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बीमार पड़ रहे कुर्बानी के बकरे! भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक ने बढ़ाई चिंता, मंडियों में 106 डिग्री तक पहुंच रहा बुखार

ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। आसमान से बरसती आग और झुलसा देने वाली गर्म हवाओं ने इंसानों के साथ-साथ पशुओं का भी हाल बेहाल कर दिया है। बकरीद नजदीक आते ही प्रदेशभर की पशु मंडियों में बकरों की खरीद-बिक्री तेज हो गई है, लेकिन इस बार बाजारों में एक नई चिंता सामने आ रही है। कुर्बानी के लिए लाए जा रहे बकरे तेज गर्मी और हीट स्ट्रोक के कारण तेजी से बीमार पड़ रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कई बकरों में 106 डिग्री तक बुखार दर्ज किया जा रहा है। पशु चिकित्सकों ने इसे बेहद चिंताजनक स्थिति बताया है।

मुरादाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में इन दिनों तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। दोपहर के समय सड़कें तपते तवे जैसी महसूस हो रही हैं। ऐसे मौसम में दूर-दराज के राज्यों और जिलों से ट्रकों के जरिए लाए जा रहे बकरे गर्मी की मार सहन नहीं कर पा रहे हैं। पशु अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में बीमार बकरों को इलाज के लिए लाया जा रहा है।

मंडियों में बढ़ी परेशानी, बीमार हो रहे जानवर

बकरीद को लेकर शहर और गांवों की मंडियों में इन दिनों भारी भीड़ देखी जा रही है। लोग ऊंची नस्लों और बड़े आकार के बकरे खरीदने के लिए बाजारों का रुख कर रहे हैं। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड समेत कई राज्यों से बकरों की खेप उत्तर प्रदेश पहुंच रही है। लंबी दूरी का सफर, ट्रकों में घंटों बंद रहना और फिर भीषण गर्मी का सामना करना इन जानवरों के लिए भारी पड़ रहा है।

पशु चिकित्सकों के अनुसार, लंबे सफर के दौरान बकरों को पर्याप्त पानी और आराम नहीं मिल पाता। इससे उनके शरीर में पानी की कमी होने लगती है। जब ये बकरे सीधे तेज गर्मी वाले वातावरण में पहुंचते हैं तो उनका शरीर तापमान नियंत्रित नहीं कर पाता और वे हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाते हैं। कई मामलों में बकरे खाना-पीना छोड़ देते हैं और लगातार हांफते रहते हैं।

राजकीय पशु अस्पतालों में रोजाना ऐसे 12 से 15 मामले सामने आ रहे हैं, जहां बकरों को तेज बुखार, कमजोरी, सांस फूलने और दस्त जैसी समस्याओं के साथ लाया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज न मिले तो जानवर की मौत भी हो सकती है।

106 डिग्री तक पहुंच रहा बकरों का तापमान

मुरादाबाद के मकबरा क्षेत्र निवासी इमरान खान ने करीब दो सप्ताह पहले एक बकरा पशु बाजार से खरीदा था। शुरुआत में बकरा पूरी तरह स्वस्थ दिखाई दे रहा था, लेकिन अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसने खाना बंद कर दिया और लगातार सुस्त रहने लगा। जब उसे पशु चिकित्सालय ले जाया गया तो जांच में उसका तापमान 106 डिग्री दर्ज किया गया।

डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया और दवाएं दीं। लगातार निगरानी और उपचार के बाद अगले दिन उसका तापमान घटकर 102 डिग्री तक पहुंचा, जिसके बाद उसकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ। चिकित्सकों का कहना है कि थोड़ी भी देर होती तो बकरे की जान पर खतरा बढ़ सकता था।

इसी तरह सिविल लाइंस क्षेत्र के अफजाल ने एक राजस्थानी नस्ल का बकरा खरीदा था। खरीदने के अगले ही दिन बकरा तेजी से हांफने लगा और खड़ा होने में भी दिक्कत महसूस करने लगा। जांच के दौरान उसमें 104 डिग्री बुखार पाया गया। डॉक्टरों ने इसे गंभीर हीट स्ट्रोक का मामला बताया।

डॉक्टरों ने बताया सबसे बड़ा खतरा

पशु चिकित्सकों के मुताबिक, इस समय सबसे बड़ा खतरा हीट स्ट्रोक का है। तेज धूप और गर्म हवाएं जानवरों के शरीर का तापमान तेजी से बढ़ा रही हैं। इंसानों की तरह पशुओं में भी शरीर का तापमान नियंत्रित करने की एक सीमा होती है। जब तापमान उस सीमा से ऊपर पहुंच जाता है तो शरीर के अंग प्रभावित होने लगते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बकरों में हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं। यदि बकरा लगातार हांफ रहा हो, तेजी से सांस ले रहा हो, खाना छोड़ दे, आंखों में सुस्ती दिखे, बार-बार छींक आए या नाक से पानी निकले तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई मामलों में जानवरों को दस्त और कमजोरी की शिकायत भी हो रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी में बकरों का शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है। शरीर में पानी और जरूरी खनिजों की कमी होने लगती है, जिससे उनकी हालत तेजी से बिगड़ सकती है।

बकरीद से पहले बढ़ी पशुपालकों की चिंता

बकरीद को देखते हुए लोग महंगे दामों पर बकरे खरीद रहे हैं। ऐसे में जानवरों के बीमार पड़ने से पशुपालकों और खरीदारों की चिंता भी बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि बाजारों में बीमार बकरे भी पहुंच रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।

पशुपालकों का कहना है कि इस बार गर्मी पिछले कई वर्षों की तुलना में अधिक खतरनाक महसूस हो रही है। दिन के समय जानवरों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया है। कई पशु व्यापारी बकरों को ठंडी जगहों पर रखने और लगातार पानी पिलाने की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद बीमारी के मामले कम नहीं हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम का यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में पशुओं में बीमारियों के मामले और बढ़ सकते हैं। खासकर कमजोर और लंबी दूरी से लाए गए बकरे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

पशु चिकित्सकों ने जारी की एडवाइजरी

पशु अस्पतालों की ओर से बकरा पालकों और खरीदारों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। चिकित्सकों ने साफ कहा है कि दोपहर के समय बकरों को खुली धूप में बिल्कुल न छोड़ें। सुबह और शाम के समय ही उन्हें बाहर निकालें और चारा खिलाएं।

इसके अलावा बकरों को लगातार स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग गर्मी में जानवरों को बार-बार नहलाने लगते हैं, लेकिन तेज गर्मी के दौरान अचानक ठंडा पानी डालना भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे शरीर का तापमान असंतुलित हो जाता है।

विशेषज्ञों ने दूसरे राज्यों से लाए गए बकरों की खरीदारी में विशेष सावधानी बरतने को कहा है। खरीदने से पहले जानवर की सक्रियता, सांस लेने की स्थिति और खाने-पीने की आदतों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। यदि बकरा सुस्त दिखाई दे या लगातार हांफ रहा हो तो तुरंत पशु चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।

बढ़ती गर्मी ने पशु स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ाया दबाव

भीषण गर्मी के कारण अब पशु अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ने लगा है। कई अस्पतालों में दवाओं और डॉक्टरों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ा तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

प्रदेश में लगातार पड़ रही गर्मी अब केवल इंसानों तक सीमित समस्या नहीं रह गई है। इसका असर पशुधन और पशु बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बकरीद के मौसम में मंडियों में उमड़ रही भीड़ के बीच बीमार पड़ते बकरे लोगों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं।

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