क्या आपकी रसोई की हल्दी असली है? कानपुर में चावल के टुकड़ों और रंग से नकली हल्दी बनाने का बड़ा खुलासा

रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान की तस्वीर के साथ कानपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी, हल्दी पाउडर, चावल के बोरे और संदिग्ध सामग्री का फीचर इमेज।

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की एक बड़ी कार्रवाई ने मसालों में मिलावट के संभावित कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पनकी क्षेत्र स्थित एक फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान अधिकारियों को ऐसे कच्चे पदार्थ मिले, जिनके आधार पर आशंका जताई जा रही है कि चावल के टुकड़ों, कृत्रिम रंग और अन्य सामग्री की मदद से हल्दी पाउडर तैयार कर बाजार में बेचा जा रहा था। विभाग ने मौके से लाखों रुपये का संदिग्ध स्टॉक जब्त कर लिया है और संबंधित फर्म के लाइसेंस को निलंबित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब देशभर में खाद्य पदार्थों की शुद्धता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है। यदि जांच में मिलावट की पुष्टि होती है तो यह मामला खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती माना जाएगा।

पनकी स्थित फैक्ट्री पर खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने पनकी के इस्पात नगर स्थित एक मसाला निर्माण इकाई पर अचानक छापेमारी की। कार्रवाई का नेतृत्व सहायक आयुक्त (खाद्य सुरक्षा) संजय प्रताप सिंह ने किया। उनके साथ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय वर्मा, उमाशंकर और रजनीश राय भी मौजूद रहे।

जांच के दौरान अधिकारियों ने फैक्ट्री में हल्दी पाउडर का उत्पादन होते देखा, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि वहां हल्दी बनाने के लिए आवश्यक साबुत हल्दी का पर्याप्त स्टॉक नहीं मिला। इसके बजाय बड़ी मात्रा में चावल के टुकड़े, लिक्विड कलर और अन्य संदिग्ध कच्चा माल मौजूद था।

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इसी आधार पर अधिकारियों ने आशंका जताई कि इन पदार्थों का उपयोग हल्दी पाउडर तैयार करने में किया जा रहा था। हालांकि अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

मिलावट की आशंका ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की चिंता

हल्दी भारतीय रसोई का सबसे महत्वपूर्ण मसाला है। इसका उपयोग केवल स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि औषधीय गुणों के कारण भी व्यापक रूप से किया जाता है। ऐसे में यदि हल्दी में मिलावट होती है तो यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।

खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम रंगों और अन्य अपमिश्रकों का लगातार सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच बेहद आवश्यक है।

छह नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए

छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कुल छह अलग-अलग नमूने एकत्र किए। इनमें तैयार हल्दी पाउडर, हल्दी निर्माण में उपयोग होने वाला लिक्विड कलर, चावल के टुकड़े, मिर्च पाउडर, मिर्च में प्रयुक्त रंग तथा धनिया पाउडर शामिल हैं।

सभी नमूनों को विधिवत सील कर खाद्य विश्लेषक के पास परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित उत्पाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अनुरूप हैं या उनमें मिलावट की गई है।

5.86 लाख रुपये का संदिग्ध स्टॉक जब्त

कार्रवाई के दौरान विभाग ने बड़ी मात्रा में सामग्री अपने कब्जे में ली। अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री से 77 बैग चावल के टुकड़े, 42 बैग हल्दी पाउडर, लगभग 30 किलोग्राम धनिया और मिर्च पाउडर तथा करीब 20 किलोग्राम हल्दी अपमिश्रक बरामद किया गया।

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जब्त किए गए पूरे स्टॉक की अनुमानित कीमत लगभग 5.86 लाख रुपये आंकी गई है। विभाग ने इस सामग्री को सीज कर आगे की जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह माल किन बाजारों में भेजा जा रहा था और इसका वितरण किस स्तर तक फैला हुआ था।

फर्म का लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू

प्रारंभिक जांच के आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित फर्म के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फर्म का लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

यदि प्रयोगशाला रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है तो फर्म के संचालकों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें आर्थिक दंड के साथ-साथ अन्य वैधानिक प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं।

त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी निगरानी

खाद्य सुरक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि आगामी त्योहारों और बढ़ती मांग को देखते हुए पूरे प्रदेश में मसाला निर्माण इकाइयों, खाद्य उत्पादों के गोदामों और पैकेजिंग केंद्रों पर निगरानी और तेज की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से संदिग्ध इकाइयों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।

उपभोक्ता भी बरतें सावधानी

विशेषज्ञों का सुझाव है कि उपभोक्ताओं को केवल भरोसेमंद ब्रांड या लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही मसाले खरीदने चाहिए। पैकेट पर निर्माण तिथि, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी अवश्य जांचें। यदि किसी मसाले का रंग, गंध या गुणवत्ता असामान्य लगे तो उसकी सूचना संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को दी जा सकती है।

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रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल इस मामले में अंतिम निर्णय प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। यदि नमूनों में मिलावट या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित फर्म के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं तो आगे की कार्रवाई भी उसी आधार पर तय होगी।

कानपुर में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर यह संदेश देती है कि खाद्य पदार्थों में संभावित मिलावट के खिलाफ प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि उपभोक्ता जागरूक रहें और केवल प्रमाणित एवं विश्वसनीय स्रोतों से ही खाद्य सामग्री खरीदें, ताकि उनके परिवार के स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का खतरा न आए।

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Author: यायावर

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