20 अक्टूबर 2026 5:08 पूर्वाह्न

प्रशासनिक संवेदनहीनता की हद : मकान ढहा, खुले आसमान के नीचे संगीता का परिवार ; प्रशासन बेखबर

चित्रकूट में मकान गिरने के बाद पीड़ित परिवार और ध्वस्त आशियाने के साथ रिपोर्टर संजय सिंह राणा

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

The specified slider id does not exist.

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

राजापुर/चित्रकूट। चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील क्षेत्र के ग्राम सुरवल में सरकारी तंत्र की कथित लापरवाही और प्रशासनिक संवेदनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है। भारी जलभराव के कारण अत्यंत गरीब संगीता देवी पत्नी गरीब दास का आवासीय मकान ढहकर पूरी तरह जमींदोज हो गया। घर के मलबे के साथ परिवार की वर्षों की मेहनत और सुरक्षित छत का सहारा भी खत्म हो गया। अब पीड़ित परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि मासूम बच्चों और परिजनों के साथ वह जाए तो जाए कहां?

मकान गिरने के बाद संगीता देवी, उनके पति गरीब दास, पुत्र संजय, संदीप और कुलदीप, पुत्री प्रियंका, बहुएं तथा तीन मासूम पोते दिव्यांश, दीवांश और अंश कथित तौर पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि अपने स्तर से नया मकान बनाना तो दूर, तत्काल रहने के लिए सुरक्षित छत की व्यवस्था करना भी संभव नहीं है।

घर गिरने के बाद शुरू हुई सरकारी दफ्तरों की दौड़

संगीता देवी के मुताबिक, मकान गिरने के तुरंत बाद उन्होंने थाना सरधुआ में लिखित प्रार्थना पत्र देकर मदद की गुहार लगाई। परिवार को बताया गया कि संबंधित खंड विकास अधिकारी और लेखपाल को मामले की जानकारी दे दी गई है तथा मौके पर जाकर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा गया है।

लेकिन पीड़िता का आरोप है कि शिकायत के बावजूद मौके पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद वह उपजिलाधिकारी राजापुर के कार्यालय पहुंचीं। यहां भी उन्हें राहत की तत्काल उम्मीद थी, क्योंकि संबंधित क्षेत्रीय लेखपाल की मौजूदगी होने की बात पीड़िता ने बताई। बावजूद इसके, उनका दावा है कि लेखपाल ने मौके पर पहुंचकर मकान गिरने की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण नहीं किया।

यही सवाल अब व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है कि जब एक गरीब परिवार का घर बारिश और जलभराव के बीच गिर चुका है, परिवार के पास रहने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है और शिकायत प्रशासन तक पहुंच चुकी है, तो मौके का निरीक्षण करने में आखिर इतनी देरी क्यों?

मौके पर पहुंचने के बजाय फोन पर वीडियो मांगने का आरोप

पीड़ित संगीता देवी ने संबंधित लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लेखपाल मौके पर जाकर स्थिति देखने के बजाय फोन पर उनसे फोटो और वीडियो भेजने के लिए कहते रहे। पीड़िता के अनुसार, उन्हें यह तक स्पष्ट नहीं बताया गया कि उनकी शिकायत पर अब तक क्या रिपोर्ट तैयार की गई है और आगे क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।

यदि पीड़िता के आरोप सही हैं तो यह महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया का मामला नहीं, बल्कि आपदा जैसी स्थिति में फंसे परिवार तक सरकारी सहायता पहुंचाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है। स्थलीय निरीक्षण के बिना केवल मोबाइल पर भेजे गए फोटो और वीडियो के आधार पर रिपोर्ट तैयार करना क्या वास्तव में पीड़ित परिवार की समस्या का समाधान कर सकता है, यह जांच का विषय है।

बीडीओ कार्यालय से भी नहीं मिली राहत

मामला यहीं नहीं रुका। संगीता देवी ने ब्लॉक पहाड़ी के खंड विकास अधिकारी से भी मदद की गुहार लगाई। पीड़िता के अनुसार, वहां से उन्हें पहले एसडीएम से आदेश लेकर आने की बात कही गई। परिवार का आरोप है कि एक अधिकारी दूसरे अधिकारी के पास भेजता रहा, जबकि मकान गिरने के बाद उन्हें तत्काल राहत और सुरक्षित आश्रय की जरूरत थी।

ऐसे में सवाल उठता है कि आपदा या आवासीय क्षति के मामलों में गरीब और निराश्रित परिवार के लिए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया इतनी जटिल क्यों है? क्या पीड़ित व्यक्ति को राहत पाने के लिए थाना, लेखपाल, ब्लॉक और तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाते रहना ही उसकी नियति है?

