योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता : डीएम मधुसूदन हुल्गी
महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर सख्त हुए जिलाधिकारी, बाल विवाह और घरेलू हिंसा पर कठोर कार्रवाई के निर्देश
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया में महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी और परिणाममुखी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने कलेक्ट्रेट सभागार में प्रोबेशन एवं महिला कल्याण विभाग की व्यापक समीक्षा बैठक की। बैठक में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, संरक्षण इकाइयों और महिला सुरक्षा कार्यक्रमों की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ समयबद्ध तरीके से पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विशेष रूप से महिला एवं बाल अपराधों की रोकथाम को प्रशासन की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि समाज में बाल विवाह, बाल श्रम, दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा जैसी कुरीतियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ-साथ सख्ती भी दिखाई जाए, ताकि समाज में कानून का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
बाल विवाह और बाल श्रम पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश
समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर निरंतर निगरानी और त्वरित हस्तक्षेप जरूरी है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय निगरानी तंत्र विकसित किया जाए, जिससे किसी भी बाल विवाह या बाल श्रम की सूचना तत्काल प्रशासन तक पहुंचे और समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता पैदा किए बिना इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से उन्होंने नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसंवाद जैसे माध्यमों का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि केवल कार्यक्रम आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी मूल्यांकन किया जाए कि इन अभियानों का लोगों के व्यवहार और सोच पर कितना प्रभाव पड़ा।
जन-जागरूकता अभियानों के प्रभाव का भी होगा मूल्यांकन
डीएम मधुसूदन हुल्गी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े अभियानों को परिणाम आधारित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक या जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, वहां बाद में सर्वेक्षण और समीक्षा कर यह देखा जाए कि लोगों में सामाजिक व्यवहार को लेकर क्या परिवर्तन आया है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सामूहिक प्रशासनिक दायित्व है। सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए अपराधों में कमी लाने के लिए सतत प्रयास करने होंगे।
निर्माण कार्यों में पारदर्शिता पर जोर
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश दिए कि विभागीय निर्माण कार्य सीधे कराने के बजाय पीडब्ल्यूडी अथवा संबंधित निर्माण एजेंसियों के माध्यम से कराए जाएं। उन्होंने बजट की उपलब्धता, व्यय और निर्माण कार्यों की प्रगति का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। डीएम ने स्पष्ट किया कि सरकारी धन का उपयोग पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ होना चाहिए।
कन्या सुमंगला और सुकन्या समृद्धि योजना की समीक्षा
जिलाधिकारी ने महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाओं की समीक्षा करते हुए कन्या जन्मोत्सव, सुकन्या समृद्धि योजना, कन्या सुमंगला योजना तथा निराश्रित महिला पेंशन योजना में बेहतर प्रगति लाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों और महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लाभार्थियों के चयन और आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बाल संरक्षण इकाइयों की कार्यप्रणाली की हुई समीक्षा
बैठक में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन, राजकीय दत्तक ग्रहण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, वन स्टॉप सेंटर, हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन, राजकीय बाल गृह, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना तथा स्पॉन्सरशिप योजना समेत कई महत्वपूर्ण इकाइयों और योजनाओं की समीक्षा की गई।
डीएम ने अधिकारियों से योजनाओं की वर्तमान स्थिति, लाभार्थियों की संख्या, बजट उपयोग और जमीनी क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मामलों में देरी या उदासीनता बिल्कुल स्वीकार नहीं की जाएगी।
वन स्टॉप सेंटर और बाल कल्याण कार्यालय का किया निरीक्षण
समीक्षा बैठक से पहले जिलाधिकारी ने वन स्टॉप सेंटर एवं बाल कल्याण कार्यालय का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक संसाधनों का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए तथा वहां आने वाले पीड़ितों को संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, दस्तावेजीकरण और सहायता सेवाओं की स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे संस्थानों का वातावरण भरोसा और सुरक्षा का संदेश देने वाला होना चाहिए।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुई विस्तृत समीक्षा
बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल सोनकर, बाल कल्याण अधिकारी जे.पी. तिवारी, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष सावित्री राय, अमित उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी संचालन एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।









