आजमगढ़

प्रशासनिक उदासीनता से नाराज चालक आंदोलन तेज करने की तैयारी में, भूख हड़ताल और भिक्षाटन की चेतावनी

राष्ट्रीय चालक आयोग और ड्राइवर सुरक्षा व कल्याण बोर्ड की स्थापना की मांग पर तीसरे दिन भी जारी रहा धरना

जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट

आजमगढ़। वाहन चालकों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर के निकट रिक्शा स्टैंड पर वाहन चालक कल्याण समिति संपूर्ण भारत के बैनर तले जारी अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी चालकों का आरोप है कि लगातार तीन दिनों से धरना देने के बावजूद प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याएं सुनने नहीं पहुंचा। इससे चालकों में गहरा असंतोष व्याप्त है और उन्होंने आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाने की चेतावनी दी है।

धरने में शामिल संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन के अगले चरण में भूख हड़ताल और भिक्षाटन जैसे कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि देशभर के लाखों वाहन चालकों के सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक अधिकारों के लिए किया जा रहा है।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश

धरना स्थल कलेक्ट्रेट भवन से महज कुछ दूरी पर स्थित होने के बावजूद किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर न पहुंचने से चालक संगठन में भारी नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन तत्पर रहने का दावा करता है, तब हजारों चालकों की आवाज को लगातार अनसुना करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

चालकों ने कहा कि प्रशासन की यह उदासीनता उन्हें आंदोलन को और अधिक तेज करने के लिए मजबूर कर रही है। उनका आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने अब तक न तो कोई वार्ता की पहल की और न ही उनकी मांगों पर गंभीरता दिखाई है।

बारिश में भीगने को मजबूर हुए चालक

धरने के दौरान हुई बारिश ने प्रदर्शनकारी चालकों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। संगठन का कहना है कि बारिश के कारण धरना स्थल पर मौजूद लोगों को पूरी रात कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। आरोप लगाया गया कि नगर पालिका प्रशासन से रात्रि विश्राम के लिए रैन बसेरे की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई।

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहता तो मानवीय आधार पर राहत उपलब्ध कराई जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे चालकों में यह संदेश गया कि उनकी समस्याओं के प्रति प्रशासन पूरी तरह असंवेदनशील बना हुआ है।

आर्थिक तंगी के बीच आंदोलन जारी

धरना दे रहे चालकों ने बताया कि लंबे समय तक आंदोलन चलाना उनके लिए आसान नहीं है। अधिकांश चालक प्रतिदिन मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। धरने के कारण उनकी आय पूरी तरह प्रभावित हो रही है। संगठन का कहना है कि अब धरना स्थल पर भोजन बनाने के लिए आवश्यक राशन और सब्जियां भी लगभग समाप्त हो चुकी हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनके पास बड़े संगठनों की तरह आर्थिक संसाधन नहीं हैं, फिर भी अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प अटल है। उनका मानना है कि यदि आज चालक वर्ग अपनी आवाज बुलंद नहीं करेगा, तो भविष्य में उनकी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

भूख हड़ताल और भिक्षाटन की दी चेतावनी

संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने शीघ्र वार्ता कर उनकी मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा। इसके तहत चालक हाथों में कटोरा लेकर कलेक्ट्रेट से लेकर कचहरी परिसर तक भिक्षाटन करेंगे। इसके बाद भी यदि कोई समाधान नहीं निकला, तो प्रदर्शनकारी सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

चालकों का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया जाएगा ताकि सरकार और प्रशासन का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर आकर्षित हो सके। संगठन ने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित करने की रणनीति तैयार की जाएगी।

राष्ट्रीय चालक आयोग और सुरक्षा बोर्ड की मांग सबसे प्रमुख

धरने के दौरान संगठन ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा कि देशभर के वाहन चालकों के हितों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय चालक आयोग का गठन अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही ड्राइवर सुरक्षा बोर्ड और चालक कल्याण बोर्ड की स्थापना भी जल्द से जल्द की जानी चाहिए।

संगठन का कहना है कि सड़क परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में वाहन चालकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन उनके लिए सामाजिक सुरक्षा, बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं का पर्याप्त अभाव है। ऐसे में एक स्वतंत्र आयोग और कल्याण बोर्ड के गठन से उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी पहल हो सकेगी।

दस सूत्रीय मांगों पर समझौता नहीं

धरने में शामिल पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संगठन अपनी दस सूत्रीय मांगों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उनका कहना है कि यह मांगें वर्षों से वाहन चालकों के हितों से जुड़ी हुई हैं और इन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चालक वर्ग के पास अपनी मेहनत और मजदूरी के अलावा कोई अन्य आय का साधन नहीं होता। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि वह उनके सामाजिक, आर्थिक और व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए ठोस नीतियां बनाए तथा उन्हें सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवनयापन का अवसर उपलब्ध कराए।

आंदोलन के आगे बढ़ने के संकेत

धरना स्थल पर मौजूद चालकों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने प्रशासन से जल्द वार्ता शुरू करने और वाहन चालकों की समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की है। वहीं दूसरी ओर आंदोलन के स्वर लगातार तीखे होते दिखाई दे रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन और व्यापक रूप ले सकता है।

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