बारबंकी

पैदल चलकर कचहरी पहुंचे न्यायाधीश, ऊर्जा संरक्षण का दिया बड़ा संदेश

पेट्रोल-बिजली बचाने की अनोखी पहल ने लोगों को किया प्रेरित

अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट

बाराबंकी में सोमवार को जिला न्यायालय परिसर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों और न्यायालयों में अधिकारी सरकारी गाड़ियों या निजी वाहनों से पहुंचते हैं, लेकिन इस बार दृश्य बिल्कुल अलग था। जनपद न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव सहित जिला न्यायालय के सभी न्यायाधीश अपने-अपने आवास से पैदल चलकर कचहरी पहुंचे। इस पहल ने न सिर्फ लोगों को चौंकाया बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर एक सकारात्मक संदेश भी दिया।

सुबह जब न्यायाधीशों का समूह पैदल कचहरी की ओर बढ़ता दिखाई दिया तो राहगीर भी कुछ पल के लिए रुक गए। लोगों को पहले लगा कि शायद कोई विशेष आयोजन या कार्यक्रम है, लेकिन बाद में जब इस पहल का उद्देश्य सामने आया तो हर कोई इसकी सराहना करता नजर आया। न्यायाधीशों का कहना था कि यह कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं है बल्कि समाज को जागरूक करने की एक गंभीर कोशिश है।

दरअसल, विश्व स्तर पर लगातार बढ़ते पेट्रोलियम संकट, ऊर्जा की बढ़ती मांग और बिजली की अत्यधिक खपत ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल रखा है। भारत जैसे विशाल देश में भी पेट्रोल-डीजल की खपत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार की ओर से समय-समय पर ऊर्जा बचत को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते रहे हैं। इसी क्रम में बाराबंकी जिला न्यायालय के न्यायाधीशों ने यह तय किया कि छोटी दूरी तय करने के लिए वाहनों का प्रयोग कम किया जाए और पैदल चलने की आदत को बढ़ावा दिया जाए।

जनपद न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव ने बताया कि यह निर्णय न्यायालय परिवार द्वारा सामूहिक रूप से लिया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार देशवासियों से पेट्रोल और ऊर्जा की बचत करने की अपील करते रहे हैं। उसी संदेश को व्यवहार में उतारने के लिए न्यायालय के न्यायाधीशों ने पैदल कचहरी पहुंचने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया जिस तरह ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, उसमें हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह ऊर्जा बचत के प्रति गंभीर हो। यदि छोटी दूरी के लिए लोग वाहन का उपयोग कम करें तो इससे पेट्रोल की बचत होगी, प्रदूषण घटेगा और स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका समाज का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग खुद उदाहरण प्रस्तुत करते हैं तो उसका असर समाज पर भी सकारात्मक रूप से पड़ता है।

जनपद न्यायाधीश ने कहा, “हम लोगों ने यह तय किया कि जहां संभव हो, वहां पैदल चलकर ही कार्यालय पहुंचा जाए। इससे न केवल पेट्रोल की बचत होगी बल्कि लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी। हमारे आवास न्यायालय से अधिक दूर नहीं हैं, इसलिए पैदल चलना संभव है। आगे भी हम इस प्रयास को जारी रखने की कोशिश करेंगे।”

इस पहल की चर्चा पूरे बाराबंकी जनपद में तेजी से फैल गई। न्यायालय परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और आम लोगों ने न्यायाधीशों की इस सोच की जमकर सराहना की। कई लोगों ने कहा कि जब न्यायपालिका से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी खुद आगे आकर ऊर्जा संरक्षण का संदेश दे रहे हैं तो आम नागरिकों को भी इससे सीख लेने की जरूरत है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि लोग छोटी दूरी तय करने के लिए साइकिल या पैदल चलने की आदत अपनाएं तो इससे ईंधन की खपत में बड़ी कमी लाई जा सकती है। इससे वायु प्रदूषण घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। वर्तमान समय में शहरों में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए यह पहल और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी पैदल चलने को बेहद लाभकारी बताते हैं। उनका कहना है कि रोजाना कुछ दूरी पैदल चलने से शरीर स्वस्थ रहता है, हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता है और मानसिक तनाव भी घटता है। ऐसे में बाराबंकी जिला न्यायालय की यह पहल स्वास्थ्य और पर्यावरण—दोनों दृष्टि से प्रेरणादायक मानी जा रही है।

वर्तमान समय में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। वहीं बिजली की बढ़ती मांग के कारण ऊर्जा संसाधनों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे दौर में यदि समाज का हर वर्ग ऊर्जा बचत को अपनी आदत बना ले तो इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।

बाराबंकी जिला न्यायालय की यह पहल अब सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय भर नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुकी है। जिस तरह न्यायाधीशों ने खुद आगे बढ़कर उदाहरण प्रस्तुत किया है, उससे यह संदेश साफ जाता है कि बदलाव की शुरुआत हमेशा स्वयं से होती है।

आज जरूरत इस बात की है कि लोग छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाएं। अनावश्यक वाहन प्रयोग कम करें, बिजली की फिजूलखर्ची रोकें और पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। यदि समाज का हर व्यक्ति इस दिशा में थोड़ा भी प्रयास करे तो आने वाले समय में ऊर्जा संकट और प्रदूषण जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

बाराबंकी के जिला न्यायालय से निकला यह संदेश अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे एक सकारात्मक पहल मानते हुए कह रहे हैं कि देश को ऐसे ही उदाहरणों की जरूरत है, जहां जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग केवल सलाह न दें बल्कि खुद आगे बढ़कर समाज को नई दिशा दिखाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button