संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट। मानिकपुर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत कल्याणपुर (हल्दी डांडी) में प्रस्तावित नवीन पुलिस चौकी के निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस चौकी के निर्माण की आड़ में वर्षों पहले उन्हें आवंटित की गई आवासीय पट्टे की जमीन पर निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक अप्रैल 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार के कार्यकाल में गांव के गरीब परिवारों को आवासीय पट्टे आवंटित किए गए थे। इन पट्टों में करीब 41 ग्रामीणों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर वर्तमान में नवीन पुलिस चौकी का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है, वह उनके आवासीय पट्टों की भूमि का हिस्सा है। उनका दावा है कि पुलिस चौकी के लिए जिस भूमि को प्रस्तावित किया गया था, निर्माण कार्य वहां न कराकर दूसरी जगह कराया जा रहा है। इस स्थिति ने प्रशासनिक प्रक्रिया और भूमि चयन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
वर्षों पहले मिले पट्टे, अब जमीन पर निर्माण का आरोप
कल्याणपुर गांव के प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार, अप्रैल 2011 में गरीब ग्रामीणों को आवासीय पट्टे दिए गए थे। इन पट्टों का उद्देश्य ऐसे परिवारों को आवासीय आधार उपलब्ध कराना था, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए पर्याप्त भूमि नहीं थी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इन पट्टों को अपनी स्थायी संपत्ति और भविष्य की सुरक्षा के रूप में देखा था।
लेकिन अब उसी भूमि पर नवीन पुलिस चौकी का निर्माण शुरू होने से प्रभावित परिवारों के सामने अपने आशियाने और जमीन को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें उनकी पट्टे की जमीन से बेदखल किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जबकि उनके मुताबिक भूमि को लेकर उन्हें न तो स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही कोई ऐसी व्यवस्था बताई गई जिससे वे अपने अधिकारों को सुरक्षित मान सकें।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी सार्वजनिक परियोजना के लिए उनकी जमीन की आवश्यकता है तो पहले विधिक प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए और प्रभावित परिवारों के अधिकारों तथा वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में स्पष्ट निर्णय होना चाहिए। उनके अनुसार केवल मौखिक आश्वासन से वर्षों से मिले आवासीय अधिकारों की समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
प्रशासन से मिले ग्रामीण, लेकिन नहीं रुका निर्माण
आवासीय पट्टे की जमीन पर निर्माण शुरू होने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपनी समस्या को लेकर उप जिलाधिकारी मानिकपुर और जिलाधिकारी के समक्ष अपनी बात रखी। ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी देते हुए निर्माण कार्य की स्थिति से भी अवगत कराया।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की ओर से उन्हें समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ। इसके चलते ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई। उनका आरोप है कि जब तक जमीन की वास्तविक स्थिति और पट्टे के अभिलेखों की जांच नहीं होती, तब तक विवादित भूमि पर निर्माण जारी रखना उचित नहीं है।
प्रभावित ग्रामीणों के मुताबिक पुलिस चौकी का निर्माण कार्य लगातार गति से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में यदि बाद में जांच के दौरान जमीन का विवाद सही पाया जाता है तो निर्माण को लेकर नई प्रशासनिक और कानूनी समस्या पैदा हो सकती है।
गरीब ग्रामीण के मकान पर भी कार्रवाई का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि जहां नवीन पुलिस चौकी का निर्माण कराया जा रहा है, उसके बगल में एक गरीब ग्रामीण का मकान बना हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार उस मकान को भी तोड़ने का काम किया गया है।
