मासूमों की सेहत से खिलवाड़ : मिड-डे मील में जली रोटियां और पानी जैसी सब्जी, प्रधानाध्यापक निलंबित

रिपोर्टर रीतेश कुमार गुप्ता की तस्वीर के साथ मिड-डे मील में जली रोटियां और पानी जैसी सब्जी दिखाती फीचर इमेज, लापरवाही पर प्रधानाध्यापक निलंबित।

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रीतेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

प्राथमिक विद्यालय छंगापुर में सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित मिड-डे मील योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक प्राथमिक विद्यालय में मासूम बच्चों को पानी जैसी पतली सब्जी और जली हुई रोटियां परोसे जाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लिया और जांच कराते हुए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

बताया जा रहा है कि विद्यालय में बच्चों को परोसे जा रहे भोजन का वीडियो सोमवार शाम सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में बच्चों की थाली में बेहद खराब गुणवत्ता का भोजन दिखाई दे रहा था। सब्जी इतनी पतली थी कि उसमें पोषण की जगह केवल पानी नजर आ रहा था, जबकि कई रोटियां जली हुई थीं। वीडियो सामने आते ही लोगों ने मिड-डे मील की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए और जिम्मेदार अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की।

जिलाधिकारी ने दिए तत्काल जांच के निर्देश

मामले की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल को स्वयं मौके पर पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों की टीम विद्यालय पहुंची और मिड-डे मील व्यवस्था की बारीकी से पड़ताल की।

बच्चों और अभिभावकों से लिए गए बयान

जांच के दौरान विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से भी बातचीत की गई। बच्चों ने बताया कि उन्हें कई बार घटिया गुणवत्ता का भोजन दिया जाता है। ग्रामीणों ने भी अधिकारियों को बताया कि विद्यालय में अक्सर दाल और सब्जी की गुणवत्ता खराब रहती है तथा निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जाता। इतना ही नहीं, बच्चों को मिलने वाले दूध के वितरण में भी अनियमितता की शिकायत सामने आई।

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जांच में लापरवाही की हुई पुष्टि

बेसिक शिक्षा अधिकारी की जांच में मिड-डे मील व्यवस्था में गंभीर लापरवाही की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के अनुसार भोजन की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में स्पष्ट रूप से लापरवाही बरती गई, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था। जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई।

प्रधानाध्यापक निलंबित, रसोइया की सेवा समाप्त

प्रकरण में प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए जाने पर विद्यालय की प्रधानाध्यापक कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं, भोजन तैयार करने में लापरवाही और मानकों की अनदेखी के आरोप में रसोइया अनीता की सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अधिकारियों पर भी गिरी कार्रवाई की गाज

कार्रवाई केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रही। पर्यवेक्षण में शिथिलता बरतने के आरोप में संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी उदयमणि पटेल को प्रतिकूल प्रविष्टि प्रदान की गई। इसके अलावा मिड-डे मील के जिला समन्वयक बृज मोहन सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा गया है। विभाग का कहना है कि निगरानी व्यवस्था मजबूत रखना अधिकारियों की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।

एक महीने में मांगी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट

पूरे मामले की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी बीईओ पहला पुष्पराज सिंह को सौंपी गई है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि एक माह के भीतर सभी तथ्यों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराएं। रिपोर्ट के आधार पर यदि अन्य किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर मिड-डे मील योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार इस योजना पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है ताकि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन मिल सके और उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर हो। लेकिन जमीनी स्तर पर यदि भोजन की गुणवत्ता ही मानकों के अनुरूप न हो तो योजना का उद्देश्य प्रभावित होना स्वाभाविक है।

बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं होना चाहिए

शिक्षा और पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालयों में परोसा जाने वाला भोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। इस मामले में हुई कार्रवाई को एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि यदि कहीं भी मिड-डे मील योजना में लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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Author: यायावर

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