मेरठ

शादी के पांच दिन बाद लौटकर सहेली के साथ रहने की जिद, दो बालिग युवतियों के फैसले ने खींचा सबका ध्यान

मेरठ में दो युवतियों के साथ रहने के फैसले पर परिवारों की नाराजगी, पुलिस ने बालिग होने के आधार पर उनकी इच्छा को दी प्राथमिकता

ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आए एक मामले ने सामाजिक, पारिवारिक और कानूनी स्तर पर नई चर्चा को जन्म दे दिया है। यहां दो बालिग युवतियों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की इच्छा जताते हुए अपने फैसले पर अडिग रहने का फैसला किया। मामला तब सामने आया जब एक युवती की परिवार की सहमति से शादी कर दी गई, लेकिन विवाह के महज पांच दिन बाद वह अपने पति का घर छोड़कर अपनी बचपन की सहेली के पास लौट आई। दोनों युवतियों का कहना है कि वे पहले ही अदालत में विवाह कर चुकी हैं और अब साथ रहना चाहती हैं।

पुलिस के सामने जब पूरा मामला पहुंचा तो दोनों युवतियों ने स्पष्ट रूप से अपनी इच्छा दोहराई। पूछताछ और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों के बालिग होने तथा किसी आपराधिक पहलू के सामने न आने के कारण उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार रहने की अनुमति दे दी। इस फैसले से जहां दोनों परिवारों में नाराजगी है, वहीं पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

बचपन की दोस्ती समय के साथ गहरे रिश्ते में बदली

जानकारी के अनुसार, दोनों युवतियां मेरठ जिले के जानी थाना क्षेत्र के एक ही गांव और एक ही मोहल्ले की निवासी हैं। बचपन से साथ पढ़ने और लंबे समय तक एक-दूसरे के संपर्क में रहने के कारण उनके बीच गहरी आत्मीयता विकसित हुई। समय के साथ दोनों ने साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया।

परिजनों को जब दोनों के रिश्ते की जानकारी मिली तो उन्होंने उनके मिलने-जुलने पर रोक लगाने का प्रयास किया। परिवारों का मानना था कि दूरी बढ़ने से दोनों का संपर्क समाप्त हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दोनों लगातार संपर्क में बनी रहीं और अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का निर्णय ले लिया।

कोर्ट मैरिज का किया दावा

दोनों युवतियों का कहना है कि उन्होंने लगभग एक वर्ष पहले अदालत में विवाह कर लिया था। उनका दावा है कि इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज भी उनके पास मौजूद हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन पुलिस के सामने दोनों ने कथित दस्तावेज प्रस्तुत किए।

इसी आधार पर दोनों ने पुलिस को बताया कि वे पहले से ही एक-दूसरे के साथ रहने का निर्णय ले चुकी थीं और परिवारों के दबाव के कारण अलग-अलग रहने को मजबूर थीं।

परिवार ने कराई शादी, लेकिन पांच दिन में बदल गया घटनाक्रम

परिजनों ने स्थिति को सामान्य बनाने के उद्देश्य से एक युवती का विवाह 6 जुलाई को गाजियाबाद निवासी युवक के साथ करा दिया। परिवार को उम्मीद थी कि शादी के बाद युवती अपने नए वैवाहिक जीवन में व्यस्त हो जाएगी और पुराना संबंध समाप्त हो जाएगा।

लेकिन विवाह के केवल पांच दिन बाद ही घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। नवविवाहिता ने अपनी सहेली से संपर्क किया और उसके साथ रहने की इच्छा जताई। इसके बाद दूसरी युवती पुलिस के साथ वहां पहुंची और अपने दावे के समर्थन में कथित कोर्ट मैरिज से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।

इस घटना के बाद दोनों परिवारों में तनाव की स्थिति पैदा हो गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया।

पुलिस ने सभी पक्षों से की विस्तृत पूछताछ

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने दोनों युवतियों, नवविवाहिता के पति, दोनों परिवारों तथा अन्य संबंधित पक्षों से अलग-अलग बातचीत की। अधिकारियों ने काफी देर तक दोनों युवतियों को समझाने का प्रयास किया ताकि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें।

हालांकि, दोनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अपनी इच्छा से साथ रहना चाहती हैं। नवविवाहिता ने पुलिस के सामने यह भी कहा कि वह न तो अपने मायके में रहना चाहती है और न ही अपने पति के साथ, बल्कि अपनी सहेली के साथ अपना जीवन बिताना चाहती है।

बालिग होने के कारण इच्छा को मिली प्राथमिकता

पूछताछ के दौरान पुलिस ने दोनों युवतियों की आयु और उनकी स्वतंत्र इच्छा की पुष्टि की। दोनों के बालिग होने तथा किसी प्रकार के दबाव, धमकी या आपराधिक तत्व के संकेत न मिलने पर पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप उनकी इच्छा का सम्मान किया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब दो बालिग व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा से कोई निर्णय लेते हैं और उसमें कोई आपराधिक पहलू सामने नहीं आता, तब कानून के अनुसार उनकी इच्छा को महत्व दिया जाता है। इसी आधार पर दोनों युवतियों को अपनी पसंद के अनुसार साथ जाने की अनुमति दी गई।

परिवारों ने जताई नाराजगी

दूसरी ओर, दोनों परिवार इस पूरे घटनाक्रम से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उन्होंने सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए विवाह कराया था, लेकिन विवाह के कुछ ही दिनों बाद ऐसा घटनाक्रम सामने आने से वे मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया कि फिलहाल मामला किसी अपराध से संबंधित नहीं है और यह दो बालिग महिलाओं के व्यक्तिगत निर्णय से जुड़ा विषय है। इसलिए कानून के दायरे में रहते हुए आवश्यक कार्रवाई की गई है।

सामाजिक स्तर पर शुरू हुई नई बहस

मेरठ का यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर कुछ लोग इसे दो बालिग व्यक्तियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक मूल्यों के संदर्भ में भी विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संबंधित पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तक सीमित रहती है। यदि किसी प्रकार का अपराध या दबाव सामने नहीं आता, तो बालिग व्यक्तियों की स्वतंत्र इच्छा को कानून में विशेष महत्व दिया जाता है।

फिलहाल शांत है स्थिति

पुलिस के अनुसार फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य है और किसी प्रकार के विवाद या कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या की सूचना नहीं है। एहतियात के तौर पर संबंधित पक्षों से संपर्क बनाए रखा गया है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो।

इस बीच यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। शादी के कुछ ही दिनों बाद लिया गया यह फैसला सामाजिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से लोगों के बीच बहस का कारण बन गया है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले में यदि भविष्य में कोई नई कानूनी परिस्थिति सामने आती है तो उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

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