अपराध

चरित्र हनन से टूटा परिवार, न्याय के लिए लड़ाई जारी ; ट्विशा शर्मा मौत मामले में पिता और भाई ने उठाए बड़े सवाल

सुहानी परिहार की रिपोर्ट

भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पीड़ित परिवार का दर्द एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सामने आया है। न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न केवल जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए, बल्कि आरोपियों और कुछ वर्गों द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे ‘कैरेक्टर एसासिनेशन’ पर भी गहरी नाराजगी जताई। प्रेस वार्ता के दौरान मृतका के पिता नवीनिधि शर्मा और भाई मेजर हर्षित शर्मा बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की मौत के बाद अब उसके चरित्र को निशाना बनाकर परिवार को मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

परिवार का कहना है कि वे केवल निष्पक्ष जांच और न्याय चाहते हैं, लेकिन जिस तरह से मामले को प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं, उससे उनका भरोसा लगातार टूट रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिवार ने पुलिस कार्रवाई, एफआईआर दर्ज होने में देरी, आरोपियों के प्रभाव और अदालत में हो रही घटनाओं को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े किए।

“मृत बेटी की चरित्र हत्या सबसे बड़ा दर्द”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सबसे संवेदनशील मुद्दा मृतका ट्विशा शर्मा के कथित चरित्र हनन का रहा। पिता नवीनिधि शर्मा ने बेहद आहत स्वर में कहा कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है और वह खुद अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद भी नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोग उसे बदनाम करने में लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी मृत व्यक्ति, खासकर एक पीड़िता के बारे में इस तरह की बातें फैलाना केवल अमानवीय ही नहीं बल्कि कानूनी रूप से भी अपराध है। नवीनिधि शर्मा ने मीडिया और समाज से अपील करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी खबर या बयान को प्रसारित करने से पहले यह सोचना जरूरी है कि पीड़ित परिवार किन परिस्थितियों से गुजर रहा होगा।

उनका कहना था कि उनकी बेटी की मौत के बाद परिवार पहले ही गहरे सदमे में है और अब लगातार उसके चरित्र पर सवाल उठाए जाने से पीड़ा कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वह सनसनी फैलाने के बजाय तथ्यात्मक और संवेदनशील पत्रकारिता को प्राथमिकता दे।

प्रभावशाली आरोपियों के कारण न्याय में देरी?

नवीनिधि शर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है, लेकिन मामले में न्याय मिलने में देरी की एक बड़ी वजह आरोपियों का प्रभावशाली होना है। उन्होंने दावा किया कि अदालत में पुलिस की ओर से भी यह कहा गया कि आरोपियों का प्रभाव इतना अधिक है कि उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

परिवार के मुताबिक इसी आधार पर एक आरोपी बेटे की जमानत निरस्त हुई, लेकिन दूसरी आरोपी को अग्रिम जमानत मिल चुकी है और वह खुलेआम घूम रही है। पिता ने कहा कि इससे परिवार के भीतर असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच एजेंसियां खुद आरोपियों के प्रभाव को स्वीकार कर रही हैं तो फिर मामले में तेजी और पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई जा रही। परिवार का कहना है कि उन्हें डर है कि कहीं प्रभाव और दबाव के कारण मामले की दिशा न बदल दी जाए।

“सबसे पहला कॉल हमने किया था”

ट्विशा शर्मा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जांच प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि घटना के बाद सबसे पहला कॉल उनके परिवार की ओर से किया गया था, न कि आरोपी पक्ष की तरफ से।

हर्षित शर्मा ने कहा कि आरोपी पक्ष यह दावा कर रहा है कि वे ट्विशा को बचाने के लिए जल्दबाजी में थे, लेकिन उपलब्ध वीडियो फुटेज कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। उनके मुताबिक वीडियो में गिरिबाला सिंह बेहद सामान्य और शांत तरीके से सीढ़ियों पर आती-जाती दिखाई देती हैं, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि यदि स्थिति इतनी गंभीर थी तो तत्काल घबराहट या जल्दबाजी क्यों नजर नहीं आई। उन्होंने कहा कि यही विरोधाभास पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को और मजबूत करता है।

एफआईआर दर्ज होने में तीन दिन की देरी पर सवाल

मेजर हर्षित शर्मा ने कहा कि उनके परिवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए तीन दिन से अधिक इंतजार करना पड़ा। उनके अनुसार घटना के बाद लगातार प्रयासों के बावजूद एफआईआर आखिरकार 15 मई की रात करीब 2:30 बजे दर्ज की गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले ही आरोपी पक्ष अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दाखिल कर चुका था। परिवार का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित रणनीति की ओर इशारा करता है।

हर्षित शर्मा ने कहा कि जिस घर से यह मामला जुड़ा है, वहां से पुलिस थाना महज कुछ सेकंड की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद पुलिस को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई, यह बेहद महत्वपूर्ण सवाल है। उन्होंने कहा कि यदि घटना वास्तव में अचानक और गंभीर थी तो फिर पुलिस को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए था।

“कोर्ट परिसर में भी मिल रही धमकियां”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेजर हर्षित शर्मा ने आरोप लगाया कि उनके परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अदालत परिसर में उनके पिता को डराने और दबाव बनाने की कोशिश की गई।

हर्षित शर्मा ने कहा कि अदालत ने गिरिबाला सिंह को 63 वर्षीय प्रतिष्ठित महिला और गैर-खतरनाक मानते हुए राहत दी, लेकिन वही महिला कथित तौर पर उनके परिवार को डराने के लिए लोगों को भेज रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता को धमकी दी गई कि 30 लोग उन्हें पीटेंगे।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी व्यक्ति को यह अधिकार किसने दिया कि वह एक दिवंगत लड़की के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करे और उसके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करे। परिवार का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं बल्कि पीड़ित पक्ष के मनोबल को भी तोड़ती हैं।

“समर्थ सिंह आखिर कहां हैं?”

मेजर हर्षित शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह सवाल भी उठाया कि समर्थ सिंह आखिर कहां हैं और वे अब तक सामने क्यों नहीं आए। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों और मीडिया को इस सवाल पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

परिवार ने यह भी मांग उठाई कि मामले में दूसरी पोस्टमार्टम जांच की आवश्यकता पर चर्चा क्यों नहीं हो रही। उनका कहना है कि कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हुए हैं और इन्हीं सवालों के कारण परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

हर्षित शर्मा ने कहा कि उनका परिवार किसी तरह की राजनीति या प्रचार नहीं चाहता। वे केवल चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

संवेदनशील मामलों में समाज और मीडिया की भूमिका पर बहस

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील मामलों में मीडिया, समाज और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि किसी भी चर्चित मामले में तथ्यों से पहले आरोप, अफवाहें और व्यक्तिगत टिप्पणियां सामने आने लगती हैं।

ट्विशा शर्मा मामले में भी परिवार का सबसे बड़ा दर्द यही दिखाई दिया कि न्याय की लड़ाई लड़ने के साथ-साथ उन्हें अपनी दिवंगत बेटी की छवि बचाने की भी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परिवार ने बार-बार यही दोहराया कि किसी भी पीड़िता या मृत व्यक्ति के बारे में अपमानजनक और अपुष्ट बातें फैलाना समाज को और असंवेदनशील बनाता है।

परिवार का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है, लेकिन वे चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी दबाव के पूरी की जाए ताकि सच सामने आ सके और उनकी बेटी को न्याय मिल सके।

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