दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
संभल। 24 नवंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा की जांच अब स्थानीय पुलिस की सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। पुलिस की जांच में कथित तौर पर हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड के रूप में सामने आए शारिक साठा के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। पुलिस के अनुसार साठा फिलहाल दुबई में रह रहा है और लंबे समय से भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर है।
पुलिस का कहना है कि साठा के खिलाफ संभल हिंसा से पहले ही आपराधिक मामलों का लंबा रिकॉर्ड मौजूद था। उसके खिलाफ करीब 55 से 60 मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भी विभिन्न आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। अब पुलिस और संबंधित एजेंसियों का प्रयास उसे विदेश से भारत वापस लाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।
इंटरपोल तक पहुंची संभल पुलिस की जांच
संभल हिंसा के बाद पुलिस ने मामले में शामिल संदिग्धों और आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच शुरू की थी। इसी क्रम में शारिक साठा का नाम जांच के दायरे में आया। पुलिस ने उसके खिलाफ उपलब्ध आपराधिक मामलों, फरारी, विदेश में मौजूदगी और कथित गतिविधियों से संबंधित जानकारी एकत्र कर उसका विस्तृत आपराधिक डोजियर तैयार किया।
पुलिस के मुताबिक यह डोजियर केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के माध्यम से इंटरपोल तक भेजा गया। इसके बाद भारतीय एजेंसियों और इंटरपोल के बीच आवश्यक औपचारिक प्रक्रिया तथा संचार के बाद शारिक साठा के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया।
इस कार्रवाई के बाद साठा की तलाश का दायरा काफी बढ़ गया है। अब उसकी तलाश केवल संभल या उत्तर प्रदेश पुलिस तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के स्तर पर भी उसकी पहचान और लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
अदालत पहले ही घोषित कर चुकी है भगोड़ा
पुलिस के अनुसार शारिक साठा के खिलाफ भारत में कानूनी कार्रवाई पहले से चल रही है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के मुताबिक न्यायालय की ओर से उसके खिलाफ धारा 82 और 83 के तहत कार्रवाई की जा चुकी है और उसे भगोड़ा घोषित किया गया है।
इसके साथ ही उसकी संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई भी की जा चुकी है। यानी भारत में उसके खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई के कई चरण पूरे हो चुके हैं। अब पुलिस की प्राथमिकता विदेश में उसकी मौजूदगी की पुष्टि करने, उसे कानून के दायरे में लाने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के जरिए भारत वापस लाने की है।
पुलिस उसके संभावित संपर्कों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विदेश में रहने के दौरान उसके किन लोगों से संपर्क रहे और क्या वह किसी आपराधिक गतिविधि या नेटवर्क को संचालित करने अथवा सहयोग देने में सक्रिय रहा।
55 से 60 मुकदमों का बताया जा रहा है आपराधिक रिकॉर्ड
शारिक साठा के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या भी पुलिस जांच में महत्वपूर्ण बिंदु बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार संभल हिंसा से पहले ही उसके खिलाफ लगभग 55 से 60 मुकदमे दर्ज थे। यह मामले केवल संभल तक सीमित नहीं बताए जा रहे, बल्कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर से जुड़े होने की बात भी पुलिस की ओर से कही गई है।
इतने बड़े आपराधिक रिकॉर्ड के कारण जांच एजेंसियों ने संभल हिंसा के मामले में उसकी भूमिका को गंभीरता से लिया। पुलिस का दावा है कि हिंसा से जुड़े घटनाक्रम और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल के दौरान साठा का नाम कथित मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आया।
हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया में प्रमाणित होना आवश्यक है। पुलिस की जांच और अदालत के अंतिम निर्णय के बीच यही कानूनी अंतर महत्वपूर्ण रहता है। इसलिए साठा से संबंधित आरोपों को फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियों के दावों के रूप में देखा जा रहा है।
फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश जाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक शारिक साठा भारत से फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश गया। फिलहाल उसके दुबई में होने की जानकारी पुलिस के पास बताई जा रही है। विदेश में मौजूद होने के कारण स्थानीय पुलिस के लिए उसकी गिरफ्तारी सीधे तौर पर संभव नहीं थी। ऐसे में भारतीय एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग का रास्ता अपनाया।
रेड कॉर्नर नोटिस इसी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जारी होने के बाद इंटरपोल के सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संबंधित व्यक्ति के बारे में सूचना मिलती है और उसकी पहचान, लोकेशन तथा गिरफ्तारी से जुड़ी कार्रवाई के लिए सहयोग का आधार तैयार होता है।
हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि रेड कॉर्नर नोटिस अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता। इसका उद्देश्य किसी वांछित व्यक्ति का पता लगाने और संबंधित देश के कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट जारी करना है। किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी, हिरासत या भारत प्रत्यर्पण का फैसला संबंधित देश के कानून और वहां की न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होता है।
दुबई में मौजूदगी ने बढ़ाई चुनौती
शारिक साठा के दुबई में होने की जानकारी के बाद भारतीय एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे भारत वापस लाने की है। इसके लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि संबंधित देशों और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक होगा।
रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अब यदि संबंधित एजेंसियां उसकी मौजूदगी की पुष्टि करती हैं तो आगे की कार्रवाई स्थानीय कानूनों और भारत की ओर से अपनाई जाने वाली प्रत्यर्पण प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ सकती है।
यही वजह है कि संभल पुलिस की कार्रवाई अब केवल गिरफ्तारी की सामान्य प्रक्रिया नहीं रह गई है। मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, दस्तावेजी साक्ष्य, आरोपी की पहचान और उसके विदेश स्थित ठिकाने से जुड़े कानूनी पहलुओं की भी अहम भूमिका होगी।
24 नवंबर 2024 को सर्वे के दौरान बिगड़े थे हालात
संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर तनाव पैदा हुआ था। सर्वे की कार्रवाई अदालत के आदेश के तहत की जा रही थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती चली गई।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की स्थिति बनी और हिंसा भड़क गई। पथराव तथा अन्य घटनाओं के बीच हालात काफी बिगड़ गए। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।
घटना के बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर जांच शुरू की। वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की और हिंसा के पीछे कथित साजिश तथा भूमिका की जांच शुरू की।
अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज होगी कार्रवाई
संभल हिंसा मामले में शारिक साठा के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी होना जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भारतीय एजेंसियों को विदेश में मौजूद कथित आरोपी तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का औपचारिक माध्यम मिलता है।
पुलिस के सामने अब दो प्रमुख लक्ष्य हैं—पहला, विदेश में मौजूद साठा की सही लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी जुटाना और दूसरा, कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे भारत वापस लाने का रास्ता तैयार करना।
इसके साथ ही जांच एजेंसियां उसके पुराने आपराधिक मामलों और संभल हिंसा से जुड़े आरोपों के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं। उसके संपर्कों और नेटवर्क की जांच भी आगे बढ़ाई जा रही है।
संभल हिंसा की जांच में अंतरराष्ट्रीय स्तर की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि पुलिस मामले से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण पहलू को कानूनी दायरे में लाने का प्रयास कर रही है। अब देखना होगा कि रेड कॉर्नर नोटिस के बाद दुबई में मौजूद बताए जा रहे शारिक साठा तक भारतीय एजेंसियां कब पहुंचती हैं और उसे भारत लाने की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

