इस कार्रवाई ने प्रभावित परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही सीमित संसाधनों में जीवन गुजार रहे परिवारों के सामने यदि आवासीय जमीन और मकान दोनों का संकट खड़ा हो जाए तो उनके लिए जीवन यापन करना मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण स्थल और प्रस्तावित पुलिस चौकी की भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया जाए। इसके साथ ही वर्ष 2011 में आवंटित आवासीय पट्टों की स्थिति भी स्पष्ट की जाए, ताकि यह पता चल सके कि निर्माण कार्य किस भूमि पर कराया जा रहा है और प्रभावित ग्रामीणों के अधिकार वास्तव में किस सीमा तक प्रभावित हो रहे हैं।
विधायक से भी लगाई मदद की गुहार
मामले को लेकर प्रभावित ग्रामीणों ने मऊ-मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी (लल्ली भइया) से भी मुलाकात की। ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने विधायक के आवास पर पहुंचकर अपनी पूरी समस्या उनके सामने रखी और आवासीय पट्टे की जमीन पर चल रहे निर्माण की जानकारी दी।
ग्रामीणों का कहना है कि विधायक की ओर से उन्हें आश्वासन दिया गया कि उन्हें जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। हालांकि ग्रामीणों की मुख्य चिंता यह है कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि वैकल्पिक जमीन कब और कहां उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए यह केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि उनके परिवारों के भविष्य और आवासीय सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। इसलिए वे चाहते हैं कि प्रशासन लिखित और स्पष्ट रूप से बताए कि उनकी मौजूदा पट्टे की जमीन का क्या होगा और यदि वैकल्पिक भूमि दी जानी है तो उसका स्थान, रकबा तथा आवंटन की प्रक्रिया क्या होगी।
27 अगस्त को गांव पहुंचे संजय सिंह राणा
ग्रामीणों की समस्या को लेकर ‘चलो गांव की ओर’ जागरूकता अभियान के संस्थापक अध्यक्ष संजय सिंह राणा ने 27 अगस्त 2026 को कल्याणपुर गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने ग्रामीणों से पूरे मामले की जानकारी ली और मौके पर चल रहे नवीन पुलिस चौकी के निर्माण कार्य को देखा।
संजय सिंह राणा ने ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उनके आवासीय पट्टों, प्रस्तावित पुलिस चौकी की भूमि तथा वर्तमान निर्माण स्थल से संबंधित जानकारी प्राप्त की। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि वर्ष 2011 में उन्हें आवासीय पट्टे आवंटित किए गए थे और अब उन्हीं पट्टों से संबंधित भूमि पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
उन्होंने प्रस्तावित भूमि और निर्माण स्थल की स्थिति को भी मौके पर देखा। ग्रामीणों ने उनके सामने अपनी परेशानियां रखते हुए कहा कि वे लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास अपनी समस्या लेकर जा रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें ऐसा समाधान नहीं मिला है जिससे वे पूरी तरह आश्वस्त हो सकें।
एसडीएम और तहसीलदार से हुई विस्तृत चर्चा
मामले की जानकारी लेने के बाद संजय सिंह राणा ने उप जिलाधिकारी मानिकपुर और तहसीलदार मानिकपुर से मुलाकात कर ग्रामीणों को आवंटित आवासीय पट्टों और नवीन पुलिस चौकी के निर्माण से जुड़े विवाद पर विस्तृत चर्चा की।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द ही ग्रामीणों को आवंटित पट्टे की जमीन की नाप कराकर उसे संबंधित ग्रामीणों को आवंटित किया जाएगा। प्रशासन की ओर से दिए गए इस आश्वासन के बाद प्रभावित परिवारों को उम्मीद जगी है कि उनके वर्षों पुराने आवासीय अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
हालांकि ग्रामीणों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भूमि की नाप कब होगी और उसके बाद उन्हें वास्तविक रूप से कौन-सी जमीन आवंटित की जाएगी। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द मौके पर राजस्व टीम भेजकर भूमि की पैमाइश कराए और अभिलेखों के आधार पर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे।
मानिकपुर के पठारी क्षेत्र में जमीन को लेकर पुरानी चिंता
मानिकपुर तहसील का पठारी क्षेत्र भौगोलिक और सामाजिक दृष्टि से कई चुनौतियों वाला इलाका माना जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के अनेक गांवों में गरीब परिवारों की जमीन और आवासीय अधिकारों से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। उनका आरोप है कि कई मामलों में गरीब ग्रामीणों की जमीन पर कब्जे अथवा निर्माण की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन जब वे अपनी समस्या लेकर शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचते हैं तो उन्हें तत्काल कार्रवाई के बजाय आश्वासन से संतोष करना पड़ता है।
