राम मंदिर पर अखिलेश यादव के बयान से गरमाई सियासत, ओम प्रकाश राजभर बोले— पहले करें रामलला के दर्शन, फिर करें टिप्पणी
ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में राम मंदिर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयान के बाद प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अयोध्या और राम मंदिर जैसे आस्था से जुड़े विषयों पर टिप्पणी करने से पहले अखिलेश यादव को स्वयं भगवान रामलला के दर्शन करने चाहिए। उनका कहना है कि जब तक कोई व्यक्ति इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को प्रत्यक्ष रूप से नहीं समझेगा, तब तक उसके बयान जनता के बीच गंभीरता से नहीं लिए जाएंगे।
राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राम मंदिर को लेकर बहस तेज हो गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के सामने अपनी बात रख रहे हैं, जिससे यह मुद्दा फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
रामलला के दर्शन के बाद ही करें टिप्पणी: राजभर
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पूरा देश इस बात से परिचित है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अभी तक अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में यदि वे राम मंदिर और उससे जुड़े विषयों पर लगातार टिप्पणी करते हैं तो आम जनता उसे गंभीरता से नहीं लेती।
उन्होंने कहा कि भगवान राम भारतीय संस्कृति, सभ्यता और करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। इसलिए इस विषय पर बोलते समय प्रत्येक राजनीतिक दल और नेता को संवेदनशीलता तथा मर्यादा का पालन करना चाहिए। राजभर के अनुसार धार्मिक विषयों को केवल राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से देखना उचित नहीं है।
500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है राम मंदिर
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कोई सामान्य घटना नहीं है। इसके पीछे लगभग पांच शताब्दियों का लंबा संघर्ष, अनेक लोगों का त्याग और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया ने देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं को एक नया सम्मान दिया है।
राजभर का कहना था कि ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के विषय पर की जाने वाली अनावश्यक राजनीतिक टिप्पणियां लोगों की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करती हैं। इसलिए नेताओं को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए।
राम मंदिर को बताया सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि राम मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक भी है। उनके अनुसार यह मंदिर देश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर राजनीति करने के बजाय सभी राजनीतिक दलों को समाज में सौहार्द और सम्मान का वातावरण बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए। धार्मिक मुद्दों पर अनावश्यक विवाद पैदा करने से समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे बचने की आवश्यकता है।
विपक्ष से जनहित के मुद्दों पर बहस की अपील
राम मंदिर के मुद्दे के साथ-साथ ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को अन्य जनहित के विषयों पर भी घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्ष यदि वास्तव में जनता की समस्याओं को लेकर गंभीर है तो उसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और रचनात्मक चर्चा करनी चाहिए।
राजभर ने सवाल उठाया कि पिछड़े वर्गों को मिलने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन, उसके उचित बंटवारे और सामाजिक अधिकारों को लेकर विपक्ष की ओर से अपेक्षित गंभीरता क्यों नहीं दिखाई देती। उनका कहना था कि इन विषयों पर ठोस बहस और समाधान प्रस्तुत करना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
युवाओं और गरीबों के मुद्दों को बनाया केंद्र
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना, गरीब परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना आज सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इन मूलभूत मुद्दों से जनता का ध्यान हटाकर केवल राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त रहता है।
राजभर ने कहा कि जनता अब केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं बल्कि विकास, रोजगार और बेहतर शासन से जुड़े ठोस कार्यों को देखना चाहती है। इसलिए सभी दलों को जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
राम मंदिर को लेकर लगातार जारी है राजनीतिक बहस
उत्तर प्रदेश में राम मंदिर का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान इस विषय को फिर चर्चा में ले आते हैं। हाल के दिनों में भी मंदिर से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है।
जहां विपक्ष समय-समय पर सरकार और मंदिर से जुड़े प्रबंधन को लेकर सवाल उठाता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित करार देता है।
जनता सब देख रही है: राजभर
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश और देश की जनता पूरी राजनीतिक स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उनके अनुसार लोग यह समझते हैं कि कौन नेता आस्था का सम्मान कर रहा है और कौन केवल राजनीतिक लाभ के लिए बयान दे रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम निर्णय जनता के हाथ में होता है और मतदाता समय आने पर अपने विवेक से फैसला करेंगे। उनका कहना था कि भगवान राम के प्रति लोगों की आस्था सर्वोपरि है और इससे जुड़े विषयों पर की जाने वाली राजनीतिक बयानबाजी का जवाब भी जनता लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
राम मंदिर को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। अखिलेश यादव के बयान पर ओम प्रकाश राजभर की तीखी प्रतिक्रिया ने इस बहस को नया आयाम दे दिया है। जहां राजभर ने रामलला के दर्शन करने के बाद ही मंदिर पर टिप्पणी करने की सलाह दी है, वहीं उन्होंने विपक्ष से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पिछड़े वर्गों के अधिकार जैसे जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने की भी अपील की है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राम मंदिर को लेकर जारी यह राजनीतिक विमर्श किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका प्रदेश की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।









