गाजी मियां दरगाह में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, मुख्यमंत्री से एसआईटी जांच की मांग
बहराइच स्थित गाजी मियां दरगाह एक बार फिर चर्चा में है। दरगाह में करोड़ों रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एसआईटी जांच कराने की मांग की है। वहीं प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने जिलाधिकारी से 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। दरगाह की आय, संपत्तियों, चढ़ावे, दुकानों और ठेकों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों ने इस मामले को प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। गाजी मियां दरगाह वित्तीय अनियमितता मामला आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
बहराइच। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित प्रसिद्ध गाजी मियां दरगाह भी विवादों के केंद्र में आ गई है। दरगाह की आय, संपत्तियों और प्रबंधन से जुड़े मामलों में करोड़ों रुपये के कथित गबन तथा वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर पूरे मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दरगाह से जुड़े आर्थिक मामलों में लंबे समय से गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
प्रभारी मंत्री ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए बहराइच जिले के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी को निर्देश देते हुए कहा है कि दरगाह से संबंधित सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
प्रभारी मंत्री के अनुसार उन्हें लगातार ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं जिनमें दरगाह की आय और व्यय को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि चढ़ावे, दुकानों के किराए, ठेकों, मेलों और अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाली धनराशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि सभी तथ्यों का परीक्षण करते हुए 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सके।
करोड़ों की आय पर उठे सवाल
भाजपा नेता कुंवर बासित अली ने अपने पत्र में कहा है कि गाजी मियां दरगाह उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण वक्फ संपत्तियों में शामिल है। वक्फ संख्या-19 के अंतर्गत आने वाली इस दरगाह के पास विशाल संपत्ति, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य आय के स्रोत मौजूद हैं।
उन्होंने दावा किया कि दरगाह को हर वर्ष चढ़ावे, धार्मिक आयोजनों, दुकानों के किराए और अन्य गतिविधियों से बड़ी मात्रा में आय प्राप्त होती है। इसके बावजूद आय और खर्च के आंकड़ों में पारदर्शिता दिखाई नहीं देती। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि प्राप्त होने वाली धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
बासित अली का कहना है कि यदि सभी वित्तीय अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग दोहराई है।
पूर्व मंत्री के परिवार पर लगाए आरोप
मामले में राजनीतिक रंग भी देखने को मिल रहा है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री वकार शाह के परिवार से जुड़े लोगों का लंबे समय से दरगाह प्रबंधन की विभिन्न समितियों पर प्रभाव रहा है।
उन्होंने दावा किया कि पिछले लगभग दो दशकों के दौरान दरगाह के वित्तीय संचालन में कई अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बासित अली ने कहा कि इतने लंबे समय से प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दरगाह की आय और संपत्तियों का संचालन नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं।
एसआईटी जांच की मांग तेज
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है। उनका कहना है कि सामान्य प्रशासनिक जांच से अधिक प्रभावी और निष्पक्ष परिणाम एसआईटी जांच से सामने आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दरगाह जैसी धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की आय का उपयोग गरीबों की सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण के कार्यों में होना चाहिए। यदि कहीं वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उनका यह भी कहना है कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना किसी एक समुदाय का नहीं बल्कि सार्वजनिक हित का विषय है। इसलिए सभी धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के वित्तीय मामलों में समान रूप से जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रशासनिक जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल जिला प्रशासन को सभी शिकायतों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता वास्तव में हुई है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान दरगाह की आय, व्यय, संपत्तियों, ठेकों और अन्य वित्तीय अभिलेखों का परीक्षण किया जा सकता है। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या है गाजी मियां दरगाह का धार्मिक महत्व?
बहराइच शहर के बैंकुंठा क्षेत्र में स्थित हजरत सैयद सालार मसूद गाजी, जिन्हें श्रद्धालु गाजी मियां के नाम से जानते हैं, की दरगाह उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिनी जाती है।
यह दरगाह हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र मानी जाती है। हर वर्ष यहां आयोजित होने वाले प्रसिद्ध जेठ मेले में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा देश के अन्य राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
दरगाह परिसर में धार्मिक स्थलों के अलावा पुस्तकालय, मस्जिद और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित होते हैं। यही कारण है कि यहां नियमित रूप से पर्याप्त आर्थिक गतिविधियां होती हैं और विभिन्न स्रोतों से आय प्राप्त होती है।
पिछले वर्ष नहीं लगा था वार्षिक मेला
गाजी मियां दरगाह में आयोजित होने वाला वार्षिक मेला क्षेत्र की पहचान माना जाता है। हालांकि पिछले वर्ष प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दी थी।
इसके बावजूद दरगाह की धार्मिक और सामाजिक महत्ता बनी हुई है। अब वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद यह मामला प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
बहराइच की ऐतिहासिक और प्रसिद्ध गाजी मियां दरगाह में कथित वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के गबन के आरोपों ने प्रशासन और राजनीति दोनों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। भाजपा नेता द्वारा एसआईटी जांच की मांग और प्रभारी मंत्री द्वारा 15 दिनों में रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या मामले में आगे कोई बड़ी कार्रवाई होती है।







