पूर्व विधायक काली प्रसाद को देवरिया भाजपा की कमान, कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर
संगठन ने लंबे राजनीतिक अनुभव और जमीनी पकड़ पर जताया भरोसा
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया में भारतीय जनता पार्टी के नए जिलाध्यक्ष की घोषणा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। भाजपा प्रदेश नेतृत्व द्वारा गुरुवार को पांच जिला और महानगर इकाइयों के नए जिलाध्यक्षों की सूची जारी की गई, जिसमें सलेमपुर सुरक्षित विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रहे काली प्रसाद को देवरिया भाजपा का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। विभिन्न स्थानों पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर एक-दूसरे को बधाई दी।
देवरिया भाजपा संगठन में पिछले लगभग एक वर्ष से जिलाध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। संगठन के भीतर कई दावेदारों के नाम चर्चा में थे, लेकिन अंततः पार्टी नेतृत्व ने अनुभवी और जमीनी नेता काली प्रसाद पर भरोसा जताते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
संगठन और राजनीति में लंबा अनुभव
काली प्रसाद भाजपा के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहकर पार्टी को मजबूत करने का कार्य किया है। अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले काली प्रसाद की पहचान एक सरल, सुलभ और संगठन के प्रति समर्पित नेता के रूप में रही है। उन्होंने गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुंचाने का काम किया और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
उनका जन्म 5 जून 1967 को देवरिया जिले के देवकली गांव, पोस्ट धरमेर में हुआ था। उन्होंने परास्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। यही सक्रियता आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बनी।
पंचायत राजनीति से शुरू हुआ सफर
काली प्रसाद का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ। उन्होंने वर्ष 1996 में क्षेत्र पंचायत सदस्य यानी बीडीसी का चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने लगातार क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वर्ष 1996 से 2001 तक वे भागलपुर ब्लॉक के ब्लॉक प्रमुख रहे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण विकास और पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई पहल कीं।
इसके बाद वे वर्ष 2000 से 2005 तक क्षेत्र पंचायत सदस्य रहे। वर्ष 2005 से 2010 तक जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। वहीं वर्ष 2006 से 2011 तक जिला योजना समिति के सदस्य के रूप में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा तक का उनका अनुभव उन्हें संगठन और जनता के बीच मजबूत सेतु बनाता है। यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व ने उन्हें देवरिया जैसे महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया।
भाजपा संगठन में लगातार बढ़ता कद
काली प्रसाद का भाजपा संगठन में भी लंबा और सक्रिय अनुभव रहा है। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और सक्रियता को देखते हुए उन्हें समय-समय पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। वर्ष 2009 से 2012 तक उन्होंने भाजपा जिला मंत्री के रूप में संगठनात्मक कार्यों को मजबूती दी। इसके बाद वर्ष 2013 में उन्हें भाजपा प्रदेश परिषद का सदस्य बनाया गया।
भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती रही। वर्ष 2017 से 2019 तक उन्होंने जिला महामंत्री के रूप में काम किया। इस दौरान संगठन विस्तार, बूथ सशक्तिकरण और कार्यकर्ता संवाद जैसे अभियानों में उनकी अहम भूमिका रही। बाद में पार्टी ने उन्हें गोरखपुर क्षेत्र का क्षेत्रीय मंत्री भी नियुक्त किया।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन के भीतर उनकी कार्यशैली अनुशासित और संतुलित रही है। वे कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय नेता माने जाते हैं और यही कारण है कि उनकी नियुक्ति को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधायक के रूप में भी निभाई अहम भूमिका
भाजपा ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में काली प्रसाद को 341 सलेमपुर सुरक्षित विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे और वर्ष 2017 से 2022 तक विधायक के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
विधायक रहते हुए उन्होंने सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी। क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने और जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने में उनकी सक्रिय भूमिका रही। उनके समर्थकों का कहना है कि वे जनता से सीधे संवाद रखने वाले नेता रहे हैं और इसी वजह से उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनी हुई है।
इसके अलावा वे भाजपा राष्ट्रीय परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के साथ जुड़ाव ने उनके राजनीतिक अनुभव को और व्यापक बनाया।
आगामी चुनावों को लेकर भाजपा की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देवरिया में काली प्रसाद की नियुक्ति भाजपा की सामाजिक और संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा है। अनुसूचित जाति वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन के प्रति लंबे अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है।
आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में जुटी हुई है। ऐसे में अनुभवी और जमीनी नेता को जिलाध्यक्ष बनाना पार्टी के लिए रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। माना जा रहा है कि काली प्रसाद संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सफल होंगे।
कार्यकर्ताओं ने जताई खुशी
काली प्रसाद को देवरिया भाजपा जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खुशी जाहिर की। कई स्थानों पर मिठाई बांटी गई और एक-दूसरे को बधाई दी गई। भाजपा नेताओं ने इसे संगठन को मजबूत करने वाला निर्णय बताया।
इस अवसर पर विनय पाण्डेय, मुरली मिश्र, अम्बिकेश पाण्डेय, अजय दूबे वत्स, उमाकांत मिश्रा, रमाकांत मिश्रा, पिंटू तिवारी, राघवेंद्र पासवान, हेमंत कुमार और अनुराग मिश्रा समेत अनेक कार्यकर्ताओं ने खुशी का इजहार करते हुए कहा कि काली प्रसाद के नेतृत्व में संगठन और अधिक मजबूत होगा।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि काली प्रसाद लंबे समय से पार्टी के लिए समर्पित भाव से कार्य करते रहे हैं और उन्हें संगठन के हर स्तर का अनुभव है। ऐसे में उनकी नियुक्ति से कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा और संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।
देवरिया भाजपा को नई दिशा मिलने की उम्मीद
देवरिया भाजपा संगठन में काली प्रसाद की नियुक्ति को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। संगठन के भीतर लंबे समय से सक्रिय रहने और विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाने के कारण उनसे काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले समय में काली प्रसाद संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और जनता के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी नियुक्ति से भाजपा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है।








