बच्चों को बचाते-बचाते आग में समा गई मां, प्रयागराज की यह दर्दनाक कहानी रुला देगी
धुएं और लपटों के बीच 30 मिनट तक मौत से लड़ती रही अर्चना, तीन बच्चों और भतीजे की बची जान
अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में सामने आई एक मां की बहादुरी और बलिदान की कहानी ने हर किसी को भावुक कर दिया है। आग की भयावह लपटों और दम घोंटते धुएं के बीच एक मां अपने बच्चों को बचाने के लिए करीब आधे घंटे तक मौत से लड़ती रही। उसने अपनी जान की परवाह किए बिना एक-एक कर अपने मासूम बच्चों और भतीजे को सुरक्षित बाहर निकाल दिया, लेकिन आखिरकार खुद आग की चपेट में आकर जिंदगी हार गई।
यह दर्दनाक हादसा 12 मई की रात नैनी क्षेत्र के चैंपियन गली में हुआ, जहां एक क्रॉकरी कारोबारी के मकान में अचानक भीषण आग लग गई। शनिवार को घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में मातम और संवेदना का माहौल है। लोग उस मां की बहादुरी को सलाम कर रहे हैं जिसने अपने बच्चों को बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।
शॉर्ट सर्किट से शुरू हुआ आग का महातांडव
जानकारी के अनुसार नैनी बाजार स्थित चैंपियन गली में तीन भाइयों का संयुक्त परिवार रहता है। परिवार का ‘संजीवनी क्रॉकरी’ नाम से कारोबार है। घर की पहली मंजिल पर ही दुकान का सामान रखा जाता था, जिससे वहां बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी।
बताया जा रहा है कि 12 मई की रात करीब नौ बजे अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते आग ने पूरे भवन को अपनी गिरफ्त में ले लिया। कुछ ही मिनटों में आग इतनी तेजी से फैली कि परिवार के लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
घर की महिलाएं और बच्चे ऊपरी मंजिल पर मौजूद थे। नीचे का हिस्सा धुएं और आग से भर चुका था, जिससे बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। हालात इतने भयावह थे कि परिवार के लोग अपनी जान बचाने के लिए छत की ओर भागे।
मां ने पहले बच्चों की जिंदगी चुनी
इस भयावह स्थिति में भी अर्चना ने हिम्मत नहीं हारी। आग लगातार बढ़ रही थी और धुएं की वजह से सांस लेना मुश्किल हो रहा था, लेकिन वह अपने बच्चों को बचाने में जुटी रही।
मकान के सामने दूसरी ओर पड़ोसियों की छत थी। गली करीब 12 फीट चौड़ी थी। पड़ोसी मदद के लिए अपनी छतों पर पहुंच चुके थे, लेकिन आग की तीव्रता देखकर कोई समझ नहीं पा रहा था कि बच्चों को कैसे बचाया जाए।
इसी बीच अर्चना ने साहस दिखाते हुए सबसे पहले अपने एक साल के मासूम बेटे को चादर में लपेटा और पड़ोसियों की ओर बढ़ा दिया। पड़ोसियों ने जोखिम उठाते हुए बच्चे को पकड़ लिया और सुरक्षित कर लिया।
इसके बाद एक सीढ़ी का इंतजाम हुआ। अर्चना ने उसी सीढ़ी के सहारे अपनी 13 वर्षीय और 10 वर्षीय बेटियों को दूसरी छत तक पहुंचाया। फिर अपने भतीजे लव को भी सुरक्षित बाहर निकाल दिया।
आग की लपटें अब पूरी छत तक पहुंच चुकी थीं। चारों ओर धुआं भर गया था। लेकिन अर्चना तब तक डटी रही जब तक सभी बच्चे सुरक्षित नहीं हो गए।
बच्चों की जिंदगी बची, मां जिंदगी हार गई
बच्चों को सुरक्षित भेजने के बाद अर्चना खुद आग और धुएं के बीच फंस गई। लगातार बढ़ते धुएं के कारण उसका दम घुटने लगा। कुछ ही देर में वह आग की लपटों में घिर गई।
इसी दौरान फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंच चुकी थी। स्थानीय लोगों और दमकल कर्मियों ने किसी तरह अर्चना को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वह गंभीर रूप से झुलस चुकी थी। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
अर्चना की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। जिन बच्चों को उसने अपनी जान देकर बचाया, वही अब मां के बिना जिंदगी बिताने को मजबूर हैं।
बेटी भी झुलसी, भाभी के पैर में फ्रैक्चर
घटना में अर्चना की बड़ी बेटी भी झुलस गई। बताया जा रहा है कि सीढ़ी के सहारे दूसरी छत पर पहुंचने के दौरान वह आग की चपेट में आ गई थी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
वहीं परिवार की दूसरी महिला सरिता, जो पहली मंजिल से कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश कर रही थीं, उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। फिलहाल उनका भी इलाज चल रहा है।
संकरी गली बनी राहत कार्य में बड़ी बाधा
स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस इलाके में आग लगी वहां गलियां बेहद संकरी हैं। यही वजह रही कि फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई।
दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग इतनी भीषण थी कि उसे बुझाने में घंटों लग गए। कुल 12 फायर ब्रिगेड गाड़ियों ने देर रात से लेकर तड़के करीब चार बजे तक लगातार मशक्कत की, तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका। आग के आसपास के मकानों तक फैलने का भी खतरा बना हुआ था, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल था।
वीडियो सामने आने के बाद भावुक हुए लोग
शनिवार को घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग भावुक हो उठे। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे एक मां अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को बचाने की कोशिश कर रही है।
लोग अर्चना की बहादुरी को मां के प्रेम और त्याग का सबसे बड़ा उदाहरण बता रहे हैं। कई लोगों ने प्रशासन से परिवार की आर्थिक मदद और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा की मांग भी की है।
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
इस हादसे ने शहरों की तंग गलियों और रिहायशी इलाकों में बने अवैध गोदामों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भवन में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होते और संकरी गलियों में आपातकालीन पहुंच बेहतर होती, तो शायद अर्चना की जान बचाई जा सकती थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरों में बड़े पैमाने पर ज्वलनशील सामान रखने से आग लगने की घटनाएं और भी खतरनाक हो जाती हैं। ऐसे मामलों में फायर सेफ्टी नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
मां के बलिदान को सलाम
प्रयागराज की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक मां के अद्भुत साहस और त्याग की कहानी बन गई है। अर्चना ने यह साबित कर दिया कि मां अपने बच्चों की जिंदगी के लिए आखिरी सांस तक लड़ सकती है। आज पूरा शहर उस मां को सलाम कर रहा है जिसने अपने बच्चों की सांसें बचाने के लिए खुद अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी।








