जौनपुर

गौ रक्षा बनाम राजनीति : शंकराचार्य का बड़ा संदेश, 2027 चुनाव को लेकर हिंदू समाज से किया आह्वान

रामकीर्ति यादव की रिपोर्ट

जौनपुर में आयोजित गोविष्ठ यात्रा के दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोलते हुए गौ रक्षा को देश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से हिंदू समाज के नाम पर राजनीति करने वाले दलों ने गाय को केवल चुनावी मुद्दा बनाकर छोड़ दिया, जबकि जमीन पर गौ माता की स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है।

जौनपुर पहुंचे शंकराचार्य ने हजारों लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब हिंदू समाज को केवल नारों और भावनात्मक भाषणों से आगे बढ़कर वास्तविक मुद्दों पर निर्णय लेना होगा। उन्होंने लोगों से संकल्प दिलाया कि वे आने वाले चुनावों में सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दों से पहले गौ माता की रक्षा को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल ईमानदारी से गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गौ माता को “राष्ट्र माता” घोषित करने का साहस दिखाएगा, वही हिंदू समाज का समर्थन पाने का अधिकारी होगा।

गोरखपुर से शुरू हुई गोविष्ठ यात्रा

शंकराचार्य ने बताया कि “गोविष्ठ यात्रा” की शुरुआत गोरखपुर से हुई है और यह उत्तर प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक जागरण नहीं, बल्कि समाज को यह एहसास कराना है कि गाय भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और सनातन परंपरा की आत्मा है।

उन्होंने जानकारी दी कि यह यात्रा 23 जुलाई को पुनः गोरखपुर पहुंचेगी, जिसके बाद 24 जुलाई को राजधानी लखनऊ में लगभग 2 लाख 18 हजार लोगों के साथ विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए है।

भाजपा पर साधा निशाना

पत्रकारों से बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने भाजपा पर सीधे हमला बोलते हुए कहा कि लगातार सरकार बनने के बावजूद जनता के दिलों में पार्टी की विश्वसनीयता कम हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ रक्षा के नाम पर वोट तो लिए गए, लेकिन गौ हत्या और गौ मांस व्यापार रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में खुलेआम गौ तस्करी हो रही है, अवैध कटान जारी है और गौशालाओं की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में गौ माता को पूजनीय मानती है तो अब तक उन्हें राष्ट्र माता घोषित क्यों नहीं किया गया।

शंकराचार्य ने कहा, “हिंदू समाज अब इतना मजबूर नहीं रह गया है कि गाय काटने वालों या गौ रक्षा पर मौन रहने वालों का समर्थन करता रहे। जनता अब सब समझ चुकी है।”

महंगाई और ईंधन संकट पर केंद्र सरकार को घेरा

अपने संबोधन में उन्होंने बढ़ती महंगाई, पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आम जनता से ईंधन बचाने और कम यात्रा करने की अपील की जा रही है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग खुद वैसी सादगी नहीं दिखा रहे।

उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब देशहित में तेल बचाने की बात हो रही है तो बड़े-बड़े काफिले, चार्टर्ड विमान और भारी सरकारी खर्च क्यों जारी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आम नागरिकों से “वर्क फ्रॉम होम” और कम संसाधनों के उपयोग की अपेक्षा की जा रही है, तो नेताओं को भी स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि देश की जनता अब केवल भाषण नहीं, बल्कि व्यवहारिक ईमानदारी देखना चाहती है।

मीडिया की भूमिका पर भी उठाए सवाल

अपने भाषण में शंकराचार्य ने मीडिया पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि आज का एक बड़ा वर्ग सत्ता की “छवि चमकाने” में लगा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ रक्षा और किसानों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को गंभीरता से नहीं दिखाया जाता, जबकि राजनीतिक प्रचार को प्रमुखता दी जाती है।

उन्होंने कहा कि जब मीडिया जनता के असली मुद्दों को सामने लाना बंद कर देता है, तब लोकतंत्र कमजोर होने लगता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्वतंत्र पत्रकार और सामाजिक मंच अब भी जमीन की सच्चाई दिखाने का साहस कर रहे हैं।

2027 चुनाव को लेकर बड़ा संदेश

शंकराचार्य का पूरा भाषण आगामी 2027 विधानसभा चुनावों की ओर संकेत करता नजर आया। उन्होंने लोगों से कहा कि अब वोट जाति, धर्म या सरकारी योजनाओं के नाम पर नहीं, बल्कि गौ माता की सुरक्षा और सनातन संस्कृति की रक्षा के आधार पर होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को यह तय करना होगा कि वह केवल चुनावी नारों से संतुष्ट रहेगा या वास्तव में गौ माता की रक्षा करने वाली व्यवस्था चाहता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी एक पार्टी के समर्थन या विरोध के लिए नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना जगाने के लिए है।

योगी आदित्यनाथ पर भी टिप्पणी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर टिप्पणी करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि भगवा वस्त्र धारण करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके अनुरूप कार्य भी दिखने चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता पिछले कई वर्षों से देख रही है कि गौ रक्षा के मुद्दे पर वास्तव में कितनी गंभीरता दिखाई गई। उन्होंने कहा कि यदि गौ माता की रक्षा के लिए कठोर और स्पष्ट नीति नहीं बनती, तो आने वाले समय में हिंदू समाज राजनीतिक दलों से कठिन सवाल पूछेगा।

धार्मिक आंदोलन या राजनीतिक चेतावनी?

जौनपुर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल धार्मिक सभा भर नहीं रहा, बल्कि उसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी। शंकराचार्य के बयान ऐसे समय आए हैं जब देश में महंगाई, बेरोजगारी, किसान और धार्मिक मुद्दों पर लगातार बहस चल रही है।

गोविष्ठ यात्रा के माध्यम से गौ रक्षा को केंद्र में लाने की कोशिश अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए विमर्श को जन्म देती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में यह आंदोलन कितना व्यापक असर डालेगा, यह तो भविष्य तय करेगा, लेकिन जौनपुर में शंकराचार्य के तेवरों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि गौ रक्षा का मुद्दा आगामी चुनावी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

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