DIOS घोटाला : चपरासी ने 8 साल में उड़ाए 8 करोड़, फर्जी खातों से खुला काला साम्राज्य

पीलीभीत DIOS घोटाले में आरोपी चपरासी और गिरफ्तार महिलाओं की तस्वीर के साथ रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी

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रिपोर्ट ; कमलेश कुमार चौधरी

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सामने आया एक चौंकाने वाला घोटाला न सिर्फ सरकारी तंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह एक मामूली कर्मचारी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर करोड़ों का खेल कर सकता है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम उर रहमान शम्सी ने कथित तौर पर आठ वर्षों में सरकारी खजाने से 8 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी कर दी।

मामूली वेतन, लेकिन करोड़ों का खेल

इल्हाम उर रहमान शम्सी की मासिक सैलरी लगभग 55,000 रुपये बताई जा रही है। इस हिसाब से उसकी वार्षिक आय करीब 6.6 लाख रुपये होती है। आठ साल की नौकरी में उसकी कुल वैध आय लगभग 80 लाख रुपये के आसपास बैठती है। लेकिन जांच में जो आंकड़े सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। आरोप है कि उसने इसी अवधि में 8 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक की अवैध रकम इकट्ठा कर ली। यह अंतर ही पूरे घोटाले की गंभीरता को दर्शाता है—जहां वैध आय से दस गुना अधिक धन अवैध तरीके से अर्जित किया गया।

सिस्टम पर पकड़ बनाकर रचा बड़ा खेल

जांच में यह भी सामने आया कि इल्हाम ने बेहद सुनियोजित तरीके से DIOS कार्यालय के महत्वपूर्ण कामों पर अपनी पकड़ बना ली थी। खासतौर पर वेतन बिल तैयार करना और टोकन जनरेशन जैसे संवेदनशील कार्य उसने अपने नियंत्रण में ले लिए थे।

इसी का फायदा उठाकर उसने फर्जीवाड़े का एक पूरा नेटवर्क तैयार किया। उसने अपने परिवार और रिश्तेदारों को कागजों में शिक्षक, क्लर्क और ठेकेदार के रूप में दर्शाया। इसके बाद फर्जी बेनेफिशियरी आईडी तैयार कर सरकारी भुगतान को इन खातों में ट्रांसफर कराया जाता रहा।

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रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों का लेन-देन

इस घोटाले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें परिवार के कई सदस्य शामिल पाए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार—

  • दूसरी पत्नी लुबना के खाते में लगभग 2.37 करोड़ रुपये
  • तीसरी पत्नी आजरा खान के खाते में 2.12 करोड़ रुपये
  • पहली पत्नी अर्शी के खाते में 1.15 करोड़ रुपये
  • साली फातिमा के खाते में 1.03 करोड़ रुपये
  • सास नाहिद के खाते में करीब 95 लाख रुपये

इसके अलावा अन्य खातों के माध्यम से भी पैसे का लेन-देन किया गया।

53 बैंक खाते और 98 ट्रांजेक्शन

प्रशासनिक जांच में अब तक 53 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की गई है। इन खातों के माध्यम से कुल 98 ट्रांजेक्शन किए गए, जिनके जरिए करोड़ों रुपये इधर-उधर किए गए। यह नेटवर्क इस तरह से तैयार किया गया था कि पहली नजर में सब कुछ वैध लगे, लेकिन गहराई से जांच करने पर फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।

बैंक की सतर्कता से खुला राज

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक ऑफ बड़ौदा के एक मैनेजर को खातों में संदिग्ध लेन-देन नजर आया। उन्होंने इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी। इसके बाद शुरू हुई जांच में धीरे-धीरे पूरे घोटाले का पर्दाफाश हो गया।

कई गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में इल्हाम की दो पत्नियों, साली, सास समेत कुल 7 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पहली पत्नी अर्शी को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। विक्रम दहिया (एडिशनल एसपी) के अनुसार अब तक करीब 5.5 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कर दी गई है। हालांकि, इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी इल्हाम उर रहमान शम्सी अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

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लग्जरी लाइफ और संपत्तियों का खुलासा

जांच में यह भी सामने आया है कि इल्हाम ने इस अवैध कमाई से कई शहरों में महंगी संपत्तियां खरीदीं। इनमें गाजियाबाद, बिजनौर और अलीगढ़ जैसे शहर शामिल हैं। महंगे फ्लैट, जमीन और लग्जरी जीवनशैली ने भी जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा।

सिस्टम की कमजोरियों पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक व्यक्ति की चालाकी का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की गंभीर खामियों का भी उदाहरण है। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा इतने बड़े स्तर पर घोटाला कर लेना यह दर्शाता है कि निगरानी और ऑडिट सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वित्तीय निगरानी मजबूत होती, तो इस तरह का घोटाला लंबे समय तक नहीं चल पाता।

पीलीभीत का यह घोटाला एक चेतावनी है कि सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना बेहद जरूरी है। एक मामूली कर्मचारी द्वारा करोड़ों की हेराफेरी यह साबित करती है कि यदि निगरानी कमजोर हो, तो भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर पनप सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्य आरोपी कब पकड़ा जाता है और इस मामले में आगे क्या बड़े खुलासे सामने आते हैं।

 

❓ DIOS घोटाला क्या है?

यह एक बड़ा सरकारी घोटाला है जिसमें एक चपरासी ने फर्जी खातों और दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की।

❓ आरोपी ने पैसे कैसे निकाले?

आरोपी ने वेतन बिल और टोकन सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर फर्जी बेनेफिशियरी आईडी बनाईं और पैसा रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया।

❓ कितनी रकम का घोटाला हुआ?

जांच में करीब 8 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी सामने आई है।

❓ कितने लोग गिरफ्तार हुए?

पुलिस ने आरोपी की पत्नियों, साली और सास समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया है।

❓ क्या मुख्य आरोपी पकड़ा गया?

नहीं, मुख्य आरोपी अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

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Author: यायावर

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