कल्याणपुर का मामला भी इसी व्यापक चिंता से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार ने वर्षों पहले गरीब परिवारों को आवासीय पट्टे दिए हैं तो उन पट्टों की जमीन की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है। यदि किसी सार्वजनिक निर्माण के लिए ऐसी भूमि की आवश्यकता पड़ती है तो संबंधित नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
कोल आदिवासी और अनुसूचित जाति के परिवारों के अधिकारों का सवाल
इस पूरे प्रकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि प्रभावित ग्रामीणों में कोल आदिवासी समाज और अनुसूचित जाति से जुड़े परिवार शामिल बताए जा रहे हैं। ऐसे परिवारों के लिए आवासीय जमीन का महत्व केवल संपत्ति तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह उनके सामाजिक और आर्थिक अस्तित्व का आधार भी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि कमजोर और गरीब परिवार प्रशासनिक प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण अक्सर अपने अधिकारों की लड़ाई प्रभावी ढंग से नहीं लड़ पाते। इसलिए उनका कहना है कि इस मामले में प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए और यदि किसी ग्रामीण की जमीन प्रभावित हो रही है तो उसकी भरपाई अथवा वैकल्पिक व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
निर्माण स्थल और प्रस्तावित भूमि की जांच जरूरी
ग्रामीणों की शिकायत के केंद्र में सबसे बड़ा सवाल निर्माण स्थल और नवीन पुलिस चौकी के लिए प्रस्तावित भूमि का है। उनका दावा है कि जिस स्थान को पुलिस चौकी के लिए प्रस्तावित किया गया था, वहां निर्माण नहीं हो रहा है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों, भूमि के नक्शे और स्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान कराना जरूरी हो जाता है।
यदि प्रशासन निष्पक्ष रूप से मौके पर सीमांकन कराकर यह स्पष्ट कर दे कि निर्माण किस भूमि पर हो रहा है और वर्ष 2011 में आवंटित पट्टों की भूमि कहां स्थित है, तो विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। इसके साथ ही ग्रामीणों को भी उनके पट्टों की भूमि की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
आश्वासन से आगे बढ़कर कार्रवाई की मांग
कल्याणपुर के ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों ने जल्द नाप कराकर पट्टे की जमीन उपलब्ध कराने की बात कही है, लेकिन जब तक नाप, सीमांकन और वास्तविक आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक उनकी चिंता समाप्त नहीं होगी।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कराए, वर्ष 2011 के आवासीय पट्टा अभिलेखों का सत्यापन करे, निर्माण स्थल का राजस्व सीमांकन कराए और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे। यदि किसी परिवार का मकान हटाया गया है तो उसके पुनर्वास अथवा वैकल्पिक आवास की व्यवस्था के संबंध में भी स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
कल्याणपुर का यह मामला एक बार फिर यह सवाल सामने ला रहा है कि विकास और सार्वजनिक निर्माण की योजनाओं के बीच गरीब परिवारों के भूमि अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। पुलिस चौकी जैसी आवश्यक सार्वजनिक सुविधा का निर्माण निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके साथ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी गरीब परिवार के वैध अधिकार प्रभावित न हों।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। उप जिलाधिकारी और तहसीलदार की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद यदि जल्द राजस्व टीम मौके पर पहुंचकर पट्टों की नाप और सीमांकन करती है, तो विवाद की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है। वहीं ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी आवासीय जमीन का अधिकार सुरक्षित रहेगा और उन्हें अपने भविष्य के लिए बार-बार अधिकारियों की चौखट पर नहीं जाना पड़ेगा।

























