रायपुर

बिना नोटिस दुकानें सील करने पर बवाल, नगर निगम की कार्रवाई से 10 व्यापारियों का रोजगार संकट में : आकाश तिवारी

व्यापारियों का आरोप—कच्चा माल दुकानों में बंद, लाखों रुपये के नुकसान की आशंका; नेता प्रतिपक्ष ने उठाए कई सवाल

संवाद सूत्र | रायपुर

रायपुर नगर निगम मुख्यालय के सामने स्थित उद्यान परिसर में संचालित चौपाटी की दुकानों को सील किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। नगर निगम की इस कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की। व्यापारियों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना दुकानों को सील कर दिया गया, जिससे उनका हजारों रुपये का कच्चा माल अंदर ही बंद रह गया और अब उसके खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। इस पूरे मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने नगर निगम प्रशासन पर असंवेदनशीलता और तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार नगर निगम द्वारा आम नागरिकों को उद्यान परिसर में स्वच्छ वातावरण के साथ खानपान की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चौपाटी विकसित की गई थी। इस परियोजना का अनुबंध वर्ष 2022 में गणपति इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ किया गया था। बाद में गणपति इंफ्रास्ट्रक्चर ने विधि बुक एंड स्टेशनरी के माध्यम से विभिन्न व्यापारियों को दुकान संचालन का अधिकार दिया। व्यापारियों का कहना है कि उनका प्रत्यक्ष अनुबंध नगर निगम से नहीं था, बल्कि वे विधि बुक एंड स्टेशनरी के साथ हुए अनुबंध के आधार पर नियमित रूप से दुकान संचालित कर रहे थे और तय किराया भी समय पर जमा कर रहे थे।

व्यापारियों के अनुसार 20 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे नगर निगम की टीम ने अचानक पहुंचकर दुकानों को सील कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें न तो पहले कोई लिखित सूचना दी गई और न ही सामान निकालने का समय मिला। दुकानों के भीतर सब्जियां, पनीर, मसाले, गैस सिलेंडर, इंडक्शन सहित अन्य खाद्य सामग्री बंद रह गई, जिससे अब उनके खराब होने की आशंका है।

बताया गया कि चौपाटी में कुल 14 दुकानों का निर्माण किया गया था, जिनमें से वर्तमान में 10 दुकानें संचालित हो रही थीं। व्यापारियों के अनुसार प्रत्येक दुकानदार प्रतिमाह लगभग 12 हजार से 25 हजार रुपये तक किराया देता था। सभी दुकानों से मिलाकर प्रतिमाह लगभग 1.75 लाख रुपये का किराया जमा किया जाता रहा है।

व्यापारियों से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सील की गई दुकानों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यदि व्यापारियों का नगर निगम से सीधा अनुबंध नहीं था तो उन्हें बिना पूर्व सूचना इस प्रकार दुकानें बंद करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम किसी कारणवश कार्रवाई करना भी चाहता था तो कम से कम 48 घंटे का समय दिया जाना चाहिए था ताकि व्यापारी अपना कच्चा माल और अन्य सामान सुरक्षित स्थान पर रख सकते।

आकाश तिवारी ने आरोप लगाया कि नगर निगम की कार्रवाई पूरी तरह अमानवीय है। उन्होंने कहा कि दुकानों के भीतर रखा खाद्य पदार्थ खराब हो रहा है और इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उनके अनुसार प्रशासन को कार्रवाई से पहले मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि इससे पहले भी शहर की एक चौपाटी को हटाने की कार्रवाई के कारण लगभग 400 परिवारों का रोजगार प्रभावित हुआ था। उनका आरोप है कि अब एक बार फिर उसी प्रकार की स्थिति दोहराई जा रही है, जिससे कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

आकाश तिवारी ने नगर निगम प्रशासन से कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि सील की गई दुकानों में चोरी या किसी प्रकार की क्षति होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—नगर निगम की या अनुबंधित कंपनी गणपति इंफ्रास्ट्रक्चर की? उन्होंने यह भी सवाल किया कि दुकानों में रखे हजारों रुपये के खराब हुए कच्चे माल की भरपाई कौन करेगा। इसके अलावा उन्होंने पूछा कि चौपाटी बंद होने के बाद उद्यान परिसर में साफ-सफाई और खानपान की व्यवस्था कैसे संचालित होगी तथा जिन व्यापारियों का रोजगार प्रभावित हुआ है, उनके पुनर्वास की क्या योजना है।

व्यापारियों का दावा है कि उनके अनुबंध की अवधि समाप्त होने में अभी लगभग एक माह का समय शेष था। उनका कहना है कि यदि अनुबंध समाप्ति या कार्रवाई की पूर्व सूचना दे दी जाती तो वे वैकल्पिक व्यवस्था कर लेते और आर्थिक नुकसान से बच सकते थे।

इस पूरे मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई को नियमों के पालन की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित व्यापारी इसे बिना मानवीय संवेदनाओं के की गई कार्रवाई मान रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने नगर निगम से मांग की है कि व्यापारियों को तत्काल राहत दी जाए, उन्हें अपना सामान निकालने की अनुमति दी जाए तथा हुए आर्थिक नुकसान का उचित आकलन कर मुआवजा देने पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की आजीविका से जुड़े मामलों में प्रशासन को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

इस दौरान व्यापारी सुमित कुमार, जितेंद्र साहू, नरेंद्र देवांगन, दीपक पिंजनी, विक्रम सावरकर, कुलदीप नायक, सिद्धांत और अमित साहू सहित अन्य व्यापारी उपस्थित रहे। इनमें कैफे हैदराबादी, तंदूरी मोमोज, स्पाइसी पल, पावनी हॉट चाइनीज, हैप्पी हॉर्स, ब्रेकिंग ब्रेड, अमृत तुल्य, केडीएस किचन, फूड एट 51 तथा एट एवरीथिंग 50 जैसे प्रतिष्ठानों के संचालक शामिल थे।

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