सीतापुर

सिधौली नगर पंचायत में टेम्पो-टैक्सी स्टैंड ठेके पर घमासान, सभासदों ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

31 लाख से 15.50 लाख तक पहुंची बोली पर उठे सवाल, डीएम ने एडीएम को सौंपी जांच

रीतेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की सिधौली नगर पंचायत इन दिनों टेम्पो-टैक्सी स्टैंड के ठेके को लेकर विवादों में घिर गई है। नगर पंचायत के कई सभासदों ने ठेके की प्रक्रिया में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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शनिवार को आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में पहुंचे सभासदों ने जिलाधिकारी राजा गणपति आर को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि नगर पंचायत प्रशासन ने पारदर्शिता को ताक पर रखकर टेम्पो-टैक्सी स्टैंड का ठेका बेहद कम कीमत पर दे दिया, जिससे नगर पंचायत को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

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प्रारंभिक बोली 31 लाख, फिर 22 लाख और आखिर में 15.50 लाख!

सभासदों के अनुसार, नगर पंचायत द्वारा टेम्पो-टैक्सी स्टैंड के ठेके की शुरुआती बोली करीब 31 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। लेकिन कुछ आपत्तियों और विरोध के बाद बोर्ड बैठक में इस रकम को घटाकर 22 लाख रुपये कर दिया गया।

 

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आरोप है कि इसके बाद भी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और सभासदों को बिना जानकारी दिए अचानक ठेका मात्र 15 लाख 50 हजार रुपये में आवंटित कर दिया गया।

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सभासदों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि में कमी होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि यदि खुली और निष्पक्ष बोली प्रक्रिया अपनाई जाती तो नगर पंचायत को अधिक राजस्व प्राप्त हो सकता था।

“नगर पंचायत को हुआ आर्थिक नुकसान”

ज्ञापन देने पहुंचे सभासदों ने आरोप लगाया कि ठेका कम कीमत पर देकर नगर पंचायत को जानबूझकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है। उनका कहना है कि नगर पंचायत की आय जनता के विकास कार्यों में खर्च होती है, लेकिन गलत निर्णयों के कारण राजस्व पर सीधा असर पड़ रहा है।

सभासदों ने यह भी कहा कि बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को दी जानी चाहिए थी, लेकिन पूरे मामले में पारदर्शिता का अभाव दिखाई दिया। इससे जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की भी अनदेखी हुई है।

सम्पूर्ण समाधान दिवस में गूंजा मामला

शनिवार को आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। सभासदों ने जिलाधिकारी के समक्ष पूरे मामले को विस्तार से रखते हुए जांच की मांग की।

ज्ञापन सौंपने वालों में सभासद अनुराग शुक्ल, मनीष जायसवाल, वनु वर्मा, प्रतिनिधि उत्तम मिश्र, संतोष, आबिदा सहित कई अन्य लोग शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में ठेका प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

सभासदों का कहना था कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास कमजोर होगा।

जिलाधिकारी ने दिए जांच के निर्देश

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी राजा गणपति आर ने शिकायतकर्ताओं को जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच एडीएम स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। डीएम के इस आश्वासन के बाद सभासदों ने उम्मीद जताई है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और सच सामने आएगा।

ईओ बोलीं- नियमों के तहत हुआ ठेका

वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी रेणुका यादव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ठेका पूरी तरह नियमों के तहत दिया गया है।

उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में शासन की निर्धारित गाइडलाइन का पालन किया गया है और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है। ईओ ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

नगर पंचायत की राजनीति भी गरमाई

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सिधौली नगर पंचायत की राजनीति भी गर्मा गई है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विपक्षी खेमे के लोग इसे नगर पंचायत प्रशासन की बड़ी लापरवाही बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक खींचतान का हिस्सा भी मान रहे हैं।

हालांकि, जनता की नजर अब प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर 31 लाख रुपये की शुरुआती बोली वाला ठेका 15.50 लाख रुपये तक कैसे पहुंच गया।

पारदर्शिता पर उठ रहे बड़े सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय निकायों में होने वाली ठेका प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है। यदि टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो इसका सीधा असर जनता के भरोसे पर पड़ता है।

नगर पंचायतों की आय का बड़ा हिस्सा ऐसे ही ठेकों और टैक्स से आता है। ऐसे में यदि राजस्व कम होता है तो विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि सिधौली का यह मामला अब केवल एक ठेके तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

अब पूरे मामले में एडीएम की जांच रिपोर्ट अहम मानी जा रही है। यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो नगर पंचायत प्रशासन के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं यदि प्रक्रिया सही पाई जाती है तो आरोप लगाने वाले सभासदों की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठ सकते हैं। फिलहाल, सिधौली नगर पंचायत का यह विवाद जिले में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और लोग प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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