पष्ट जवाबदेही और कठोर कानून के साथ आगे बढ़ती है तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। इससे न केवल लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली पर लोगों का विश्वास भी और मजबूत होगा।










