gadhchiroli

कोडसेलागुडम में घर वापसी कार्यक्रम संपन्न, परिवार सहित हिंदू धर्म में लौटे सतीश अंबाला

गड़चिरोली जिले के कोडसेलागुडम गांव में आयोजित घर वापसी कार्यक्रम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। विश्व हिंदू परिषद के मार्गदर्शन में आयोजित इस धार्मिक समारोह में नारायणपूर निवासी सतीश आशालू अंबाला ने अपने परिवार सहित हिंदू धर्म में पुनः प्रवेश किया। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम में हिंदू संस्कृति, सामाजिक एकता और भारतीय जीवन मूल्यों पर विशेष जोर दिया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

सदानंद इंगिली की रिपोर्ट

गड़चिरोली जिले की अहेरी तहसील के कोडसेलागुडम गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित घर वापसी कार्यक्रम धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। इस आयोजन में सिरोंचा तहसील के नारायणपूर निवासी सतीश आशालू अंबाला ने अपने परिवार के साथ ईसाई धर्म का परित्याग कर पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और हिंदू संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ धार्मिक अनुष्ठान

घर वापसी समारोह का आयोजन श्री शंकर महाराज के मार्गदर्शन और नेतृत्व में किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, पूजन-अर्चन तथा अन्य पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से सतीश अंबाला और उनके परिवार का हिंदू धर्म में स्वागत किया गया।

पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया। वैदिक मंत्रों की गूंज और हवन की पवित्र अग्नि के बीच संपन्न हुए इस अनुष्ठान ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने का कार्य किया।

हिंदू संस्कृति और सामाजिक एकता पर दिया गया विशेष जोर

समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और भारतीय जीवन मूल्यों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल एक धार्मिक व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो समाज में समरसता, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देती है।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि समाज की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए सभी वर्गों को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने सामाजिक एकता, राष्ट्रीय अखंडता और सांस्कृतिक संरक्षण को समय की आवश्यकता बताते हुए लोगों से अपने इतिहास और परंपराओं के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

घर वापसी के लिए कई कार्यकर्ताओं ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

सतीश आशालू अंबाला और उनके परिवार की घर वापसी को सफल बनाने में कई सामाजिक और धार्मिक कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अभियान में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के सिरोंचा तहसील अध्यक्ष सदानंद इंगिली ने विशेष प्रयास किए।

इसके अलावा तहसील उपाध्यक्ष व्यंकटी रापेली, प्रभाकर इंगिली, हनुमान चालीसा केंद्र प्रमुख राजन्ना अन्नेला, नारायणपूर अध्यक्ष दुंदु रुद्रया, अंकुलु अंबाला, शंकरस्वामी मेडारापु तथा श्याम नुकुम सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। इन सभी ने परिवार को पुनः सनातन परंपराओं से जोड़ने के लिए लगातार संवाद और मार्गदर्शन का कार्य किया।

परिवार का किया गया सम्मान

धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सतीश आशालू अंबाला और उनके परिवार का विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम के आयोजकों और उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने उन्हें शाल ओढ़ाकर, पुष्पहार पहनाकर तथा सम्मान-चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।

इस अवसर पर लोगों ने परिवार को शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद, समृद्ध और मंगलमय भविष्य की कामना की। उपस्थित लोगों ने कहा कि समाज में सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए ऐसे कार्यक्रमों का विशेष महत्व है।

शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ आयोजन

पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और शांति का विशेष ध्यान रखा गया। आयोजन में शामिल लोगों ने धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया। स्थानीय प्रशासनिक नियमों और सामाजिक सद्भाव को ध्यान में रखते हुए समारोह का संचालन किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया और समाज में सांस्कृतिक जागरूकता तथा राष्ट्रीय एकात्मता को मजबूत बनाने के लिए आगे भी इसी प्रकार के आयोजन जारी रखने की बात कही।

क्षेत्र में चर्चा का विषय बना आयोजन

कोडसेलागुडम में आयोजित यह घर वापसी कार्यक्रम क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इस आयोजन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करना और लोगों को भारतीय परंपराओं एवं मूल्यों के प्रति जागरूक बनाना था। इसी उद्देश्य के साथ यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें भाग लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button