मौसम

अगले 20 घंटे यूपी पर पड़ सकते हैं भारी, आसमान उगलेगा आग; हीटवेव और गर्म रातों ने बढ़ाई दहशत

50 से ज्यादा जिलों में वार्म नाइट अलर्ट, कई इलाकों में रेड जोन घोषित

चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की फिजाओं में इन दिनों राहत नहीं, बल्कि आग घुली हुई महसूस हो रही है। सूरज की तपिश, पछुआ हवाओं की चुभन और लगातार चढ़ता तापमान अब आम लोगों की दिनचर्या पर भारी पड़ने लगा है। हालात ऐसे हैं कि दोपहर में सड़कें सूनी दिखाई दे रही हैं, जबकि रात में भी गर्मी लोगों का पीछा नहीं छोड़ रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 20 से 72 घंटे को बेहद संवेदनशील माना है और प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण लू को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है।

राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश शहरों में गर्म हवाओं ने लोगों को घरों में कैद कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार गर्मी केवल दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि रात का तापमान भी शरीर पर खतरनाक असर डाल सकता है। यही वजह है कि इस बार “वार्म नाइट” सबसे बड़ी चिंता बनकर सामने आई है।

बुंदेलखंड और ब्रज बने आग के गोले

प्रदेश में सबसे ज्यादा असर बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र में देखा जा रहा है। बांदा, चित्रकूट, झांसी, ललितपुर, महोबा, जालौन, हमीरपुर और फतेहपुर जैसे जिलों में धरती तवे की तरह तप रही है। दोपहर के समय सड़क पर निकलना सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए जोखिम माना जा रहा है।

ब्रज क्षेत्र के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस, एटा और मैनपुरी में भी हालात कम गंभीर नहीं हैं। तेज धूप और शुष्क हवाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई शहरों में दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा दिखाई देने लगा है। ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले मजदूरों और किसानों पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है।

रेड अलर्ट वाले जिलों की संख्या लगातार बढ़ी

मौसम विभाग के अनुसार लू का असर हर गुजरते दिन के साथ और तीखा होता जा रहा है। पहले जिन जिलों में ऑरेंज अलर्ट था, वहां अब रेड अलर्ट जारी किया जा चुका है। कानपुर नगर, प्रयागराज, कौशांबी, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, अलीगढ़ और मथुरा जैसे शहर अब गंभीर हीटवेव की चपेट में बताए जा रहे हैं।

पूर्वांचल के कई जिलों में भी स्थिति तेजी से खराब हुई है। वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली और सोनभद्र में तेज गर्म हवाओं के साथ उमस ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान और आर्द्रता का यह मिश्रण शरीर को अधिक तेजी से डिहाइड्रेट करता है।

रात में भी नहीं मिल रही राहत

इस बार सबसे चिंताजनक पहलू “वार्म नाइट” है। सामान्य तौर पर रात के समय तापमान गिरने से शरीर को राहत मिलती है, लेकिन इस बार कई शहरों में रात का तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है।

लखनऊ, कानपुर, मेरठ, गोरखपुर, वाराणसी, नोएडा और गाजियाबाद समेत करीब 50 जिलों में मौसम विभाग ने वार्म नाइट अलर्ट जारी किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि रात में भी गर्मी बनी रहेगी और शरीर को आराम नहीं मिल पाएगा।

राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी लगभग 29 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार गर्म रातें बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं।

क्यों बन गया उत्तर प्रदेश “भट्ठी” ?

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार गर्मी की तीव्रता के पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं। मध्य भारत के ऊपरी वायुमंडल में बना प्रतिचक्रवात गर्म हवा को नीचे की ओर धकेल रहा है। इसके साथ ही पश्चिम दिशा से आने वाली शुष्क पछुआ हवाएं और पूर्वी हिस्से से आने वाली नम हवाओं का टकराव तापमान को और अधिक बढ़ा रहा है।

यही कारण है कि प्रदेश के कई हिस्सों में “सेंसिबल हीट” तेजी से बढ़ी है। इसका मतलब है कि शरीर को वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी महसूस हो रही है। लगातार तेज धूप और गर्म हवाओं ने वातावरण को भट्ठी जैसा बना दिया है।

नोएडा और गाजियाबाद में हालात सबसे ज्यादा गंभीर

नोएडा और गाजियाबाद में इस बार गर्मी ने नए रिकॉर्ड बनाने शुरू कर दिए हैं। नोएडा में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे गर्म दिन माना जा रहा है।

इसके साथ ही प्रदूषण ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रेटर नोएडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब श्रेणी में पहुंच चुका है। गर्म हवा और प्रदूषण का यह खतरनाक मेल सांस और हृदय रोगियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

गाजियाबाद में “हीट आइलैंड इफेक्ट” स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल, बहुमंजिला इमारतें, डामर की सड़कें और घटती हरियाली शहरों को रात में भी ठंडा नहीं होने दे रही हैं। दिन में सोखी गई गर्मी रात में बाहर निकलती है, जिससे रात का तापमान भी ऊंचा बना रहता है।

अस्पतालों में बढ़ने लगे मरीज

प्रदेश के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, चक्कर, उल्टी, कमजोरी और हीट स्ट्रोक से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार धूप में रहने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा पैदा होता है। यदि समय रहते इलाज न मिले तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

प्रशासन अलर्ट मोड में

प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल व्यवस्था मजबूत करने और अस्पतालों में अतिरिक्त बेड तैयार रखने के आदेश दिए गए हैं।

स्कूलों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कई जिलों में अभिभावकों को बच्चों को धूप से बचाने और पर्याप्त पानी पिलाने की सलाह दी गई है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है मुसीबत

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा और तापमान में विशेष गिरावट की संभावना नहीं है। अगर पछुआ हवाओं का असर इसी तरह बना रहा तो कई जिलों में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौर केवल सामान्य गर्मी नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर की भी चेतावनी है। शहरों में घटती हरियाली, बढ़ता प्रदूषण और अनियोजित निर्माण कार्य आने वाले वर्षों में गर्मी को और भयावह बना सकते हैं।

लोगों को बरतनी होगी विशेष सावधानी

भीषण गर्मी के इस दौर में स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना, धूप में निकलते समय सिर ढंकना और खाली पेट बाहर न जाना बेहद जरूरी बताया गया है।

बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी और लगातार गर्म वातावरण कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।

गर्मी का यह कहर फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। ऐसे में आने वाले 20 घंटे उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए बेहद भारी साबित हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button