100 करोड़ के कारोबार का मालिक निकला पंचर बनाने वाला युवक, 28 करोड़ रुपये जीएसटी बकाया नोटिस से खुला फर्जीवाड़े का बड़ा खेल
गोरखपुर में सामने आए इस चौंकाने वाले जीएसटी फर्जीवाड़े ने पहचान संबंधी दस्तावेजों के दुरुपयोग की गंभीरता को उजागर कर दिया है। राज प्रजापति नामक युवक के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का कथित रूप से इस्तेमाल कर 100 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनी खड़ी कर दी गई। जब कंपनी पर 28 करोड़ रुपये जीएसटी बकाया निकला तो केंद्रीय जीएसटी विभाग जांच के लिए पहुंचा और पता चला कि कथित मालिक एक साधारण पंचर बनाने वाला व्यक्ति है। पुलिस और जीएसटी विभाग अब फर्जी कंपनी बनाकर टैक्स चोरी करने वाले आरोपियों की तलाश में जुटे हैं। यह मामला गोरखपुर जीएसटी फर्जी कंपनी मामला, टैक्स फ्रॉड और पहचान चोरी जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल कर विभाग को हैरान कर दिया, बल्कि आम लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग किस हद तक किया जा सकता है। केंद्रीय जीएसटी विभाग की टीम जब 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाली एक कंपनी के मालिक से 28 करोड़ रुपये के कर बकाये की वसूली के लिए पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी स्तब्ध रह गए। जिस व्यक्ति को कागजों में करोड़ों के कारोबार का मालिक बताया गया था, वह वास्तव में एक साधारण पंचर बनाने की दुकान चलाकर अपना परिवार चला रहा था।
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने एक बड़े फर्जीवाड़े और पहचान चोरी के मामले की ओर इशारा किया। अब पुलिस और जीएसटी विभाग दोनों इस मामले की गहन जांच में जुटे हुए हैं तथा कथित मुख्य आरोपी की तलाश की जा रही है।
जीएसटी नोटिस मिलने के बाद बढ़ी चिंता
गोरखपुर के एम्स थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्थित बुजुर्ग गांव निवासी राज प्रजापति के जीवन में उस समय अचानक हलचल मच गई जब उन्हें केंद्रीय जीएसटी विभाग की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ। नोटिस में बताया गया था कि उनके नाम से संचालित एक फर्म पर लगभग 28 करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया है और निर्धारित समय के भीतर राशि जमा न करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एक साधारण मजदूरी और पंचर बनाने का काम करने वाले राज प्रजापति के लिए यह नोटिस किसी सदमे से कम नहीं था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उनके नाम पर इतनी बड़ी कंपनी कैसे चल रही है और करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया कैसे हो सकता है।
जांच के लिए घर पहुंची जीएसटी टीम
जब नोटिस का कोई जवाब विभाग को नहीं मिला तो केंद्रीय जीएसटी विभाग की टीम सीधे राज प्रजापति के घर पहुंच गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पूछताछ शुरू की और कंपनी के संचालन, कारोबार तथा टैक्स भुगतान से संबंधित जानकारी मांगी।
पूछताछ के दौरान जब अधिकारियों को यह पता चला कि राज प्रजापति कोई उद्योगपति या व्यवसायी नहीं बल्कि एक छोटी पंचर मरम्मत की दुकान चलाने वाला व्यक्ति है, तो विभाग के अधिकारी भी चौंक गए। उन्हें संदेह हुआ कि कहीं न कहीं राज की पहचान का दुरुपयोग किया गया है।
इसके बाद अधिकारियों ने मामले की गहराई से जांच शुरू की और राज से विस्तार से बातचीत की। इसी दौरान पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
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बहन की शादी के लिए लिया था कर्ज
राज प्रजापति ने अधिकारियों को बताया कि वर्ष 2024 में उनकी बहन की शादी थी। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें पैसों की जरूरत थी। इसी दौरान गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें कर्ज देने का भरोसा दिलाया।
राज के अनुसार कर्ज देने से पहले उस व्यक्ति ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने को कहा। साथ ही कुछ कागजों पर हस्ताक्षर भी करवाए गए। इतना ही नहीं, एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई।
उस समय राज को लगा कि यह सारी प्रक्रिया कर्ज देने की औपचारिकता का हिस्सा है। उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल किसी बड़े आर्थिक अपराध में किया जा सकता है।
दस्तावेजों के आधार पर खड़ी कर दी गई कंपनी
जांच में सामने आया कि राज प्रजापति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कुछ लोगों ने उनके नाम से एक कंपनी का पंजीकरण करा लिया। कथित तौर पर “मेसर्स गढ़ प्राइवेट लिमिटेड टेक्सटाइल” नामक फर्म बनाई गई और उसी के माध्यम से बड़े पैमाने पर कारोबार किया गया।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार इस कंपनी का कारोबार लगभग 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। लेकिन कारोबार के अनुपात में जीएसटी का भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते कंपनी पर करीब 28 करोड़ रुपये का कर बकाया दर्ज हो गया।
जब विभाग ने टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू की, तब कागजों में दर्ज कंपनी मालिक के रूप में राज प्रजापति का नाम सामने आया। इसी आधार पर नोटिस जारी किया गया और बाद में विभागीय टीम उनके घर पहुंची।
फर्जी कंपनी बनाकर आरोपी हुआ फरार
जांच के दौरान यह भी पता चला कि जिन लोगों ने राज के दस्तावेजों का उपयोग किया था, उन्होंने कंपनी के नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार करने के बाद फर्म को बंद कर दिया और फरार हो गए।
प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों और पहचान के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपी ने राज जैसे आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को निशाना बनाकर उसके दस्तावेज हासिल किए और फिर उन्हीं के आधार पर कंपनी संचालित की। कंपनी के बंद होने के बाद जब टैक्स बकाया की वसूली का समय आया, तब पूरा मामला उजागर हुआ।
पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत
घटना का सच सामने आने के बाद राज प्रजापति ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि धोखे से उनके दस्तावेज लिए गए और उनका दुरुपयोग करते हुए उनके नाम पर कंपनी संचालित की गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संबंधित दस्तावेजों, बैंक खातों और कंपनी से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
पहचान संबंधी दस्तावेजों के दुरुपयोग का गंभीर मामला
यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी देती है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज किसी भी व्यक्ति को बिना पूरी जानकारी के नहीं सौंपने चाहिए। अक्सर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर लोग कर्ज, नौकरी या सरकारी योजना के नाम पर अपने दस्तावेज दे देते हैं, जिसका बाद में गलत इस्तेमाल किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहचान चोरी और फर्जी कंपनियों के जरिए टैक्स चोरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में असली आरोपी पर्दे के पीछे रहते हैं जबकि निर्दोष लोग कानूनी परेशानियों का सामना करते हैं।
जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
फिलहाल केंद्रीय जीएसटी विभाग और स्थानीय पुलिस दोनों मिलकर मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
इस मामले ने न केवल प्रशासनिक एजेंसियों को सतर्क किया है बल्कि आम नागरिकों को भी अपने व्यक्तिगत दस्तावेजों की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह उत्तर प्रदेश में फर्जी कंपनी बनाकर कर चोरी करने के बड़े मामलों में से एक साबित हो सकता है।
इस बीच पंचर बनाकर जीवन यापन करने वाले राज प्रजापति उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जांच पूरी होने के बाद उनका नाम इस पूरे प्रकरण से मुक्त होगा और वास्तविक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।








