प्रदर्शन छात्रों का था तो नेता वहां क्या कर रहे थे? जंतर-मंतर हिंसा पर ओम प्रकाश राजभर का हमला
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद राजनीतिक बयानबाजी ने पकड़ी रफ्तार
दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और उसके बाद सामने आई हिंसा की घटनाओं को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों ने छात्रों के आंदोलन को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया और युवाओं को गुमराह कर आंदोलन को हिंसक दिशा देने का प्रयास किया।
राजभर का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन यदि किसी आंदोलन के दौरान हिंसा होती है और छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं युवाओं के भविष्य को उठाना पड़ता है।
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप
एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन केवल छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया था, बल्कि उसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने छात्रों को आगे रखकर अपनी राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
राजभर ने कहा कि जिन छात्रों के खिलाफ अब मुकदमे दर्ज हो रहे हैं, उनके भविष्य की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। उनका कहना था कि किसी भी छात्र का करियर किसी राजनीतिक लाभ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है और राजनीतिक दलों को युवाओं को ऐसे आंदोलनों में शामिल करने से पहले उनके भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए।
विपक्षी नेताओं की मौजूदगी पर उठाए सवाल
ओम प्रकाश राजभर ने विपक्षी नेताओं की मौजूदगी को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि यह पूरी तरह छात्रों का आंदोलन था तो उसमें कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं की सक्रिय उपस्थिति क्यों दिखाई दी।
उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक मंच बनाने से बचना चाहिए। उनका आरोप था कि आंदोलन को राजनीतिक समर्थन देकर उसे अलग दिशा देने का प्रयास किया गया।
कानून व्यवस्था के पालन पर दिया जोर
राजभर ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी नागरिकों को प्राप्त है, लेकिन किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हिंसा किसी भी आंदोलन को कमजोर करती है और इससे सबसे अधिक नुकसान आम लोगों तथा युवाओं को उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी आंदोलन के कारण सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है या कानून व्यवस्था प्रभावित होती है तो प्रशासन को कार्रवाई करनी ही पड़ती है। ऐसे में छात्रों को भी संयम और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखने की आवश्यकता है।
अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना
जंतर-मंतर के मुद्दे के साथ-साथ ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से उनके खिलाफ लगातार राजनीतिक बयानबाजी कराई जा रही है और उन्हें बदनाम करने का अभियान चलाया गया है।
राजभर ने कहा कि उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर जो पोस्ट साझा की थी, उसका उद्देश्य कुछ गंभीर सवाल उठाना था। उनका दावा है कि उन्होंने अपनी पोस्ट के माध्यम से समाजवादी पार्टी के नेतृत्व से कई मुद्दों पर जवाब मांगा है।
सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गंभीर आरोप
राजभर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी से जुड़े कुछ जनप्रतिनिधियों के नाम विभिन्न आपराधिक मामलों में सामने आते रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से आजमगढ़ से जुड़े एक मामले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि गरीब, पिछड़े और दलित वर्ग के लोगों के साथ अन्याय की घटनाएं सामने आती रही हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भूमि कब्जाने और दबंगई जैसी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं और मामले राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बने हुए हैं।
दलितों और पिछड़ों के हितों पर उठाए सवाल
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल सामाजिक न्याय की राजनीति करने का दावा करता है तो उसे दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, जिससे आम लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। राजभर ने इस विषय पर समाजवादी पार्टी नेतृत्व से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग भी की।
राजनीतिक आरोपों के बीच बढ़ी बहस
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद अब यह मुद्दा केवल छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा विषय बन गया है। एक ओर सत्ता पक्ष विपक्ष पर छात्रों को भड़काने और आंदोलन को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगा रहा है, वहीं विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने के आरोप लगा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है, क्योंकि छात्र आंदोलन, कानून व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही जैसे विषय लगातार चर्चा में बने हुए हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में संतुलन की आवश्यकता
विशेषज्ञों का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार हैं, लेकिन इसके साथ कानून व्यवस्था बनाए रखना भी समान रूप से आवश्यक है। किसी भी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।









