चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
वृंदावन (मथुरा)। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को नई ऊर्जा और नई दिशा देने के उद्देश्य से बुधवार को वृंदावन में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के तत्वावधान में राधाकृष्ण कृपा धाम में हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में साधु-संतों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं तथा विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वह क्षण रहा जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने प्रतीकात्मक रूप से जेन जी (Gen Z) के युवाओं को आंदोलन की मशाल सौंपी। इस पहल को आंदोलन को नई पीढ़ी से जोड़ने और उसे भविष्य के लिए मजबूत आधार प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
युवाओं को आंदोलन से जोड़ने की रणनीति
अपने संबोधन में महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने कहा कि किसी भी सांस्कृतिक और धार्मिक आंदोलन की सफलता तभी संभव है जब नई पीढ़ी उससे भावनात्मक और वैचारिक रूप से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के सामने अनेक चुनौतियां हैं, लेकिन साथ ही यह भी आवश्यक है कि वे अपने इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समझें।
उन्होंने कहा कि जेन जी को मशाल सौंपने का उद्देश्य केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक अभियान की शुरुआत है, जिसके माध्यम से युवाओं को श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े इतिहास और उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। उनका कहना था कि यदि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर से परिचित होगी तो वह समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकेगी।
व्यापक जनसहभागिता पर रहेगा विशेष जोर
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण की मांग को लेकर चल रहे प्रयासों को अब और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। इसके लिए केवल धार्मिक संगठनों तक सीमित रहने के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों को अभियान से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने बताया कि हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म से जुड़े युवाओं के साथ-साथ सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी, शिक्षक, इतिहासकार, पुरातत्वविद, चिकित्सक, सैनिक, किसान, महिला संगठन और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाने की योजना तैयार की जा रही है। उनका मानना है कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एक साझा उद्देश्य के लिए आगे आते हैं तो आंदोलन को अधिक मजबूती और व्यापक समर्थन मिलता है।
इतिहास और सांस्कृतिक चेतना पर दिया गया बल
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं को इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी को किसी भी विषय पर अपनी राय बनाने से पहले तथ्यों और ऐतिहासिक स्रोतों का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति, सभ्यता और धार्मिक स्थलों के इतिहास को समझें तथा अपनी विरासत के संरक्षण के प्रति सजग रहें।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले में विभिन्न स्तरों पर प्रयास जारी हैं और कानूनी प्रक्रिया भी अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रही है। साथ ही समाज के बीच जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को इस विषय की जानकारी दी जा रही है।
संत समाज ने भी किया समर्थन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संत गोविंदानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि जिस स्थल को भगवान श्रीकृष्ण का मूल गर्भगृह माना जाता है, वहां मंदिर निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है। उन्होंने कहा कि समाज के युवाओं को इस विषय की जानकारी होनी चाहिए और उन्हें अपने सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
संत फूलडोल जी महाराज ने समाज के विभिन्न वर्गों से इस अभियान में सहभागिता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक या धार्मिक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक होते हैं और समाज की एकजुटता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है।
वहीं संत बलराम बाबा ने कहा कि यदि समाज संगठित होकर अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़े तो सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से अभियान को मजबूत बनाने में सहयोग देने का आग्रह किया।
न्यायिक प्रक्रिया और जनजागरण दोनों पर फोकस
संत डॉ. आदित्यानंद जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि समाज अपनी आस्था और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रख रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित मामले में न्यायालय में आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा चुके हैं और आगे भी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि केवल न्यायालयी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि लोगों को विषय की जानकारी मिल सके और वे अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकें।
संत पंचगौड़ा दास जी महाराज ने भी युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्वों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ता
कार्यक्रम का संचालन संत रामविलास चतुर्वेदी जी और मांडवी राठौर ने संयुक्त रूप से किया। आयोजन में संत कृष्णमुरारी, संत श्यामानंद जी महाराज, कुंवर दामोदर सिंह, आरबी चौधरी, अशोक प्रताप सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, जितेंद्र सिंह, चंदन सिंह, डीडी चौहान एडवोकेट, रत्नेश मिश्रा, वीरेंद्र सिंह, पीटीआई धर्मेंद्र यादव, नीलम यादव, सच्ची, वंदना, अंजू, पूर्ति, आकांक्षा, निखिल और सम्राट सहित बड़ी संख्या में साधु-संत, युवा, महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आंदोलन के भविष्य को लेकर दिखा उत्साह
पूरे कार्यक्रम में एक बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े आंदोलन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संगठित प्रयास किए जा रहे हैं। युवाओं की सक्रिय उपस्थिति और उन्हें प्रतीकात्मक रूप से आंदोलन की जिम्मेदारी सौंपे जाने को भविष्य की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि यदि युवाओं की भागीदारी बढ़ती है तो आंदोलन को दीर्घकालिक आधार और व्यापक सामाजिक समर्थन प्राप्त हो सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने सांस्कृतिक जागरूकता, सामाजिक एकजुटता और जनसहभागिता को मजबूत बनाने के संकल्प के साथ अभियान को आगे बढ़ाने की बात कही।

























