16 अक्टूबर 2026 9:23 अपराह्न

पति को नहीं ऐतराज, प्रेमी भी कबूल ! एक ही छत के नीचे रहेंगे तीनों, परिवार में मचा घमासान

पति, पत्नी और पत्नी के प्रेमी की साथ रहने के फैसले को दर्शाती फीचर इमेज

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सुनील शुक्ला की रिपोर्ट

सीतापुर। पति-पत्नी के रिश्ते में तीसरे व्यक्ति की एंट्री अक्सर विवाद, तनाव और टूटते परिवार की वजह बनती है। प्रेम-प्रसंग सामने आने पर जहां कई मामलों में पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ जाता है, वहीं उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से सामने आया एक मामला इन सबसे बिल्कुल अलग है। यहां एक महिला अपने पति के साथ-साथ अपने प्रेमी के साथ भी रहना चाहती है और हैरानी की बात यह है कि उसके पति को भी पत्नी के इस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है। पति ने पत्नी की इच्छा को स्वीकार करते हुए उसके प्रेमी को भी साथ रहने की सहमति दे दी है।

मामला इतना असामान्य है कि जब यह विवाद परिवार से निकलकर पुलिस तक पहुंचा तो पुलिस भी पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थिति समझने में जुट गई। महिला के दो बच्चे भी हैं और बताया जा रहा है कि उन्हें भी अपनी मां के फैसले पर आपत्ति नहीं है। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्य इस व्यवस्था के पक्ष में नहीं हैं। इसी विरोध के चलते मामला महमूदाबाद कोतवाली तक पहुंच गया।

पत्नी के प्रेम संबंध की जानकारी पति को हुई तो नहीं किया विरोध

जानकारी के मुताबिक, महमूदाबाद कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली एक महिला का एक अन्य युवक के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा था। कुछ समय बाद इस रिश्ते की जानकारी महिला के पति को भी हो गई। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी जानकारी सामने आने के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद होना स्वाभाविक माना जाता है, लेकिन इस मामले में पति का रवैया बिल्कुल अलग रहा।

बताया जा रहा है कि पति ने पत्नी के प्रेम संबंध का विरोध करने के बजाय उसके प्रेमी को स्वीकार करने का फैसला किया। पत्नी की इच्छा थी कि वह अपने पति के साथ-साथ उस युवक के साथ भी रहे, जिससे उसका प्रेम संबंध है। पति ने भी इस इच्छा पर सहमति जताई। इस तरह परिवार के सामने एक ऐसी स्थिति पैदा हो गई, जिसकी कल्पना आम तौर पर बेहद असामान्य मानी जाती है।

एक महिला, पति और प्रेमी के साथ रहने की जिद

महिला का कहना है कि वह अपने पति और प्रेमी दोनों के साथ रहना चाहती है। उसके अनुसार, वह किसी एक रिश्ते को छोड़ना नहीं चाहती। दूसरी ओर, पति भी पत्नी को छोड़ने के बजाय उसके प्रेमी के साथ रहने को तैयार बताया जा रहा है।

यही वजह है कि इस मामले में सबसे बड़ा विवाद पति-पत्नी के बीच नहीं, बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों के विरोध को लेकर खड़ा हुआ है। महिला के ससुराल पक्ष के कुछ लोग इस व्यवस्था के लिए तैयार नहीं हैं। उनका विरोध बढ़ा तो मामला पुलिस के पास पहुंच गया।

दो बच्चों का भी है मामला

इस पूरे घटनाक्रम में दंपती के दो बच्चों की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्चों को अपनी मां के इस फैसले पर कोई विशेष आपत्ति नहीं है। हालांकि, बच्चों की भावनाओं और भविष्य को लेकर परिवार के अन्य सदस्यों की चिंताएं अलग हो सकती हैं।

परिवार के भीतर मतभेद बढ़ने के बाद तीनों पक्षों को पुलिस के सामने अपनी बात रखने का मौका मिला। पुलिस ने स्थिति को समझने और आपसी सहमति बनाने का प्रयास किया, लेकिन कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आ सका।

पुलिस ने तीनों पक्षों को समझाने का किया प्रयास

मामला महमूदाबाद कोतवाली पहुंचने के बाद पुलिस ने संबंधित लोगों को बुलाकर बातचीत के जरिए स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया। पुलिस की कोशिश थी कि परिवार के लोग आपसी बातचीत से किसी निष्कर्ष पर पहुंचें और विवाद आगे न बढ़े।

हालांकि, तीनों पक्षों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। महिला अपने पति और प्रेमी दोनों के साथ रहने की इच्छा पर कायम बताई जा रही है, जबकि परिवार के अन्य सदस्य इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

पुलिस बोली—किसी को जबरन कहीं भेजने का अधिकार नहीं

मामले को लेकर इंस्पेक्टर भानु प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस की ओर से किसी पक्ष को जबरन कहीं भेजने का अधिकार नहीं है। संबंधित लोगों की स्थिति और परिस्थितियों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के इस रुख से यह स्पष्ट है कि केवल पारिवारिक असहमति के आधार पर किसी व्यक्ति को जबरन किसी स्थान पर भेजना पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों की इच्छा, सुरक्षा और कानून के दायरे को ध्यान में रखकर ही कोई कदम उठाया जा सकता है।

रिश्तों की बदलती तस्वीर पर भी खड़े हुए सवाल

सीतापुर का यह मामला सिर्फ एक असामान्य पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक रिश्तों और व्यक्तिगत पसंद को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है। विवाह के बाद किसी व्यक्ति का किसी अन्य से भावनात्मक संबंध बनना अक्सर परिवार और समाज के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है। लेकिन यहां स्थिति इसलिए अलग है क्योंकि महिला के पति ने ही पत्नी के प्रेमी को स्वीकार करने की बात कही है।

आम तौर पर पति-पत्नी के रिश्ते में तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी तनाव और विवाद का कारण बनती है। इस मामले में पति की सहमति ने पूरे घटनाक्रम को और भी असामान्य बना दिया है। अब सवाल यह है कि परिवार के भीतर यह व्यवस्था कितने समय तक कायम रह पाएगी और इसका बच्चों तथा परिवार के अन्य सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

कानूनी और सामाजिक पहलू भी महत्वपूर्ण

ऐसे मामलों में केवल आपसी सहमति ही पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। विवाह, पारिवारिक अधिकार, बच्चों की जिम्मेदारी और संबंधित लोगों की सुरक्षा जैसे कई कानूनी और सामाजिक पहलू जुड़े होते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे मामले की परिस्थितियों और संबंधित पक्षों के अधिकारों को समझना जरूरी है।

फिलहाल सीतापुर के महमूदाबाद क्षेत्र का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर महिला अपने पति और प्रेमी दोनों के साथ रहने की इच्छा जता रही है, दूसरी ओर उसका पति भी इसके लिए तैयार बताया जा रहा है। वहीं परिवार के अन्य सदस्य इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। पुलिस ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है।

आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष आपसी सहमति से क्या निर्णय लेते हैं और यदि विवाद बना रहता है तो कानून के दायरे में उसका समाधान किस तरह सामने आता है। फिलहाल इतना जरूर है कि सीतापुर का यह मामला पारंपरिक वैवाहिक रिश्तों से बिल्कुल अलग परिस्थितियों के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

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