1076 पर शिकायत के बाद भी मामला ‘पेंडिंग’

जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो संगीता देवी ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर भी शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का कहना है कि उन्हें फोन पर भरोसा दिलाया गया कि उनकी समस्या पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जब उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल अथवा ऐप पर शिकायत की स्थिति देखी तो मामला अभी भी ‘पेंडिंग’ दिखाई दे रहा है।

पीड़ित परिवार के लिए यह स्थिति इसलिए और चिंताजनक है क्योंकि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही कि प्रकरण किस अधिकारी के स्तर पर लंबित है और कब तक कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।

कॉल रिकॉर्डिंग को पीड़िता ने बताया अहम सबूत

संगीता देवी का दावा है कि इस पूरे मामले से संबंधित अधिकारियों के साथ हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग उनके पास सुरक्षित है। उनका कहना है कि थाना सरधुआ से संबंधित पुलिस अधिकारी अभिषेक प्रताप सिंह, क्षेत्रीय लेखपाल तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद है।

हालांकि इन रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पीड़िता का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वह इन डिजिटल साक्ष्यों को संबंधित अधिकारियों और मीडिया के समक्ष प्रस्तुत कर सकती हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए भी उचित होगा कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने रखी जाए।

सवाल सिर्फ एक मकान का नहीं, सरकारी संवेदना का है

संगीता देवी का मकान गिरना केवल एक परिवार के घर की तबाही नहीं है। यह सवाल उस व्यवस्था से भी है, जो आपदा की स्थिति में गरीब परिवारों तक सरकारी राहत पहुंचाने का दावा करती है। यदि किसी परिवार के पास रहने के लिए छत नहीं है और उसके छोटे बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, तो ऐसे मामले में प्रशासन की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए—कागजी कार्रवाई या तत्काल राहत?

सरकारी योजनाओं के तहत गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की योजनाएं लंबे समय से संचालित हैं। आपदा की स्थिति में राहत और पुनर्वास की व्यवस्था भी प्रशासनिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में पीड़ित परिवार की पात्रता की जांच, मकान गिरने की वास्तविक स्थिति का स्थलीय सत्यापन और नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री से कार्रवाई और राहत की गुहार

पीड़ित संगीता देवी और उनके परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। परिवार की मांग है कि मकान गिरने की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

परिवार ने आपदा राहत के तहत आर्थिक सहायता तथा पात्रता के अनुसार सरकारी आवास उपलब्ध कराने की भी मांग की है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब तक स्थायी आवास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक परिवार के लिए सुरक्षित अस्थायी आश्रय और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए।

प्रशासन के सामने अब सीधी चुनौती

चित्रकूट प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुरवल गांव की संगीता देवी के परिवार को राहत कब मिलेगी? क्या शिकायतें केवल ऑनलाइन पोर्टल पर ‘पेंडिंग’ रहेंगी या कोई अधिकारी वास्तव में मौके पर पहुंचकर स्थिति देखेगा? क्या मकान गिरने की वास्तविकता का स्थलीय सत्यापन होगा? क्या पीड़ित परिवार की आर्थिक और आवासीय स्थिति की जांच कर उसे नियमानुसार सरकारी सहायता मिलेगी?

इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक कार्रवाई से ही मिलेंगे। फिलहाल एक गरीब परिवार अपने टूटे हुए आशियाने के मलबे के बीच मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। मासूम बच्चों के सिर पर छत नहीं है और शिकायतों की फाइल सरकारी प्रक्रिया में लंबित बताई जा रही है। ऐसे में प्रशासनिक संवेदनशीलता की असली परीक्षा यही है कि कागजों से निकलकर राहत जमीन पर कब पहुंचती है।

नोट: इस रिपोर्ट में पीड़िता और उनके परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को उनके कथन के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें