— रिपोर्ट: चुन्नीलाल प्रधान
गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में केंद्रीय राज्य मंत्री के नाम और कथित फर्जी पद का इस्तेमाल कर लंबे समय तक सरकारी प्रोटोकॉल प्राप्त करने के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में मनकापुर कोतवाली पुलिस ने केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के अपर निजी सचिव की शिकायत पर सर्वेश पाठक के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने कथित रूप से फर्जी पद और कूटरचित लेटर पैड का इस्तेमाल कर खुद को प्रभावशाली पदाधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया तथा सरकारी कार्यक्रमों में वीआईपी प्रोटोकॉल और सम्मान प्राप्त करता रहा।
अपर निजी सचिव की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के अपर निजी सचिव यूपी सिंह ने मनकापुर कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया कि सर्वेश पाठक वर्षों से स्वयं को विभिन्न संगठनों का राष्ट्रीय पदाधिकारी बताकर सरकारी अधिकारियों से संपर्क करता रहा। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने अपने प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए कथित रूप से ऐसे दस्तावेजों और लेटर पैड का उपयोग किया, जिनके माध्यम से वह प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजता था और सरकारी प्रोटोकॉल प्राप्त करने का प्रयास करता था।
फर्जी पद बताकर सरकारी प्रोटोकॉल लेने का आरोप
शिकायत के अनुसार, सर्वेश पाठक स्वयं को भारतीय श्रमिक कामगार कर्मचारी महासंघ का राष्ट्रीय महासचिव तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन संवर्धन प्रकृति कल्याण परिषद भारत का वाइस चेयरमैन बताता था। आरोप है कि इन्हीं पदों का हवाला देकर उसने जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों को पत्र भेजे तथा सरकारी कार्यक्रमों में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होने का अवसर प्राप्त किया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इन पदों के आधार पर आरोपी ने कई मौकों पर सरकारी प्रोटोकॉल और प्रशासनिक सम्मान हासिल किया, जबकि संबंधित दावों की सत्यता पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।
कई सरकारी कार्यक्रमों में रहा शामिल
आरोप है कि सर्वेश पाठक ने वृक्षारोपण अभियान सहित अनेक सरकारी कार्यक्रमों में भाग लिया। इतना ही नहीं, कुछ कार्यक्रमों के दौरान लगाए गए बोर्डों और प्रचार सामग्री में स्वयं को केंद्रीय दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री स्तर का पदाधिकारी भी दर्शाया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से स्वयं का प्रचार करते हुए खुद को भारत सरकार के कथित ‘नेचर वेलफेयर डिपार्टमेंट’ का वाइस चेयरमैन बताया। शिकायतकर्ता के अनुसार, भारत सरकार में इस नाम का कोई विभाग अस्तित्व में ही नहीं है।
मंत्री की छवि प्रभावित होने का दावा
अपर निजी सचिव यूपी सिंह का कहना है कि आरोपी ने केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के नाम और पहचान का कथित रूप से अनुचित उपयोग किया। इससे न केवल सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हुई, बल्कि मंत्री की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंची। इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि यदि किसी व्यक्ति को वर्षों तक सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल मिलता रहा, तो संबंधित विभागों और अधिकारियों द्वारा उसके पद और पहचान का समुचित सत्यापन क्यों नहीं किया गया।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला केवल एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मुकदमे तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह स्पष्ट होगा कि सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित किए जाने वाले व्यक्तियों के पद और अधिकारों का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी प्रोटोकॉल केवल अधिकृत और सत्यापित व्यक्तियों को ही दिया जाना चाहिए। ऐसे मामलों से बचने के लिए भविष्य में दस्तावेजों और पदनामों की स्वतंत्र जांच की व्यवस्था और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
आरोपी ने आरोपों को बताया निराधार
उधर, सर्वेश पाठक ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें पहले से ही सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल मिलता रहा है और उन्होंने किसी भी केंद्रीय मंत्री, सरकारी पद अथवा किसी व्यक्ति के नाम का दुरुपयोग नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
पुलिस ने शुरू की जांच
मनकापुर कोतवाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, पत्राचार, प्रचार सामग्री और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

























