19 अक्टूबर 2026 2:50 पूर्वाह्न

शादी का झांसा, शोषण और वायरल वीडियो की धमकी से दहला आजमगढ़, बजरंग दल कार्यकर्ता पर गंभीर आरोप

रिपोर्टर जगदंबा उपाध्याय के साथ आजमगढ़ शोषण मामले पर आधारित फीचर इमेज, जिसमें आरोपी युवक की तस्वीर और कानूनी कार्रवाई का प्रतीकात्मक डिजाइन दिखाया गया है।

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जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में एक युवती द्वारा बजरंग दल के एक कार्यकर्ता पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने शहर में सनसनी फैला दी है। युवती ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर करीब तीन वर्षों तक उसका शारीरिक शोषण किया और बाद में शादी से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, विरोध करने पर मारपीट, अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने तथा जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुट गई है। घटना ने एक बार फिर प्रेम संबंधों के नाम पर महिलाओं के कथित शोषण और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एसपी को दिए प्रार्थना पत्र में लगाए गंभीर आरोप

जानकारी के अनुसार, पीड़िता शहर कोतवाली क्षेत्र के सुलेमपुर हीरापट्टी इलाके की रहने वाली बताई जा रही है। युवती ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि दलसिंगार मोहल्ला निवासी आदित्य सोनी, जो स्वयं को बजरंग दल से जुड़ा कार्यकर्ता बताता है, पिछले करीब तीन वर्षों से शादी का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाता रहा।

पीड़िता का कहना है कि आरोपी लगातार उसे भरोसा दिलाता रहा कि वह जल्द शादी करेगा। इसी विश्वास में वह उसके संपर्क में रही। युवती के मुताबिक, जब उसने हाल के दिनों में शादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। पहले वह साथ रहने की बात कहता रहा, लेकिन बाद में उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया।

विरोध करने पर मारपीट और धमकी का आरोप

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब उसने शादी का वादा पूरा करने की बात कही तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट की। युवती का कहना है कि आरोपी ने उसे डराने और चुप कराने के लिए उसकी निजी तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल किया।

आरोप है कि आरोपी ने अश्लील फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। युवती के अनुसार, कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा भी की गईं, जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

युवती ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने कानूनी कार्रवाई की बात कही तो आरोपी ने उसे जान से मरवाने तक की धमकी दी। लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर उसने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई।

पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी, जांच शुरू

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शहर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़िता के आरोपों की हर पहलू से जांच की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल कथित तस्वीरों और वीडियो की भी जांच कर रही है। साथ ही मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला जा सकता है।

पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी पक्ष की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सोशल मीडिया बना ब्लैकमेलिंग का हथियार

यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि निजी तस्वीरों और वीडियो का दुरुपयोग किस तरह महिलाओं पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया और मोबाइल तकनीक का गलत इस्तेमाल कई बार युवतियों को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से तोड़ देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रिश्ते में निजी तस्वीरें या वीडियो साझा करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। वहीं, कानून भी ऐसे मामलों में पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए सख्त प्रावधान उपलब्ध कराता है।

आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत किसी की निजी तस्वीर या वीडियो बिना अनुमति वायरल करना गंभीर अपराध माना जाता है। दोष सिद्ध होने पर आरोपी को कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है।

महिलाओं की सुरक्षा और विश्वास का बड़ा सवाल

आजमगढ़ का यह मामला केवल एक आपराधिक शिकायत भर नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा, भरोसे और सामाजिक सम्मान से जुड़ा बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। अक्सर प्रेम संबंधों में शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में मुकर जाने के मामलों में पीड़िताओं को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।

समाजशास्त्रियों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़िता को केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव का भी सामना करना पड़ता है। कई बार बदनामी के डर से महिलाएं शिकायत तक दर्ज नहीं करा पातीं।

हालांकि इस मामले में युवती द्वारा सामने आकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मामले को लेकर अब लोगों की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हुई हैं। शहर में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई के बाद इस मामले में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

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