कोड़ापुरी हाई स्कूल का जर्जर भवन बना चिंता का विषय, 25–30 वर्ष पुराने भवन की शीघ्र मरम्मत की उठी मांग
ब्यूरो रिपोर्ट
कोड़ापुरी। विद्यार्थियों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यालयों में सुरक्षित आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कोड़ापुरी स्थित हाई स्कूल के लगभग 25 से 30 वर्ष पुराने भवन का विस्तृत निरीक्षण किया गया। लंबे समय से जर्जर स्थिति में पहुंच चुके इस विद्यालय भवन की हालत को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत कराने की मांग उठाई है। निरीक्षण के दौरान भवन की दीवारों, छत और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की तकनीकी जांच भी की गई।
जनप्रतिनिधि और पीडब्ल्यूडी इंजीनियर ने किया संयुक्त निरीक्षण
विद्यालय भवन का निरीक्षण जनपद सदस्य प्रतिनिधि महेश यादव ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियर गजानंद पात्रे के साथ किया। निरीक्षण का उद्देश्य भवन की वर्तमान स्थिति का आकलन करना तथा यह सुनिश्चित करना था कि विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सुरक्षा पर किसी प्रकार का खतरा न रहे।
निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारियों ने विद्यालय परिसर का भ्रमण कर भवन की प्रत्येक महत्वपूर्ण संरचना का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने दीवारों में आई दरारों, छत की स्थिति, प्लास्टर के उखड़ने तथा अन्य कमजोर हिस्सों का परीक्षण करते हुए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की।
बिना कॉलम और बीम के बना था विद्यालय भवन
तकनीकी जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विद्यालय भवन का निर्माण लगभग ढाई से तीन दशक पहले पारंपरिक पद्धति से किया गया था। उस समय भवन में आधुनिक आरसीसी (RCC) फ्रेम संरचना के तहत कॉलम और बीम का उपयोग नहीं किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय के साथ ऐसे भवनों की मजबूती कम होती जाती है। लगातार मौसम के प्रभाव, वर्षा, नमी और प्राकृतिक क्षरण के कारण भवन की संरचना कमजोर पड़ने लगती है। निरीक्षण के दौरान भी भवन के कई हिस्सों में जर्जरता के स्पष्ट संकेत दिखाई दिए, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बढ़ गई हैं।
विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर जताई गई गंभीर चिंता
निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक चिंता विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर व्यक्त की गई। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इसी भवन में अध्ययन करते हैं। यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा का वातावरण तभी बेहतर बन सकता है, जब विद्यालय भवन सुरक्षित और मजबूत हो। इसलिए इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही उचित नहीं होगी।
महेश यादव ने शीघ्र मरम्मत शुरू कराने की मांग की
जनपद सदस्य प्रतिनिधि महेश यादव ने निरीक्षण के बाद कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर से भवन की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर आवश्यक मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य जल्द शुरू कराने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत कर दी जाती है तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकता है। साथ ही विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण भी उपलब्ध होगा।
पीडब्ल्यूडी करेगा तकनीकी रिपोर्ट तैयार
लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर गजानंद पात्रे ने निरीक्षण के दौरान भवन की तकनीकी स्थिति का परीक्षण किया। उन्होंने बताया कि भवन के विभिन्न हिस्सों का मूल्यांकन कर आवश्यक बिंदुओं को रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमानुसार विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर संबंधित विभाग को भेजा जाएगा, ताकि आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद मरम्मत और रिपेयरिंग का कार्य शीघ्र प्रारंभ कराया जा सके।
ग्रामीणों और पालकों ने भी उठाई आवाज
विद्यालय भवन की स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और विद्यार्थियों के अभिभावकों ने भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि वर्षों पुराने भवन की हालत लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन अब तक व्यापक स्तर पर मरम्मत नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालय भवन की मरम्मत को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
सुरक्षित विद्यालय ही बेहतर शिक्षा की आधारशिला
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल अच्छे शिक्षकों और पाठ्यक्रम से ही संभव नहीं होती, बल्कि सुरक्षित एवं सुविधायुक्त विद्यालय भवन भी इसकी महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि विद्यालय का भवन मजबूत और सुरक्षित होगा तो विद्यार्थी बिना किसी भय के पढ़ाई कर सकेंगे और शिक्षकों को भी बेहतर वातावरण मिलेगा।
इसी कारण प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर विद्यालय भवनों की स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराने के निर्देश दिए जाते रहे हैं।
स्थानीय लोगों को कार्रवाई का इंतजार
कोड़ापुरी हाई स्कूल के निरीक्षण के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि तकनीकी रिपोर्ट तैयार होने के बाद भवन की मरम्मत के लिए शीघ्र स्वीकृति मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान होगा।
यदि समयबद्ध तरीके से मरम्मत कार्य पूरा किया जाता है तो न केवल विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण भी पहले की तुलना में अधिक बेहतर और सुरक्षित बन सकेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा के मंदिर को सुरक्षित रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है और इस दिशा में त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।









