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जहरीली गैस का कहर : कुछ ही मिनटों में उजड़ गए कई घर, पिता-पुत्र समेत तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत

सोमवार तड़के फैक्ट्री में हुआ जहरीली गैस का रिसाव, देखते ही देखते तीन मजदूरों की चली गई जान

विकास कुमार की रिपोर्ट

लुधियाना पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना में सोमवार तड़के एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। शहर के इंडस्ट्रियल एरिया-ए स्थित गैसपुरा क्षेत्र में संचालित एक हैंड टूल निर्माण फैक्ट्री में जहरीली गैस का रिसाव होने से पिता-पुत्र समेत तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि सात से आठ अन्य मजदूर बेहोश होकर अस्पताल पहुंच गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू कर दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दीप टूल्स नामक फैक्ट्री में रविवार देर रात से उत्पादन कार्य चल रहा था। अधिकांश कर्मचारी अपनी-अपनी मशीनों पर काम कर रहे थे। इसी दौरान सोमवार तड़के अचानक किसी पाइपलाइन, गैस टैंक अथवा तकनीकी सिस्टम से जहरीली गैस का रिसाव शुरू हो गया। शुरुआत में किसी को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन कुछ ही मिनटों में गैस पूरे परिसर में फैल गई और वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आने लगे।

कुछ ही मिनटों में सामान्य माहौल बदला मातम में

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फैक्ट्री के भीतर पहले आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत शुरू हुई। देखते ही देखते स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई मजदूर बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। जहरीली गैस का असर इतना तेज था कि कर्मचारियों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय भी नहीं मिल पाया।

फैक्ट्री के अंदर मौजूद मजदूरों ने किसी तरह अपने साथियों को बाहर निकालने का प्रयास किया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंच गए और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। बेहोश मजदूरों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

पिता-पुत्र की एक साथ मौत ने झकझोरा

हादसे में मृतकों में मनोज और उनका पुत्र अमित शामिल हैं। दोनों रोज की तरह काम पर पहुंचे थे और फैक्ट्री के उसी हिस्से में कार्य कर रहे थे जहां गैस का प्रभाव सबसे अधिक बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार दोनों मशीनों से निकलने वाली सामग्री को ट्रॉली में भर रहे थे, तभी जहरीली गैस की चपेट में आ गए।

अस्पताल ले जाने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। एक ही परिवार के दो सदस्यों की एक साथ मौत से परिजनों में कोहराम मच गया है। तीसरे मृतक की पहचान और उसके परिजनों से संपर्क करने की प्रक्रिया भी जारी है।

कई मजदूरों का अस्पताल में चल रहा उपचार

गैस रिसाव के दौरान फैक्ट्री में मौजूद सात से आठ अन्य मजदूर भी प्रभावित हुए। इनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार प्रभावित मजदूरों में सांस लेने में कठिनाई, ऑक्सीजन की कमी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं पाई गई हैं।

चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। अस्पताल प्रशासन ने सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया है।

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर पहुंच गए। पूरे फैक्ट्री परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू कर दी गई। अधिकारियों ने फैक्ट्री प्रबंधन, कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की।

लुधियाना के पुलिस आयुक्त स्वपन शर्मा ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और गैस के प्रकार तथा रिसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल

इस हादसे के बाद फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैस डिटेक्शन सिस्टम, आपातकालीन चेतावनी अलार्म और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण पूरी तरह सक्रिय होते तो नुकसान को कम किया जा सकता था।

श्रमिक संगठनों ने भी इस घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

पुलिस दर्ज करेगी प्राथमिकी

मोती नगर थाना पुलिस ने बताया कि मामले में जिम्मेदार व्यक्तियों और फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं फॉरेंसिक टीम फैक्ट्री परिसर से नमूने एकत्र कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस प्रकार की गैस का रिसाव हुआ और उसकी मात्रा कितनी थी।

परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

हादसे के बाद मृतकों के घरों में मातम पसरा हुआ है। जिन परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए हैं, उनके सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को पीड़ित परिवारों की तत्काल सहायता करनी चाहिए।

औद्योगिक क्षेत्रों के लिए चेतावनी

यह हादसा केवल एक फैक्ट्री तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि देशभर के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए चेतावनी भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित सुरक्षा ऑडिट, आधुनिक उपकरणों का उपयोग और कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देकर ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

लुधियाना के गैसपुरा क्षेत्र में सोमवार तड़के हुआ यह जहरीली गैस रिसाव हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला घाव बन गया है। पिता-पुत्र समेत तीन मजदूरों की मौत ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह हादसा तकनीकी खराबी का परिणाम था या लापरवाही का। मृतकों के परिजन न्याय और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

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