रिपोर्ट: संजय सिंह राणा
चित्रकूट की पहचान केवल भगवान श्रीराम की तपोभूमि के रूप में ही नहीं है, बल्कि यहां ऐसे अनेक धार्मिक और प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं, जिनका उल्लेख पुराणों से लेकर लोकश्रुतियों तक में मिलता है। इन्हीं में से एक है देवांगना घाटी स्थित पौराणिक पंपापुर-कोटितीर्थ, जो अपनी आध्यात्मिक गरिमा, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक मान्यताओं के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे इस पवित्र स्थल के लिए अब उम्मीद की नई किरण दिखाई दी है।
गुरुवार को जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने स्वयं पंपापुर-कोटितीर्थ पहुंचकर पूरे क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि उन्होंने स्थल की वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए अधिकारियों को विकास कार्यों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उनके इस दौरे से स्थानीय ग्रामीणों, साधु-संतों और श्रद्धालुओं में यह विश्वास जगा है कि अब इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का वास्तविक कायाकल्प संभव हो सकेगा।
प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक आस्था का अद्भुत संगम
देवांगना घाटी की गोद में स्थित पंपापुर-कोटितीर्थ प्रकृति और अध्यात्म का ऐसा संगम है, जहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ियों की श्रृंखला, शांत वातावरण और प्राकृतिक जल स्रोत इस स्थान को विशेष बनाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सदियों से ऋषि-मुनियों और संतों की तपस्थली रही है। यहां आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के उद्देश्य से भी पहुंचते हैं।
जिलाधिकारी ने विकास की संभावनाओं को पहचाना
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कहा कि पंपापुर-कोटितीर्थ में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि यहां मूलभूत सुविधाओं का समुचित विकास किया जाए तो यह चित्रकूट ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
सबसे पहले सुधरेगी सड़क व्यवस्था
पंपापुर तक पहुंचने वाला मार्ग लंबे समय से खराब स्थिति में है। बरसात के मौसम में यह रास्ता और अधिक कठिन हो जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जर्जर सड़क का निरीक्षण करते हुए शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि बेहतर सड़क बनने से न केवल स्थानीय लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि होगी।
सुरक्षा के लिए लगेगी रेलिंग
पंपापुर का पहाड़ी मार्ग कई स्थानों पर संकरा और ढलानदार है। पर्व और मेलों के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने पूरे पहाड़ी मार्ग के दोनों ओर मजबूत रेलिंग लगाने के निर्देश दिए। इससे विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।
श्रद्धालुओं के लिए बनेगा टीन शेड
गर्मी, बरसात और धूप में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को लंबे समय तक खुले में इंतजार करना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने यात्रियों के बैठने, विश्राम करने तथा भजन-कीर्तन के आयोजन के लिए टीन शेड बनाने का निर्देश दिया। इससे धार्मिक आयोजनों के दौरान भी श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
पेयजल और साफ-सफाई पर विशेष जोर
धार्मिक स्थलों की सबसे बड़ी आवश्यकता स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था होती है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यहां नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था भी विकसित की जाए ताकि किसी भी श्रद्धालु को परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक पर्यटन के विकास में स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण आधार है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
गुफा तक जाने वाली सीढ़ियों का होगा जीर्णोद्धार
पंपापुर की विशेष पहचान पहाड़ी के नीचे स्थित वह प्राचीन गुफा है, जहां सिद्ध बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित है। श्रद्धालुओं को गुफा तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का उपयोग करना पड़ता है, जिनकी स्थिति कई स्थानों पर खराब हो चुकी है।
जिलाधिकारी ने इन सीढ़ियों की तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए ताकि दर्शनार्थियों को सुरक्षित और सुगम मार्ग उपलब्ध कराया जा सके।
संतों की तपस्थली के रूप में विशेष पहचान
निरीक्षण के दौरान स्थानीय साधु-संतों ने जिलाधिकारी को बताया कि पंपापुर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सिद्ध संतों की तपोभूमि भी है।
जानकी कुंड नेत्र चिकित्सालय के संस्थापक पूज्य संत रणछोड़ दास जी महाराज ने इसी स्थान पर वर्षों तक कठोर तपस्या की थी और यहीं उन्हें सिद्धि प्राप्त हुई थी।
वर्तमान में संत प्रेमदास जी महाराज यहां तपस्या कर रहे हैं और समाज तथा राष्ट्र के कल्याण की भावना से साधना में लीन रहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
हर मंगलवार और शनिवार उमड़ती है भीड़
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। इसके अलावा गुरु पूर्णिमा, प्रत्येक अमावस्या और विशेष रूप से दीपावली अमावस्या के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
इन आयोजनों के दौरान पर्याप्त सुविधाओं का अभाव लंबे समय से महसूस किया जा रहा था, जिसे अब दूर करने की दिशा में प्रशासन सक्रिय दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों ने रखीं अपनी समस्याएं
निरीक्षण के दौरान स्थानीय श्रद्धालु योगेश जैन और सभासद शंकर यादव ने जिलाधिकारी के सामने क्षेत्र की विभिन्न समस्याएं विस्तार से रखीं। उन्होंने सड़क, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की मांग की।
जिलाधिकारी ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए और भरोसा दिलाया कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होने दी जाएगी।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
यदि प्रशासन द्वारा प्रस्तावित सभी विकास कार्य समय पर पूरे हो जाते हैं तो पंपापुर-कोटितीर्थ चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।
बेहतर सड़क, सुरक्षित मार्ग, स्वच्छ परिसर, पेयजल, विश्राम स्थल और सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं न केवल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाएंगी, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। होटल, परिवहन, दुकानदारों और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को इसका सीधा लाभ मिलता है।
लोगों की उम्मीदें अब प्रशासन से
वर्षों से सुविधाओं की मांग कर रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली बार किसी जिलाधिकारी ने स्थल पर पहुंचकर इतनी गंभीरता से निरीक्षण किया है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि घोषित योजनाएं धरातल पर कितनी जल्दी उतरती हैं।
यदि सभी निर्देश समयबद्ध ढंग से लागू होते हैं तो पंपापुर-कोटितीर्थ न केवल अपनी धार्मिक पहचान को और मजबूत करेगा, बल्कि चित्रकूट जिले के पर्यटन मानचित्र पर भी नई चमक के साथ उभरेगा।
पंपापुर-कोटितीर्थ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि चित्रकूट की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद यहां श्रद्धालुओं की आस्था कभी कम नहीं हुई। अब प्रशासन ने जिस गंभीरता से इस स्थल के विकास की पहल की है, उससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र आधुनिक सुविधाओं से युक्त, सुरक्षित और व्यवस्थित धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा। यदि योजनाएं समयबद्ध ढंग से पूरी होती हैं तो पंपापुर-कोटितीर्थ न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि चित्रकूट की पर्यटन पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

























