ठेले पर खीरा-तरबूज बेचने से ‘योगी धर्मेश्वर’ बनने तक : संघर्ष, साधना और सेवा की प्रेरक कहानी

इरफान अली लारी की रिपोर्ट देवरिया/गोरखपुर। जीवन में सफलता पाने के लिए केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और समाज के प्रति समर्पण की आवश्यकता होती है। इसका जीवंत उदाहरण हैं कुशीनगर जनपद के ग्राम कुचिया मठ निवासी धर्मेंद्र प्रजापति, जिन्हें आज लोग सम्मानपूर्वक ‘योगी धर्मेश्वर’ के नाम से जानते हैं। कभी … ठेले पर खीरा-तरबूज बेचने से ‘योगी धर्मेश्वर’ बनने तक : संघर्ष, साधना और सेवा की प्रेरक कहानी को पढ़ना जारी रखें