17 अक्टूबर 2026 8:52 अपराह्न

72 दिन बाद भी न्याय की राह देख रहा एक परिवार, सवालों के घेरे में जांच की रफ्तार

रिपोर्टर इरफान अली लारी की तस्वीर के साथ हिदायतुल्लाह का चित्र, ट्रैक्टर और दुर्घटना स्थल का प्रतीकात्मक दृश्य, जिसमें 20 मई 2026 को हुई मौत के 72 दिन बाद भी अधूरी जांच और न्याय की मांग को दर्शाया गया है।

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

20 मई 2026 को हुई एक दर्दनाक घटना के बाद से एक परिवार आज भी न्याय की आस लगाए बैठा है। समय बीतने के साथ जहां अधिकांश मामलों में पुलिस जांच आगे बढ़ती है, वहीं इस प्रकरण में 72 दिन गुजर जाने के बाद भी जांच किसी निर्णायक मुकाम तक नहीं पहुंच सकी है। यही कारण है कि अब इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों के बीच भी कई सवाल उठने लगे हैं।

मृतक हिदायतुल्लाह, जो रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के रामपुर हीरामन गांव के निवासी थे, कथित रूप से ट्रैक्टर की चपेट में आने से अपनी जान गंवा बैठे थे। घटना के बाद परिजनों ने न्याय की उम्मीद के साथ पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अब तक न तो कथित ट्रैक्टर की बरामदगी हो सकी है और न ही आरोपी चालक की गिरफ्तारी की कोई सूचना सामने आई है।

विधवा और तीन मासूम बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़

हिदायतुल्लाह की मौत के बाद उनके परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी के कंधों पर आ गई है। तीन छोटे-छोटे बच्चों का पालन-पोषण, भविष्य की चिंता और न्याय पाने की लंबी लड़ाई, इन सबका बोझ एक साथ उनके सामने खड़ा है।

परिवार का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि घटना के बाद जल्द ही दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होगी, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद स्थिति लगभग जस की तस बनी हुई है। इससे परिवार की मानसिक पीड़ा लगातार बढ़ती जा रही है।

72 दिन बाद भी जांच की धीमी रफ्तार पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मामलों में पुलिस कुछ ही दिनों के भीतर आरोपियों तक पहुंच जाती है और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई भी करती है। ऐसे में इस मामले में 72 दिन बीत जाने के बाद भी जांच किसी ठोस नतीजे तक क्यों नहीं पहुंच सकी, यह बड़ा सवाल बन गया है।

लोगों का मानना है कि यदि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की गंभीरता से जांच की जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। हालांकि पुलिस की ओर से अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है जिससे जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो सके।

पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में दर-दर भटकने को मजबूर

परिजनों का कहना है कि वे लगातार संबंधित अधिकारियों से मिलकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उन्हें अभी तक ऐसा भरोसा नहीं मिला जिससे यह लगे कि जल्द ही मामले का समाधान होगा।

परिवार की सबसे बड़ी मांग यही है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और कानून के अनुसार उनके विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि न्याय मिलने से ही परिवार को मानसिक संतोष मिल सकेगा।

सामाजिक नेतृत्व की भूमिका पर भी उठे प्रश्न

इस घटना के बाद एक और पहलू चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले अनेक लोग अब तक पीड़ित परिवार का हालचाल जानने नहीं पहुंचे।

ऐसे समय में जब परिवार पूरी तरह टूट चुका है, सामाजिक संवेदनशीलता की भी परीक्षा होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना समाज का नैतिक दायित्व है।

जिला पंचायत सदस्य कमलेश पाण्डेय की पहल बनी चर्चा का विषय

स्थानीय लोगों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम के बीच जिला पंचायत सदस्य कमलेश पाण्डेय पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिवार का हालचाल जाना, बच्चों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया और हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि दुख की इस घड़ी में किसी भी व्यक्ति द्वारा पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना सामाजिक जिम्मेदारी का परिचायक है। इस पहल की क्षेत्र में चर्चा भी हो रही है।

न्याय में देरी पर बढ़ रही चिंता

कानून व्यवस्था पर लोगों का विश्वास तभी मजबूत होता है जब प्रत्येक मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो। यदि किसी मामले में अनावश्यक विलंब होता है तो पीड़ित परिवार की परेशानियां और अधिक बढ़ जाती हैं।

इस मामले में भी यही अपेक्षा की जा रही है कि जांच एजेंसियां सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करें, ताकि घटना की वास्तविकता सामने आ सके और दोषी कानून के दायरे में लाए जा सकें।

परिवार की एक ही मांग—निष्पक्ष जांच और शीघ्र न्याय

हिदायतुल्लाह के परिजनों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय के लिए है। उनका आग्रह है कि मामले की जांच तेज की जाए, कथित वाहन और चालक की पहचान कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।

स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि न्याय किसी व्यक्ति की जाति, धर्म, आर्थिक स्थिति या सामाजिक पहचान देखकर नहीं, बल्कि समानता और निष्पक्षता के सिद्धांत पर मिलना चाहिए। यही लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन की मूल भावना भी है।

यदि जांच शीघ्र पूरी होती है और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई होती है, तो इससे न केवल पीड़ित परिवार का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि समाज में भी यह संदेश जाएगा कि कानून सभी के लिए समान रूप से कार्य करता है।

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