20 अक्टूबर 2026 2:10 पूर्वाह्न

ई-रिक्शा से दफ्तर पहुंचे डीएम रविंद्र कुमार ; प्रधानमंत्री के ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ संदेश को ज़मीन पर उतारने की पहल

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

The specified slider id does not exist.

जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट

आजमगढ़। बदलते मौसम, बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण संकट के बीच आजमगढ़ के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने एक ऐसी पहल की है, जिसने प्रशासनिक महकमे के साथ-साथ आम जनता का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सोमवार से जिलाधिकारी ने सरकारी वाहन के बजाय ई-रिक्शा से कार्यालय आना-जाना शुरू कर दिया है। उनकी यह पहल केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक गंभीर प्रशासनिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी ने 18 मई से नियमित रूप से ई-रिक्शा का उपयोग शुरू किया है। यह ई-रिक्शा शासन के निर्धारित वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं के अंतर्गत विधिवत रूप से हायर किया गया है। जिलाधिकारी का यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय-समय पर दिए गए ऊर्जा संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और हरित परिवहन के आह्वान से प्रेरित बताया जा रहा है।

प्रशासनिक व्यवस्था में ‘ग्रीन मॉडल’ की शुरुआत

आजमगढ़ में जिलाधिकारी का ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचना आम दिनों की तरह एक सामान्य दृश्य नहीं था। सुबह जब लोग कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचे तो जिलाधिकारी को ई-रिक्शा से उतरते देखकर कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे प्रशासनिक सादगी का उदाहरण बताया, तो कई लोगों ने इसे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का व्यवहारिक संदेश माना।

दरअसल, मौजूदा समय में देश के अधिकांश शहर बढ़ते वायु प्रदूषण, ईंधन की खपत और ट्रैफिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में यदि जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी स्वयं वैकल्पिक और स्वच्छ परिवहन का उपयोग करता है, तो इसका सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी व्यापक होता है।

प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में व्यवहारिक संदेश

विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल सरकारी योजनाएं और घोषणाएं ही पर्याप्त नहीं होतीं, बल्कि जब अधिकारी स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, तब आम जनता पर उसका प्रभाव अधिक पड़ता है। ई-रिक्शा बैटरी आधारित वाहन है, जिससे ध्वनि और वायु प्रदूषण अपेक्षाकृत कम होता है। पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों की तुलना में यह कम लागत वाला और पर्यावरण अनुकूल विकल्प माना जाता है।

आजमगढ़ जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहरों में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़कों पर बढ़ते धुएं और ईंधन खपत के बीच जिलाधिकारी की यह पहल लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि छोटी दूरी के लिए स्वच्छ परिवहन अपनाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री के विजन से जुड़ी पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ‘ग्रीन एनर्जी’, ‘कार्बन उत्सर्जन में कमी’ और ‘सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट सिस्टम’ पर जोर देते रहे हैं। केंद्र सरकार भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। ई-वाहनों पर सब्सिडी, चार्जिंग स्टेशन और स्वच्छ ऊर्जा नीति जैसे कदम उसी दिशा का हिस्सा हैं।

ऐसे में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार का यह कदम केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे केंद्र सरकार की पर्यावरणीय सोच को स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर लागू करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

कर्मचारियों और आमजन में सकारात्मक चर्चा

कलेक्ट्रेट परिसर में दिनभर इस पहल की चर्चा बनी रही। कई कर्मचारियों ने कहा कि यदि अधिकारी स्वयं इस तरह के प्रयास करेंगे तो आम लोग भी प्रेरित होंगे। कुछ कर्मचारियों ने यह भी कहा कि सरकारी कार्यालयों में छोटी दूरी के लिए ई-वाहनों का उपयोग बढ़ाया जा सकता है।

स्थानीय नागरिकों के बीच भी जिलाधिकारी की इस पहल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब जिले का शीर्ष अधिकारी स्वयं सादगी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा, तो उसका असर समाज में निश्चित रूप से दिखाई देगा।

ई-रिक्शा चालकों में भी बढ़ा उत्साह

जिलाधिकारी द्वारा ई-रिक्शा उपयोग शुरू किए जाने से ई-रिक्शा चालकों में भी उत्साह का माहौल है। कई चालकों ने इसे उनके पेशे के प्रति सम्मान का संकेत बताया। उनका कहना है कि अक्सर ई-रिक्शा को केवल सामान्य परिवहन के रूप में देखा जाता है, लेकिन अब प्रशासनिक स्तर पर इसे अपनाया जाना सकारात्मक संकेत है।

इस कदम से यह संदेश भी गया है कि ई-रिक्शा केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से एक आधुनिक और जिम्मेदार परिवहन विकल्प भी है।

ऊर्जा बचत और ईंधन निर्भरता कम करने की दिशा

भारत लंबे समय से पेट्रोलियम ईंधन के आयात पर निर्भर रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि शहरी क्षेत्रों में छोटी दूरी के लिए ई-वाहनों का उपयोग बढ़ता है, तो ईंधन की खपत और प्रदूषण दोनों में कमी लाई जा सकती है।

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की पहल इसी सोच को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि भविष्य में अन्य विभागों में भी स्वच्छ ऊर्जा आधारित वाहनों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

प्रशासनिक छवि के साथ सामाजिक संदेश भी

आज के दौर में आम जनता प्रशासनिक अधिकारियों से केवल आदेश और बैठकों की अपेक्षा नहीं करती, बल्कि व्यवहारिक उदाहरण भी देखना चाहती है। जिलाधिकारी का यह कदम प्रशासनिक छवि को मानवीय और जनसरोकारों से जुड़ा हुआ दिखाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी फाइलों का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी बन चुका है। ऐसे में यदि प्रशासनिक नेतृत्व स्वयं आगे आकर पहल करता है, तो उसका असर व्यापक स्तर पर पड़ता है।

बदलती सोच का संकेत

आजमगढ़ में ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचे जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की यह पहल केवल एक दिन की चर्चा बनकर सीमित नहीं है। यह बदलती प्रशासनिक सोच, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की ओर बढ़ते कदम का संकेत भी मानी जा रही है।

आने वाले समय में यदि प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर इस तरह की पहलें बढ़ती हैं, तो निश्चित रूप से स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त शहरों की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें