संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट जिले में तंबाकू मिश्रित गुटखे की बिक्री को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अस्पतालों और विद्यालयों के आसपास ऐसी दुकानों का संचालन जारी है, जहां तंबाकू मिश्रित गुटखा और अन्य प्रतिबंधित अथवा नियमों के दायरे में आने वाले तंबाकू उत्पाद खुले तौर पर बेचे जा रहे हैं। इससे न केवल नियमों के पालन पर सवाल उठ रहा है, बल्कि बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के मुताबिक जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक तंबाकू मिश्रित गुटखे की बिक्री का नेटवर्क लगातार दिखाई दे रहा है। खास तौर पर शिक्षण संस्थानों और चिकित्सा संस्थानों के आसपास इस प्रकार के उत्पादों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे स्थानों पर तंबाकू उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अपेक्षित कार्रवाई जमीन पर पर्याप्त रूप से नजर नहीं आ रही।
प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद नहीं थम रही बिक्री
जिले में प्रशासन की ओर से समय-समय पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और नियमों के अनुपालन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद यदि अस्पतालों और विद्यालयों के आसपास तंबाकू मिश्रित गुटखा खुलेआम उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आती हैं तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था के लिए गंभीर प्रश्न है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी नियमित निरीक्षण किस स्तर पर कर रहे हैं। यदि निरीक्षण हो रहे हैं तो नियमों का उल्लंघन करने वाली दुकानों पर कितनी कार्रवाई हुई और यदि कार्रवाई हुई है तो उसके परिणाम क्या रहे, यह जानकारी सार्वजनिक होना भी जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अभियान चलाकर कुछ दुकानों की जांच कर देना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि अस्पतालों, विद्यालयों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों के आसपास लगातार निगरानी रखी जाए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाए।
विद्यालयों के आसपास तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता चिंता का विषय
विद्यालयों के आसपास तंबाकू मिश्रित गुटखा अथवा अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री का मामला विशेष रूप से संवेदनशील है। विद्यार्थी उम्र के ऐसे पड़ाव पर होते हैं, जहां आसपास उपलब्ध वस्तुओं और वातावरण का उनके व्यवहार पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री को लेकर नियमों का कड़ाई से पालन कराना आवश्यक माना जाता है।
यदि किसी विद्यालय के आसपास ऐसी दुकानें संचालित हो रही हैं जहां तंबाकू मिश्रित गुटखा आसानी से उपलब्ध है, तो संबंधित विभागों को इसकी जांच करनी चाहिए। दुकानदारों के लाइसेंस, उत्पादों की वैधता, पैकेजिंग, बिक्री संबंधी नियम और निर्धारित दूरी से जुड़े प्रावधानों की जांच के साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं प्रतिबंधित तरीके से तंबाकू उत्पादों की बिक्री तो नहीं हो रही।
स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि जब प्रशासनिक स्तर पर नियम मौजूद हैं और उनका उल्लंघन रोकने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों की है, तो फिर ऐसे मामले बार-बार सामने क्यों आते हैं।
अस्पतालों के आसपास भी बिक्री की शिकायत
चिकित्सा संस्थानों का उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे स्थानों के आसपास तंबाकू मिश्रित उत्पादों की बिक्री की शिकायतें सामने आना अपने आप में चिंता का विषय है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के बीच यदि तंबाकू उत्पाद आसानी से उपलब्ध हों तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के संदेश पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों के आसपास दुकानों की नियमित जांच की जाए और यदि किसी दुकान पर नियमों के विपरीत तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं तो तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी शिकायतों की जांच के लिए कौन-सी व्यवस्था लागू है और शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की समयसीमा क्या है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
