प्रेमचंद की कहानियों ने बच्चों में जगाई साहित्य के प्रति नई रुचि, नाट्य प्रस्तुति ने बांधा समां

रिपोर्टर तरुण मोहम्मद की तस्वीर के साथ चाईबासा के उत्क्रमित उच्च विद्यालय टूटूगुटू में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में दिनकर शर्मा द्वारा 'बड़े भाई साहब' की नाट्य प्रस्तुति का फीचर पोस्टर।

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रिपोर्ट: तरुण मोहम्मद

चाईबासा (झारखंड)। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी प्रखंड स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय टूटूगुटू में साहित्य, रंगमंच और शिक्षा का अनूठा संगम देखने को मिला। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) चाईबासा के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, साहित्य प्रेमियों और इप्टा के पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रेमचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करना ही नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ना और उनमें पढ़ने-समझने की रुचि विकसित करना भी था।

विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह साहित्यिक रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया। विद्यार्थियों में उत्सुकता साफ झलक रही थी और शिक्षकों ने भी इसे शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

‘बड़े भाई साहब’ की नाट्य प्रस्तुति बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का सबसे यादगार और प्रभावशाली क्षण तब आया जब देश के ख्यातिलब्ध स्टोरीटेलर एवं टीवी अभिनेता दिनकर शर्मा ने मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी ‘बड़े भाई साहब’ का लगभग आधे घंटे तक एकल नाट्य मंचन प्रस्तुत किया।

उनकी प्रभावशाली संवाद शैली, सशक्त अभिनय, चेहरे के भाव, आवाज़ के उतार-चढ़ाव और पात्रों के जीवंत चित्रण ने दर्शकों को पूरी तरह कहानी के संसार में पहुंचा दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कहानी के सभी पात्र मंच पर सजीव हो उठे हों।

विद्यालय के बच्चे पूरे समय एकाग्र होकर प्रस्तुति देखते रहे। कई स्थानों पर हास्य के दृश्य पर बच्चों की खिलखिलाहट गूंज उठी, जबकि भावनात्मक प्रसंगों ने उन्हें गंभीर और भावुक भी कर दिया। प्रस्तुति समाप्त होते ही पूरे परिसर में देर तक तालियों की गूंज सुनाई देती रही।

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दो भाइयों के रिश्ते की संवेदना ने छुआ सभी का मन

‘बड़े भाई साहब’ केवल दो भाइयों की कहानी नहीं, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी, प्रेम, त्याग और आत्मीय संबंधों की कहानी है। दिनकर शर्मा ने इन सभी भावों को इतने सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया कि विद्यार्थी कहानी के संदेश को आसानी से आत्मसात कर सके।

कार्यक्रम के अंत में कई बच्चों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पहली बार किसी साहित्यिक कहानी को इस तरह मंच पर जीवंत होते देखा। शिक्षकों ने भी माना कि इस प्रकार की प्रस्तुति पाठ्यपुस्तक की सामग्री को अधिक रोचक और यादगार बना देती है।

प्राचार्य ने बताया विद्यार्थियों के लिए उपयोगी अनुभव

विद्यालय के प्राचार्य मानस गोराई ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल ‘बड़े भाई साहब’ कहानी का इस तरह मंचन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ।

उन्होंने कहा कि जब साहित्य को अभिनय और अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है तो विद्यार्थी केवल कहानी पढ़ते ही नहीं, बल्कि उसे महसूस भी करते हैं। इससे भाषा, साहित्य और अभिनय तीनों के प्रति उनकी समझ विकसित होती है।

प्राचार्य ने इप्टा चाईबासा तथा कलाकार दिनकर शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन विद्यालय में होते रहने चाहिए।

नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की कि आधुनिक दौर में डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण बच्चों का साहित्य से जुड़ाव लगातार कम होता जा रहा है।

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वक्ताओं ने कहा कि आज की पीढ़ी की भाषा और अभिरुचियों में तेजी से बदलाव आ रहा है। ऐसे समय में मुंशी प्रेमचंद जैसे महान साहित्यकारों की रचनाओं को नई शैली और रचनात्मक माध्यमों के जरिए बच्चों तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि यदि विद्यालयों में साहित्यिक गतिविधियां, नाट्य मंचन, कहानी पाठ और संवाद जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं तो बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित होगी और उनमें संवेदनशीलता, नैतिकता तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी।

इप्टा पदाधिकारियों ने रखे अपने विचार

इप्टा चाईबासा के संस्थापक सदस्य तरुण मोहम्मद ने अपने संबोधन में कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करता है। उनकी कहानियां केवल मनोरंजन नहीं करतीं बल्कि समाज को सोचने और बदलने की प्रेरणा भी देती हैं।

इप्टा के सचिव संजय चौधरी ने प्रेमचंद की विभिन्न कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने समय में थीं। उन्होंने विद्यार्थियों से साहित्य पढ़ने और सामाजिक सरोकारों को समझने का आग्रह किया।

शीतल सुगन्धिनी बागे ने प्रेमचंद के जीवन संघर्षों, साहित्य साधना और उनके सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया।

इप्टा चाईबासा के अध्यक्ष कैसर परवेज़ ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल पढ़ने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन में अपनाने योग्य विचारधारा है। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।

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बड़ी संख्या में मौजूद रहे शिक्षक, विद्यार्थी और इप्टा सदस्य

इस साहित्यिक आयोजन में इप्टा चाईबासा के संस्थापक सदस्य तरुण मोहम्मद, अध्यक्ष कैसर परवेज़, सचिव संजय चौधरी, शीतल सुगन्धिनी बागे, जुलियानी कोड़ाह, आनंद शर्मा, शिवशंकर पासवान, राजू प्रजापति, सुशीला पुरती और सीता पुरती सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

विद्यालय परिवार की ओर से प्राचार्य मानस गोराई, दुसरु पाड़ेया, सहदेव सेठ, विकास पाट पिंगुवा, चंदन कुमार, बिश्वेश्वर दास, लक्ष्मी पुरती सहित सभी शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कार्यक्रम में शामिल हुए।

साहित्य और रंगमंच का प्रेरणादायक संगम

कार्यक्रम का समापन साहित्यिक ऊर्जा, सकारात्मक संवाद और प्रेरणादायक वातावरण के बीच हुआ। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि विद्यालयों में साहित्य को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर रंगमंच, कहानी वाचन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ा जाए तो बच्चे न केवल भाषा और साहित्य के प्रति आकर्षित होंगे, बल्कि उनके व्यक्तित्व का भी समग्र विकास होगा।

मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण बना कि साहित्य समाज को जोड़ने, संवेदनशील बनाने और नई पीढ़ी में मानवीय मूल्यों का विकास करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इप्टा चाईबासा की यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्र में साहित्यिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाली साबित होगी।

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Author: यायावर

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