चित्रकूट

भीम आर्मी ने राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, आरक्षण और भूमिहीनों के अधिकार समेत उठाईं 9 प्रमुख मांगें

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट। देशव्यापी अभियान के तहत भीम आर्मी-जय भीम संगठन ने सोमवार को चित्रकूट में जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सामाजिक न्याय, आरक्षण, भूमिहीनों के अधिकार तथा दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी वर्ग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की। संगठन का कहना है कि लोकतंत्र के चारों स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और पत्रकारिता—में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि वंचित वर्गों को समान अवसर मिल सकें।

भीम आर्मी-जय भीम संगठन के जिलाध्यक्ष संजय सिंह राणा के नेतृत्व में जिला अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि यह राष्ट्रव्यापी अभियान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह नोटियाल के आह्वान पर 30 जून 2026 को आयोजित किया गया। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से संविधान की मूल भावना के अनुरूप सामाजिक न्याय और समान अवसरों से जुड़े विषयों पर ठोस निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि स्वतंत्रता के दशकों बाद भी दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज के अनेक परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। संगठन का कहना है कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए आरक्षण सहित कई संवैधानिक प्रावधान किए थे, लेकिन उनका पूर्ण लाभ अभी तक सभी पात्र लोगों तक नहीं पहुंच सका है। इसी कारण समाज के कमजोर वर्ग आज भी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

संगठन ने ज्ञापन में सबसे पहले भूमिहीन परिवारों को कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि भूमि के अभाव में हजारों परिवार आज भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पा रहे हैं। यदि भूमिहीनों को खेती योग्य जमीन उपलब्ध कराई जाए तो उनकी आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

ज्ञापन में सरकारी विभागों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि विभिन्न विभागों में आरक्षित वर्ग के अनेक पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। इन रिक्तियों को शीघ्र भरने के साथ-साथ बैकलॉग पदों पर विशेष भर्ती अभियान चलाया जाना चाहिए। संगठन ने आबादी के अनुपात के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

शिक्षा के क्षेत्र को लेकर भी ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। संगठन ने कहा कि नीट, जेईई, यूपीएससी तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय को संविधान के अनुरूप आरक्षण का पूरा लाभ मिलना चाहिए। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में भी सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पूर्ण पालन किया जाए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से वंचित विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिल सकें।

भीम आर्मी-जय भीम संगठन ने नगर निकायों में कार्यरत निजी सफाई कर्मचारियों को नियमित करने तथा ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग भी उठाई। ज्ञापन में कहा गया कि सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग बढ़ाया जाए और मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी अमानवीय प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रभावी कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए।

ज्ञापन में सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था से जुड़े विषयों का भी उल्लेख किया गया है। संगठन ने दलित, मुस्लिम, पिछड़े और आदिवासी समुदाय के खिलाफ होने वाली हिंसक घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही संगठन ने कानून के समान और निष्पक्ष अनुपालन पर भी जोर दिया है, ताकि समाज के सभी वर्गों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास बना रहे।

कृषि और श्रमिक हितों से संबंधित मांगों में भूमिहीन किसानों को भूमि का आवंटन, कृषि मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने, किसानों की फसलों का शत-प्रतिशत बीमा कराने तथा किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रभावी योजनाएं लागू करने का आग्रह किया गया है। संगठन का मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना सामाजिक और आर्थिक समानता का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।

ज्ञापन में नई शिक्षा नीति पर पुनर्विचार करने और संविधान की मूल भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई है। इसके अलावा प्रत्येक जनपद में डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर छात्रावास स्थापित करने का सुझाव दिया गया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध हो सके।

जिलाध्यक्ष संजय सिंह राणा ने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष भेजे गए ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पहल होगी। वहीं जिला प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर उसे नियमानुसार शासन स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर संगठन के कार्यकर्ताओं ने संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रभावी नीतियों का क्रियान्वयन समय की मांग है। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाना और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की आवाज बुलंद करना है।

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