18 महीने बाद 400 फुट टावर से उतरे गुरजीत सिंह खालसा

400 फुट टावर से उतरते गुरजीत सिंह खालसा, 560 दिन के आंदोलन के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन और रिपोर्टर नयन ज्योति के साथ न्यूज फीचर इमेज

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🎤नयन ज्योति की रिपोर्ट

पटियाल: पंजाब की धरती पर पिछले करीब सांझ से चल रहा एक अनोखा और बेहद विवादास्पद विरोध अंततः खत्म हो गया। गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के मामले में सख्त कानून की मांग को लेकर 400 फुट के लेवल के बीएसएनएल टावर पर डेट कर रहे कार्यकर्ता गुरजीत सिंह कालसा को शुक्रवार (24 अप्रैल) सुबह सुरक्षित नीचे भेज दिया गया। लगभग 560 दिन तक इस आंदोलन ने न केवल राज्य बल्कि राजधानी में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और अंततः सरकार को कानून बनाने के लिए प्रेरित किया।

यह विरोध प्रदर्शन 12 अक्टूबर 2024 को शुरू हुआ था, जबाब्यूनी जिले के समाना क्षेत्र के पास स्थित कैथेड्रल कालसा में एक टावर ने अपने इन्वेस्टमेंट लेकर को आवाज दी थी। उनका कहना था कि धार्मिक ग्रंथों के अपमान के मामलों में कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

🔵 560 दिन का संघर्ष उदाहरण

करीब 18 महीने और 12 दिन पहले टावर पर कोई सामान्य व्यक्ति के लिए संभव नहीं है, लेकिन गुरजीत सिंह कालसा ने यह असंभवता संभव कर दिखाई है। उन्होंने अपना आंदोलन जारी किया। यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे पंजाब में चर्चा का विषय बन गया और लोगों के बीच एक प्रतीक के रूप में सामने आया।

मीनार के ऊपर उन्होंने एक छोटा तिरपाल आश्रय बनवाया था, जहाँ वे रहते थे। उन्हें रस्सियों के माध्यम से भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी गयी थी। दैनिक प्रशिक्षकों को पूरा करने के लिए उन्हें अत्यंत अल्पविकसित समुदायों का सहारा लिया गया, जिसमें उनके संघर्ष के शिक्षक शामिल होते हैं।

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🟣प्रशासन की सुचिता से सुरक्षा सुनिश्चित

शुक्रवार की सुबह प्रशासन, पुलिस एवं राइफल विभाग की संयुक्त टीम ने विशेष क्रेन लिफ्ट की मदद से कालसा को नीचे उतारा। इस पूरे ऑपरेशन को बेहद सावधानी के साथ अंजाम दिया गया, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना न हो। अधिकारियों के अनुसार, यह एक पुरातन कार्य था, लेकिन टीमवर्क और तकनीकी तैयारी का कार्य आसानी से पूरा हो गया।

🟠नीचे उतरते ही गूंजे धार्मिक नारे

जैसे ही गुरजीत सिंह कालसा टावर से नीचे उतरते हैं, वहां मौजूद जीवंतता ने “सिख जयकारा” और “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के नारों से मोरना को गुंजायमान कर दिया। फ्रेश ने उन पर फूलों की पंखुड़ियां बाराकर का स्वागत किया। इसके बाद उन्हें एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी स्वास्थ्य जांच की गई।

🔴 कालसा बोले—यह जीत जनभावना की जीत

जमीन पर कदम रखते ही कैलासा ने भावुक होते हुए कहा कि “गुरु की कृपा से मैं 18 महीने और 12 दिन बाद सुरक्षित हो गया हूं। यह केवल मेरा नहीं है, बल्कि पूर्ण संगति की जीत है।” उन्होंने पंजाब सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत मान और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को धन्यवाद दिया और कहा कि सरकार ने उनकी भावना का सम्मान करते हुए कानून लागू किया है।

🔷सख्त कानून बनने के बाद ख़त्म हुआ आंदोलन

गुरजीत सिंह कालसा ने स्पष्ट किया कि उनका अपना आंदोलन समाप्त हो गया है क्योंकि पंजाब सरकार ने “जागृत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब उपदेश (संशोधन) अधिनियम, 2026” को अधिसूचित किया है। इस कानून में धार्मिक ग्रंथों के अपमान के मामलों में 25 लाख रुपये तक की सजा और 25 लाख रुपये तक की सजा का प्रावधान है, जो इसे देश के सबसे कड़े कानून में से एक बनाता है।

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विशेषज्ञ का मानना ​​है कि इस कानून के खिलाफ भविष्य में लागू होने वाली ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोका जा सकेगा और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों पर कड़ी कार्रवाई संभव होगी।

🟢पूरे पंजाब में बना रहा चर्चा का केंद्र

यह आंदोलन अपनी प्राकृतिक प्रकृति के कारण लगातार गणतंत्र में बना हुआ है। 400 फूटवॉल टावर का विरोध आपके लिए एक अनोखी घटना थी। कई सामाजिक धार्मिक, धार्मिक संप्रदायों और स्थानीय लोगों ने समय-समय पर कालसा का समर्थन किया, जिससे यह आंदोलन और भी मजबूत हुआ।

सोशल मीडिया पर भी यह लालची लगातार ट्रेंड कर रहा है और लोगों ने कैलासा के एडवेंचर और एडवेंचर की बातें बताई हैं। यह दस्तावेज़ केवल एक व्यक्ति के संकल्प का प्रतीक नहीं बना, बल्कि जनभावनाओं की शक्ति का भी उदाहरण बन गया।

❓ FAQ (अक्षर प्रश्न जाने वाले प्रश्न)

गुरजीत सिंह कालसा कितने समय तक टावर पर रहे? वह करीब 560 दिन तक यानी करीब 18 महीने और 12 दिन तक टावर पर रहे।
उन्होंने यह आंदोलन क्यों शुरू किया था? गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के मामलों में सख्त कानून की मांग को लेकर उन्होंने यह आंदोलन शुरू किया था।
उन्हें नीचे कैसे उतारा गया? प्रशासन ने उन्हें विशेष क्रेन उठाने वालों की मदद के लिए नीचे सुरक्षित रखा।
आंदोलन क्यों ख़त्म हुआ? अपना आंदोलन ख़त्म करने के बाद पंजाब सरकार ने क़ानून लागू करते हुए उसे ख़त्म कर दिया।
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