ऐसी आंधी आई कि लगा सब उड़ा ले जाएगी, थम गए सड़क और रेल के पहिए, एक बुजुर्ग की दर्दनाक मौत
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उन्नाव। उत्तर प्रदेश में मानसून के आगमन से पहले मौसम का मिजाज लगातार बदलता नजर आ रहा है। सोमवार देर रात उन्नाव जिले में आई तेज धूलभरी आंधी और तूफान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। कुछ ही मिनटों तक चली तेज हवाओं ने ऐसा कहर बरपाया कि लोगों को लगा मानो सब कुछ अपने साथ उड़ा ले जाएगी। जिले के कई हिस्सों में बड़े-बड़े पेड़ धराशायी हो गए, बिजली के खंभे उखड़ गए, सड़क और रेल यातायात बाधित हो गया तथा एक बुजुर्ग किसान की दर्दनाक मौत हो गई।
आंधी का असर इतना व्यापक था कि कई क्षेत्रों में पूरी रात अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। प्रशासन को सड़क मार्ग और रेलवे ट्रैक से अवरोध हटाने के लिए देर रात तक मशक्कत करनी पड़ी। वहीं, दर्जनों गांवों में बिजली आपूर्ति ठप होने से लोगों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ी।
कुछ ही मिनटों में बदल गए हालात
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देर रात अचानक मौसम ने करवट ली और तेज हवाओं के साथ धूलभरी आंधी चलने लगी। देखते ही देखते हवा की गति इतनी बढ़ गई कि लोगों को अपने घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। कई स्थानों पर पेड़ टूटकर सड़कों पर गिर गए, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।
सफीपुर और बांगरमऊ क्षेत्र में तूफान का असर सबसे अधिक देखने को मिला। यहां कई स्थानों पर पेड़ों की टहनियां टूटकर मकानों और वाहनों पर गिर गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तार क्षतिग्रस्त होने से व्यापक स्तर पर विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई।
नीम का पेड़ बना मौत का कारण
आंधी के दौरान सबसे दुखद घटना माखी थाना क्षेत्र के मेथीटुकुर गांव में सामने आई। गांव के एक बुजुर्ग किसान गर्मी के कारण घर के बाहर नीम के पेड़ के नीचे सो रहे थे। देर रात आई तेज आंधी में पेड़ अचानक टूटकर उनके ऊपर गिर पड़ा।
हादसे की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा काफी प्रयासों के बाद उन्हें पेड़ के नीचे से बाहर निकाला गया। हालांकि तब तक उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि मौसम के अचानक बदले रुख ने किसी को संभलने का अवसर नहीं दिया। कुछ ही मिनटों में तेज हवाओं ने भारी तबाही मचा दी।
रेल मार्ग पर भी पड़ा तूफान का असर
तेज आंधी का असर केवल सड़क यातायात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रेलवे संचालन भी प्रभावित हुआ। उन्नाव-बालामऊ रेलखंड पर बड़ा देव स्टेशन के निकट ट्रैक के किनारे एक विद्युत पोल गिर जाने से रेल यातायात बाधित हो गया।
इस दौरान कानपुर-बालामऊ पैसेंजर ट्रेन को काफी देर तक रोकना पड़ा। रेलवे कर्मचारियों और तकनीकी टीमों ने मौके पर पहुंचकर पोल हटाने और ट्रैक को सुरक्षित बनाने का कार्य शुरू किया। कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रेल मार्ग को बहाल किया जा सका और ट्रेनों का संचालन सामान्य हुआ।
यात्रियों को इस दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग घंटों तक स्टेशन और ट्रेनों में फंसे रहे। हालांकि रेलवे प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया।
सड़क मार्ग पर लगा जाम
जिले के विभिन्न हिस्सों में दर्जनों पेड़ गिरने से कई प्रमुख सड़कें अवरुद्ध हो गईं। ग्रामीण संपर्क मार्गों पर स्थिति और भी गंभीर रही, जहां पेड़ हटाने में अधिक समय लगा।
आंधी थमने के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और नगर निकाय की टीमें सक्रिय हुईं। जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से सड़कों से पेड़ हटाए गए। इसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका।
कई स्थानों पर बिजली के खंभे और तार भी क्षतिग्रस्त हुए, जिससे राहत कार्यों में अतिरिक्त समय लगा। बिजली विभाग की टीमें पूरी रात मरम्मत कार्य में जुटी रहीं।
दर्जनों गांवों में गुल रही बिजली
तूफान के कारण बिजली वितरण व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा। कई जगहों पर तार टूट गए और खंभे गिर गए, जिससे दर्जनों गांव अंधेरे में डूब गए।
बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को गर्मी और उमस के बीच कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई क्योंकि अधिकांश स्थानों पर मोटर और पंप बिजली पर निर्भर हैं।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है और चरणबद्ध तरीके से बिजली आपूर्ति बहाल की जा रही है।
प्रशासन ने शुरू कराया नुकसान का आकलन
अधिकारियों के अनुसार जिले के कई क्षेत्रों में आंधी और तूफान का प्रभाव देखा गया है। प्रशासन ने राजस्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को नुकसान का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में गिरे पेड़ों को हटाने, बिजली व्यवस्था बहाल करने और यातायात सुचारु करने के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं। साथ ही मृतक किसान के परिवार को शासन की निर्धारित सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
मानसून से पहले मौसम का बदला मिजाज
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश में मानसून के आगमन से पहले इस प्रकार की धूलभरी आंधियां और तेज हवाएं सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। वायुमंडल में बन रहे दबाव क्षेत्रों और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण लगातार मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है।
पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में भी तेज हवाओं और आंधी का असर देखा गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी कई जिलों में तेज हवाएं और हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 18 से 22 जून के बीच प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रवेश की संभावना है। मानसून के आगमन से पहले मौसम में इस प्रकार की अस्थिरता बनी रह सकती है।
सतर्क रहने की जरूरत
मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। तेज आंधी या तूफान की स्थिति में पेड़ों, बिजली के खंभों और जर्जर संरचनाओं के पास खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों और ग्रामीणों को भी खुले स्थानों पर रात्रि विश्राम करने से परहेज करने की सलाह दी गई है।
उन्नाव में आई यह आंधी एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाएं कभी भी अचानक दस्तक दे सकती हैं। ऐसे में समय रहते सतर्कता और सावधानी ही बड़े हादसों को टालने का सबसे प्रभावी उपाय है।








