कांपता ओवरब्रिज बना खतरे की घंटी, हर गुजरते वाहन के साथ सहम जाते हैं लोग
38 साल पुराना बड़गांव रेलवे ओवरब्रिज जर्जर, स्थानीय लोगों ने उठाई नए पुल की मांग
चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
गोंडा शहर का बड़गांव रेलवे ओवरब्रिज अब लोगों के लिए सुविधा कम और खतरे का कारण अधिक बनता जा रहा है। करीब चार दशक पहले तैयार हुआ यह पुल अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि जब भी कोई भारी ट्रक या बस पुल से गुजरती है, पूरा पुल कंपन करता महसूस होता है। पुल पर सफर करने वाले लोग दहशत में आ जाते हैं और आसपास रहने वाले व्यापारियों की सांसें थम जाती हैं। इसके बावजूद हजारों लोगों की मजबूरी है कि उन्हें रोज इसी पुल से होकर गुजरना पड़ता है, क्योंकि यह मार्ग गोंडा को बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और नेपाल सीमा तक जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है।
हजारों लोगों की जीवनरेखा बना हुआ है यह पुल
बड़गांव रेलवे ओवरब्रिज गोंडा शहर की यातायात व्यवस्था का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है। बलरामपुर, बढ़नी, तुलसीपुर और नेपाल की ओर जाने वाले वाहनों के लिए यह मुख्य संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन इस पुल से होकर गुजरते हैं। सुबह से देर रात तक पुल पर यातायात का भारी दबाव बना रहता है। खासकर मालवाहक ट्रक, रोडवेज बसें और निजी वाहन लगातार गुजरते रहते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की स्थिति अब इतनी खराब हो चुकी है कि हर गुजरते भारी वाहन के साथ कंपन साफ महसूस होता है। कई बार ऐसा लगता है मानो पुल किसी बड़े हादसे का संकेत दे रहा हो। पुल से गुजरते समय बाइक और साइकिल सवार खास तौर पर भयभीत रहते हैं।
38 साल पुराना पुल अब जवाब देने लगा
जानकारी के अनुसार बड़गांव रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण वर्ष 1987 से 1990 के बीच कराया गया था। उस समय यह पुल शहर की बड़ी उपलब्धि माना गया था। पुल का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने किया था। हालांकि हैरानी की बात यह है कि इतने वर्षों बाद भी इस पुल का औपचारिक उद्घाटन नहीं हो पाया।
करीब 38 वर्ष पुराना यह पुल अब अपनी उम्र पूरी करता दिखाई दे रहा है। लगातार भारी वाहनों का दबाव और समय पर व्यापक मरम्मत न होने के कारण इसकी संरचना कमजोर पड़ती जा रही है। जगह-जगह दरारें और टूट-फूट दिखाई देने लगी है। कई हिस्सों में लोहे के ज्वाइंटर खुल चुके हैं, जिससे वाहन गुजरते समय तेज झटके लगते हैं।
भारी वाहन गुजरते ही कांपने लगता है पुल
पुल के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि जब भी कोई ओवरलोड ट्रक या भारी बस पुल पर चढ़ती है तो पूरा ढांचा हिलने लगता है। इससे ऐसा महसूस होता है जैसे पुल किसी भी समय बड़ा हादसा दे सकता है। पुल से गुजरने वाले लोग अक्सर डर के कारण अपनी गति धीमी कर लेते हैं।
स्थानीय व्यापारी बताते हैं कि कंपन के दौरान उनकी दुकानों तक में झटके महसूस होते हैं। कई दुकानदारों ने बताया कि रात के समय भारी वाहनों की आवाज और पुल का कंपन उन्हें चिंता में डाल देता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
ज्वाइंटर टूटने से वाहन चालकों को हो रही परेशानी
ओवरब्रिज पर लगे कई ज्वाइंटर अब खराब हो चुके हैं। इन ज्वाइंटरों के उखड़ने के कारण पुल पर चलते समय वाहनों को तेज झटके लगते हैं। खासकर बाइक सवार और छोटे वाहन चालक असंतुलित हो जाते हैं। बारिश के दौरान स्थिति और खतरनाक हो जाती है।
कुछ स्थानों पर विभाग की ओर से अस्थायी मरम्मत कर दी गई है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह केवल खानापूर्ति साबित हो रही है। पुल की मूल समस्या जस की तस बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग लंबे समय से केवल अस्थायी उपायों के सहारे काम चला रहा है।
पहले भी हो चुकी हैं हादसे जैसी घटनाएं
स्थानीय लोगों के अनुसार इस पुल की रेलिंग कई बार भारी वाहनों की टक्कर से टूट चुकी है। कुछ घटनाओं में वाहन नीचे गिरने तक की नौबत आ चुकी है। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटनाएं देर रात हुईं और उस समय पुल के नीचे भीड़ नहीं थी। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
इन घटनाओं के बाद आसपास रहने वाले लोगों का डर और बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि यदि दिन के समय ऐसा हादसा हुआ तो भारी जनहानि हो सकती है। पुल के नीचे दुकानों और आवागमन की वजह से हर समय भीड़ बनी रहती है।
खराब स्ट्रीट लाइटें बढ़ा रहीं खतरा
ओवरब्रिज पर लगी कई स्ट्रीट लाइटें भी लंबे समय से खराब पड़ी हैं। शाम होते ही पुल के कई हिस्सों में अंधेरा छा जाता है। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे के कारण दुर्घटना की आशंका और अधिक बढ़ जाती है।
रात में सफर करने वाले लोगों का कहना है कि पुल की जर्जर स्थिति और अंधेरा दोनों मिलकर इसे और खतरनाक बना देते हैं। कई बार वाहन चालक गड्ढों और टूटे हिस्सों को समय पर नहीं देख पाते, जिससे दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।
व्यापारियों और स्थानीय लोगों में बढ़ रही चिंता
पुल के आसपास दुकान चलाने वाले व्यापारी लगातार भय के साए में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिनभर पुल से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण उन्हें हर समय किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है। कंपन के दौरान कई दुकानदार अपनी दुकानों से बाहर निकल आते हैं।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल की मरम्मत या नए पुल के निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
नए ओवरब्रिज की मांग तेज
बढ़ते खतरे को देखते हुए अब स्थानीय लोगों ने पुराने पुल की जगह नया रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग तेज कर दी है। नागरिकों का कहना है कि यह पुल अब वर्तमान यातायात दबाव झेलने की स्थिति में नहीं बचा है। इसलिए सरकार को जल्द सर्वे कराकर नया पुल निर्माण शुरू कराना चाहिए।
लोगों का कहना है कि गोंडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में मजबूत और सुरक्षित यातायात व्यवस्था बेहद जरूरी है। यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे के बाद प्रशासन पर सवाल खड़े होंगे।
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज नहीं करेगा। लोगों का कहना है कि पुल की तकनीकी जांच कराकर उसकी वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में काम शुरू होना चाहिए।
बड़गांव रेलवे ओवरब्रिज आज हजारों लोगों की मजबूरी जरूर बना हुआ है, लेकिन इसकी बदहाल हालत हर दिन एक नए खतरे का संकेत भी दे रही है। ऐसे में समय रहते प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।