तंबाकू मिश्रित गुटखे की बिक्री को लेकर सबसे बड़ा सवाल खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिले के कर्वी क्षेत्र के साथ-साथ मऊ, मानिकपुर और राजापुर क्षेत्र में भी कई स्थानों पर गुटखा बिक्री का कारोबार दिखाई देता है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच आवश्यक है। किसी अधिकारी या दुकानदार पर मिलीभगत का आरोप बिना जांच के प्रमाणित नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो उनका संज्ञान लेकर विभागीय स्तर पर निरीक्षण और सत्यापन कराया जाना जरूरी है।
प्रशासन के सामने यह भी चुनौती है कि कार्रवाई केवल कागजी अभियान तक सीमित न रह जाए। निरीक्षण की वास्तविक स्थिति, जब्ती, जुर्माना, नमूना जांच और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण सामने आने से निगरानी व्यवस्था की पारदर्शिता बढ़ सकती है।
पॉलीथिन के इस्तेमाल पर भी सवाल
तंबाकू मिश्रित गुटखे के साथ-साथ पॉलीथिन के इस्तेमाल को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। प्रतिबंध और पर्यावरणीय नियमों के बावजूद कई दुकानों पर पॉलीथिन के इस्तेमाल की शिकायत है। सब्जी दुकानों से लेकर चाट, समोसा और अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानों तक ग्राहकों को पॉलीथिन में सामग्री दिए जाने की बात कही जा रही है।
पॉलीथिन के अनियंत्रित उपयोग से नालियों के जाम होने, जल निकासी प्रभावित होने और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन से जुड़े विभागों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा, पैकेजिंग और प्रतिबंधित सामग्री के उपयोग जैसे बिंदुओं की भी जांच की जा सकती है। इससे एक ही निरीक्षण प्रक्रिया में कई तरह के नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
गांवों तक पहुंचा कारोबार, निगरानी की जरूरत
तंबाकू मिश्रित गुटखे की बिक्री का मुद्दा केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं बताया जा रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी छोटे दुकानदारों के माध्यम से ऐसे उत्पादों की उपलब्धता की शिकायतें सामने आती रही हैं। गांवों और कस्बों में निगरानी तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर होने पर नियमों के उल्लंघन की संभावना बढ़ सकती है।
इसलिए प्रशासन को केवल प्रमुख बाजारों तक सीमित रहने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में भी नियमित निरीक्षण की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। यदि किसी क्षेत्र में बार-बार शिकायतें मिलती हैं तो वहां विशेष जांच अभियान चलाकर स्थिति की वास्तविकता सामने लाई जा सकती है।
कार्रवाई के साथ जागरूकता भी जरूरी
तंबाकू नियंत्रण केवल जुर्माना या जब्ती तक सीमित विषय नहीं है। इसके लिए enforcement के साथ awareness भी जरूरी है। विद्यालयों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास लोगों को तंबाकू सेवन के नुकसान तथा नियमों की जानकारी देने वाले जागरूकता अभियान चलाए जा सकते हैं।
दुकानदारों को भी स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि किन उत्पादों की बिक्री पर कौन-से नियम लागू हैं और उल्लंघन की स्थिति में क्या कार्रवाई हो सकती है। वहीं नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की सरल व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि नियमों के उल्लंघन की सूचना संबंधित अधिकारियों तक आसानी से पहुंच सके।
बड़ा सवाल—कब होगी प्रभावी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद यदि अस्पतालों और विद्यालयों के आसपास तंबाकू मिश्रित गुटखे की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो संबंधित विभाग इन मामलों की कितनी गंभीरता से जांच करेगा।
क्या खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में व्यापक निरीक्षण करेगी? क्या अस्पतालों और विद्यालयों के आसपास संचालित दुकानों की विशेष जांच होगी? क्या पॉलीथिन के इस्तेमाल पर भी प्रभावी कार्रवाई की जाएगी? और सबसे महत्वपूर्ण, यदि जांच में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निर्धारित प्रावधानों के तहत कार्रवाई कब होगी?
इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच और कार्रवाई से ही सामने आएगा। फिलहाल स्थानीय नागरिकों की मांग है कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कर्वी समेत मऊ, मानिकपुर और राजापुर क्षेत्रों में नियमित जांच अभियान चलाया जाए। साथ ही अस्पतालों और विद्यालयों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए।

























